लखनऊः उत्तर प्रदेश में करीब 11 हजार करोड़ रुपए के मुर्गी पालन और अंडा कारोबार को बचाने के लिए योगी सरकार ने हर अंड़े पर एक्सपायरी डेट लिखने को अनिवार्य करने का फैसला कर लिया है. बीते तीन वर्षों से राज्य के मुर्गी पालन और अंडा कारोबार से जुड़े करीब 15 लाख लोग सरकार से यह मांग कर रहे थे कि राज्य में अंडे का मूल्य निर्धारण के लिए सरकार की संस्था बने और कोल्डस्टोरेज में महीनों से रखे अंडे की बिक्री पर रोक लगाने के लिए राज्य में बिकने वाले हर अंडे पर एक्सपायरी डेट की मुहर लगाए जाने को अनिवार्य करने किया जाए.
भारत सरकार के नियमों के तहत राज्य में यह फैसला लिए जाने की मांग कर रहे राज्य के मुर्गी पालन और अंडा कारोबारियों की इस मांग का संज्ञान लेते हुए सरकार ने इसी 1 अप्रैल से अंडे का कारोबार करने वालों के लिए हर अंडे पर उसकी एक्सपायरी डेट की मुहर लगाना अनिवार्य करने का फैसला किया. यही नहीं हर अंडों पर वह तारीख भी लिखी हुई मिलेगी, जिस दिन मुर्गी ने उन्हें दिया गया था. लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है.
यूपी में तीन हजार मुर्गी पालन फार्म
राज्य के पशुपालन और डेयरी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार, सरकार के इस फैसले का मकसद उपभोक्ताओं को ताजा और सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है. इस फैसले के चलते अंडे के कारोबारियों और मुर्गी पालन करने वालों को अनिवार्य तौर पर इस फैसले का पालन करना होगा.
बताया जा रहा है कि सरकार के इस फैसले का लाभ राज्य के 15 लाख से अधिक मुर्गी पालन और अंडा कारोबार से जुड़े लोगों को होगा. यूपी में मुर्गी पालन और अंडे का कारोबार हर जिले में फैला है. राज्य में करीब तीन हजार मुर्गी पालन फार्म हैं. इनमें करीबी 700 मुर्गी पालन फ़ार्म सरकारी और 2200 गैर सरकारी हैं. करीब डेढ़ लाख लोग इस कारोबार जुड़े हैं.
जबकि अंडा कारोबार में 14 लाख से अधिक लोग जुड़े हैं. यूपी कुक्कुट विकास समिति के अध्यक्ष वीपी सिंह के अनुसार राज्य में मुर्गी पालन और अंडा कारोबार का उद्योग करीब 11 हजार करोड़ रुपए का है. ये उद्योग यूपी में प्रति दिन तीन करोड़ अंडे उपलब्ध कराता हैं. इतने अंडे की ही प्रतिदिन यूपी में खपत है. इसके बाद भी यह उद्योग संकट में था.
इसी वजह थी अंडे का कारोबारियों का सस्ते मूल्य पर खरीदे गए अंडे को कोल्ड स्टोरेज में रखना और अंडे का दम बढ़ते ही उसे अंडा बिक्री करने वाले दुकानदारों को तय कीमत से कम पर बेचना. इस इस दुष्चक्र का खामियाज सूबे के मुर्गी पालक और अंडा करोबार से जुड़े लोगों को उठाना पड़ रहा था. जिसके चलते इस सिस्टम के खिलाफ प्रदेश भर में मुर्गी पालन और अंडा कारोबार से जुड़े लोग बीते तीन साल से सरकार से यह मांग कर रहे थे कि दुकानों पर बिकने बाले हर हर अंडे पर एक्सपायरी डेट के साथ ही उस पर उसके उत्पादन की तारीख लिखा जाना अनिवार्य किया जाए.
ताकि तीन-चार माह से कोल्ड स्टोरेज में रखे हुए अंडे की बिक्री को रोका जा सके. अब सरकार ने मुर्गी पालकों की यह मांग मान ली है और इस फैसले के चलते अब राज्य के लोगों को ताजा अंडा खाने को मिलेंगे.
खराब और बासी अंडों की बिक्री पर रोक लगेगी
कुक्कुट विकास समिति के अध्यक्ष वीपी सिंह के अनुसार, अगर मुर्गी के अंडे को लगभग 30 डिग्री सेल्सियस के सामान्य तापमान पर रखा जाए, तो वह दिए जाने के दो हफ्तों के अंदर खाने के लिए सुरक्षित रहता है. इसके अलावा अगर अंडे को 2 से 8 डिग्री सेल्सियस पर रखा जाए, तो पांच हफ्तों तक उस अंडे को खाया जा सकता है.
राज्य में अंडे को खाने वाले अधिकांश उपभोक्ता भी इस बारे में अनजान थे. अब अंडे पर एक्सपायरी डेट लिखी होने का कारण बाजार में बिकने वाले खराब और बासी अंडों की बिक्री पर रोक लगेगी, जिन्हें खाने से लोगों की सेहत पर खराब असर पड़ता है. वीपी सिंह का यह भी कहना है कि खाद्य सुरक्षा नियमों के मुताबिक अंडों को सब्जियों के साथ कोल्ड स्टोरेज में नहीं रखा जा सकता,
क्योंकि उन्हें अलग-अलग तापमान की जरूरत होती है. यूपी में अंडों के लिए केवल दो कोल्ड स्टोरेज हैं, जिनमें पहला आगरा में और दूसरा झांसी में है. ऐसे में अब सरकार के ताजा फैसले के चलते कोल्ड स्टोरेज में कई माह तक अंडों को रख कर उन्हे बेचने की हिम्मत भी कोई नहीं करेगा. और सरकार के इस फैसले का पालन नहीं करने पर या तो बाजार में अंडों की खेप को नष्ट किया जाएगा या फिर अंडों पर 'इंसानों के खाने लायक नहीं' की मुहर लगा दी जाएगी.