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Sim Binding Rule 2026: WhatsApp चलाने वालों के लिए बड़ी खबर; जानें क्या है नया 'सिम बाइंडिंग' नियम, 1 मार्च हो गया लागू

By अंजली चौहान | Updated: March 1, 2026 07:17 IST

Rule Change  From March 1: देश के डिजिटल इकोसिस्टम को सुरक्षित बनाने की दिशा में दूरसंचार विभाग (DoT) का सबसे बड़ा कदम आज से जमीन पर उतर गया है। 1 मार्च से लागू हुए नए 'सिम बाइंडिंग' नियमों ने व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स के काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है।

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Rule Change  From March 1: भारत में करोड़ों व्हाट्सएप और टेलीग्राम यूजर्स के लिए 1 मार्च की सुबह एक बड़े बदलाव के साथ आई है। डिजिटल धोखाधड़ी और साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने आज से 'सिम बाइंडिंग' नियम को अनिवार्य कर दिया है। इस नए सुरक्षा कवच के तहत अब आपका मैसेजिंग ऐप केवल तभी काम करेगा, जब आपके फोन में वही सिम कार्ड मौजूद होगा जिससे अकाउंट बनाया गया है। आइए जानते हैं कि इस बदलाव का आपके रोजमर्रा के चैटिंग और 'व्हाट्सएप वेब' के इस्तेमाल पर क्या असर पड़ेगा।

डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन्स (DoT) ने टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी (TCS) रूल्स, 2024, जैसा कि बदला गया है, के तहत यह नियम पिछले साल ऑफिशियली बड़ी ऐप-बेस्ड कम्युनिकेशन सर्विस के लिए जारी किया था। इसके लिए ज़रूरी है कि ये ऐप अकाउंट रजिस्टर करने के लिए इस्तेमाल किए गए एक्टिव सब्सक्राइबर आइडेंटिटी मॉड्यूल (SIM) से लगातार जुड़े रहें।

नए फ्रेमवर्क के तहत, मैसेजिंग एप्लीकेशन तभी काम करेंगे जब डिवाइस में रजिस्टर्ड SIM कार्ड मौजूद और एक्टिव होगा। अगर SIM निकाल दिया जाता है, स्वैप कर दिया जाता है या डीएक्टिवेट कर दिया जाता है, तो ऐप्स को उस डिवाइस पर तब तक काम करना बंद कर देना चाहिए जब तक कि सही SIM दोबारा न डाला जाए और ऑथेंटिकेट न हो जाए। नियमों में यह भी कहा गया है कि WhatsApp Web और Telegram Web जैसे ऐप्स के वेब और डेस्कटॉप सेशन हर छह घंटे में अपने आप लॉग आउट हो जाएंगे, जिसके लिए नए ऑथेंटिकेशन की जरूरत होगी, जो अक्सर एक्टिव SIM वाले फ़ोन से QR कोड स्कैनिंग के जरिए होता है।

अधिकारियों का कहना है कि SIM-बाइंडिंग की ज़रूरत का मकसद मज़बूत पहचान वेरिफिकेशन और ट्रेसेबिलिटी पक्का करके SIM-स्वैप स्कैम और इंपर्सोनेशन अटैक सहित बढ़ते साइबर फ्रॉड को रोकना है। कम्युनिकेशन मिनिस्टर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने फिर से कन्फर्म किया है कि डेडलाइन नहीं बढ़ाई जाएगी और डिजिटल सिक्योरिटी के लिए इस उपाय की अहमियत पर ज़ोर दिया है।

मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को रिप्रेजेंट करने वाली इंडस्ट्री बॉडीज़ ने यूज़र्स के लिए संभावित असुविधा के बारे में चिंता जताई है, जिनमें वे लोग भी शामिल हैं जो कई डिवाइस इस्तेमाल करते हैं या अक्सर ट्रैवल करते हैं। हालांकि, सरकार का कहना है कि यूज़र्स की सुरक्षा और भारत के पूरे साइबर सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने के लिए ये नियम ज़रूरी हैं।

टॅग्स :व्हाट्सऐपटेलीकॉमTelecom Regulatory Authority of India
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