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30 साल से बिहार सरकार को लगा रहा था चूना, तीन विभागों में एक साथ की नौकरी, ऐसे खुली पोल

By रोहित कुमार पोरवाल | Updated: August 24, 2019 16:38 IST

बिहार के सुपौल के एक गांव के रहने वाले शख्स ने तीन दशकों तक एक साथ 3 विभागों में नौकरी करते हुए सरकार को चूना लगाया। मामला उजागर होने पर शख्स के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

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ठळक मुद्देतीन दशकों से बिहार सरकार के 3 विभागों में एक साथ नौकरी कर रहे शख्स का भंडाफोड़मामला उजागर होने के बाद से फरार चल रहा आरोपी, पुलिस ने शख्स को दबोचने के लिए बनाई टीम

बिहार सरकार के तीन विभागों में एक साथ करीब 30 वर्षों से नौकरी कर रहे शख्स का भंडाफोड़ हुआ है। इस घटना से सरकारी और पुलिस महकमे में हलचल मची है। पटना जिले के बाबूलाल गांव के रहने वाले सुरेश राम पर आरोप है कि वह एक साथ तीन सरकारी विभागों में नौकरी करते हुए वहां से तनख्वाह उठा रहे थे। इस दौरान सुरेश राम को समय-समय पर प्रमोशन मिलने की बात भी सामने आई है।

टीओआई की खबर के मुताबिक, आरोपी की करतूत का भंडाफोड़ उसके रिटायर होने से कुछ समय पहले हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार के सभी सरकारी कर्मचारियों की अधार, जन्मतिथि, पैन नंबर जैसे विवरण को दर्ज करने वाले नए वित्तीय उपकरण कॉम्प्रिहेंसिव फाइनेंसियल मैनेजमेंट सिस्टम (सीएफएमएस) ने आरोपी की धोखाधड़ी को पकड़ लिया। 

भवन निर्माण विभाग में काम करने वाले एक सहकर्मी एक्जिक्यूटिव इंजीनियर की शिकायत के आधार पर पिछले हफ्ते सुरेश के खिलाफ किशनगंज पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी। आरोपी एक-दो वर्षों में रिटायर हो जाता लेकिन अब फरार चल रहा है। किशनगंज के पुलिस अधीक्षक कुमार आशीष ने मीडिया से कहा कि विभागीय पुलिस अधिकारी अखिलेश सिंह की अगुवाई में चार सदस्यीय पुलिस की टीम आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए बनाई गई है। 

रिपोर्ट के मुताबिक, सुरेश की पहली नौकरी राज्य सड़क निर्माण विभाग में 20 फरवरी 1988 को बतौर जूनियर इंजीनियर लगी थी। अगले वर्ष जल संसाधन विभाग में उसी शहर में 28 जुलाई 1989 को दूसरी नौकरी लगी। सुरेश को उसी वर्ष जल संसाधन विभाग में एक और नौकरी मिली, इसके लिए उसे सुपौल जिले के भीम नगर में तैनात किया गया। 

शिकायतकर्ता के अनुसार, सुरेश को 17 जून 2005 को जल संसाधन विभाग और 10 अप्रैल, 2018 को सड़क निर्माण विभाग में सहायक अभियंता के तौर पर प्रमोशन मिला था। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि बीती 22 जुलाई को उप सचिव ने कुछ गड़बड़ियों का पता लगने के बाद सुरेश को उसके सभी कागजात सिंचाई विभाग में लाने के लिए कहा था। सुरेश कागजात नहीं लाया। 9 अगस्त को सचिव ने मामले की एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया।  

सुरेश के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच अधिकारी नारायण सिंह ने सुरेश की गिरफ्तारी की वारंट के लिए स्थानीय अदालत का रुख किया है। जांच अधिकारी के मुताबिक, ''अगर सुरेश की गिरफ्तारी नहीं होती है तो हम अदालत से उसकी संपत्ति कुर्की का आदेश लेंगे।''

टॅग्स :बिहारक्राइमक्राइम न्यूज हिंदीपटना
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