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सारदा चिटफण्ड: न्यायालय ने जांच में सहयोग नहीं करने के आरोपों पर वोडाफोन, एयरटेल से मांगा जवाब

By भाषा | Updated: March 29, 2019 15:19 IST

जांच ब्यूरो ने पश्चिम बंगाल पुलिस पर अधूरी जानकारी उपलब्ध कराने और विवरण के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुये कहा था कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रही है।

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उच्चतम न्यायालय ने सारदा चिट फण्ड मामले में केन्द्रीय जांच ब्यूरो के आवेदन पर शुक्रवार को एयरटेल और वोडाफोन से जवाब मांगा।

जांच ब्यूरो ने इन दोनों सेवा प्रदाताओं पर सारदा चिट फण्ड मामले की जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ के समक्ष मोबाइल सेवा प्रदाताओं ने इन आरोपों से इंकार किया।

इस पर पीठ ने सीबीआई की अर्जी को आठ अप्रैल को सुनवाई के लिये सूचीबद्ध कर दी। इससे पहले, जांच ब्यूरो की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पश्चिम बंगाल में पूरी तरह से अराजकता की स्थिति है और कानून व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि हाल ही में पुलिस ने कोलकाता के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर टीएमसी के एक नेता की पत्नी के सामान की जांच करने पर सीमा शुल्क विभाग के एक अधिकारी को गिरफ्तार करने का प्रयास किया था। मेहता ने कहा कि यह पूरी घटना सीसीटीवी में रिकार्ड है।

जांच एजेन्सी ने हाल ही में इस घोटाले के सिलसिले में तत्कालीन कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से की गयी पूछताछ से संबंधित प्रगति रिपोर्ट न्यायालय को सौंपी थी। शीर्ष अदालत ने 26 मार्च को राजीव कुमार से पूछताछ के बारे में जांच ब्यूरो की प्रगति रिपोर्ट में किये गये खुलासे को ‘‘बहुत ही गंभीर’’ बताते हुये कहा था कि यदि उसके सामने कुछ बहुत ही गंभीर तथ्य पेश किये जाते हैं तो वह इनके प्रति आंखें मूंदे नहीं रह सकता।

न्यायालय ने जांच एजेन्सी को राजीव कुमार के खिलाफ उचित राहत के लिये आवेदन दस दिन के भीतर आवेदन दाखिल करने का निर्देश दिया था। कुमार पहले इस चिट फण्ड घोटाले की जांच के लिये राज्य के विशेष जांच दल के मुखिया थे। शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक, मुख्य सचिव और कुमार के खिलाफ अवमानना कार्यवाही खत्म करने से इंकार कर दिया था।

इससे पहले, न्यायालय ने सीबीआई निदेशक को इस मामले में इन अधिकारियों द्वारा न्यायालय की कथित अवमानना के बारे में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था।

न्यायालय ने जांच ब्यूरो के मुखिया के जवाब और कुमार से हुयी पूछताछ से संबंधित रिपोर्ट का अवलोकन किया था।

जांच ब्यूरो ने पश्चिम बंगाल पुलिस पर अधूरी जानकारी उपलब्ध कराने और विवरण के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुये कहा था कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रही है।

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