लाइव न्यूज़ :

नये कृषि कानूनों से प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा, किसान अपनी उपज कंपनियों को बेच सकेंगे: सीईए

By भाषा | Updated: July 12, 2021 16:54 IST

Open in App

मुंबई, 12 जुलाई मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) के सुब्रमणियम ने सोमवार को कहा कि नये कृषि कानूनों से किसानों को अंतत: बेहतर लाभ मिलेगा और उनकी कमाई बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि इसका कारण इन अधिनियमों के तहत किसानों को अपनी उपज किसी को भी बेचने की आजादी दी गयी है। किसान अपनी उपज रिलायंस और आईटीसी जैसी कंपनियों को अच्छी कीमत पर बेचने को स्वतंत्र है, इसके जरिये प्रतिस्पर्धी महौल सृजित किया गया है।

तीनों कृषि कानून को पिछले साल संसद ने पारित कर दिया। हालांकि किसानों के विरोध प्रदर्शन के बीच उच्चतम न्यायालय ने जनवरी 2021 में उसके क्रियान्वयन पर रोक लगा दी।

सुब्रमणियम ने कहा कि कृषि कानून छोटे एवं सीमांत किसानों की आय में सुधार की दिशा में कदम है।

कृषि कानून की आलोचना करने वाले इसके पारित होने के तरीके को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उनका आरोप है कि इन सुधारों से कृषि गतिविधियों के निगमीकरण होने से बड़ी कंपनियों को लाभ होगा।

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि फसलों को केवल कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) में बेचने से किसानों की कमाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसका कारण इसमें जो खरीदार हैं, वह बिचौलिये की भूमिका निभाते हैं और जल्दी खराब होने वाले जिंसों या माल को फिर से बाजार लाने को लेकर होने वाले खर्च जैसी वजहों से सौदे में उनकी स्थिति मजबूत होती है।

उन्होंने कहा, ‘‘कृषि कानून प्रतिस्पर्धा सृजित करता है। इसके तहत छोटे और सीमांत किसान मध्यस्थ के पास जा सकते हैं और कह सकते हैं कि यदि आप अच्छी कीमत नहीं देंगे, तो मैं इसे किसी और को बेच सकता हूं। यह और कोई आईटीसी, रिलायंस या फार्म फ्रेश जैसी कंपनियां हो सकती हैं।’’

नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक) के स्थापना कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुब्रमणियम ने कहा कि ये कंपनियां किसानों की उपज के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगी, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि कृषकों विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसान को उनकी उपज का पर्याप्त मूल्य मिले।

उन्होंने कहा कि पुराने कानून कृषि उपज मंडी समिति (एमपीएमसी) से किसानों को जिंस के (अंतिम) मूल्य का केवल 15 प्रतिशत ही मिलता है जबकि ज्यादातर लाभ बिचौलिये ले जाते हैं। यही कारण है कि पुराने कानून की जगह नये कानून को लाये गये हैं।

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि प्रतिस्पर्धा से हमेशा ग्राहकों और उत्पादकों को लाभ हुआ है। बैंक, म्यूचुअल फंड, दूरसंचार और हवाईअड्डा इसके उदाहरण हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर नेटवर्क होने के अलावा भंडारण जैसे बुनियादी ढांचे में निवेश करने की क्षमता के कारण अमीर किसानों को छोटे और सीमांत किसानों के समान परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि एपीएमसी कानून के अलावा कृषि कानूनों के जरिये आवश्यक वस्तु अधिनियम को भी समाप्त किया गया है। क्योंकि आवश्यक वस्तु अधिनियम कृषि जिंसों के वैध भंडारण और जमाखोरी के बीच अंतर नहीं करता है।

सीईए ने कहा, ‘‘छोटे एवं सीमांत किसान नुकसान में हैं और उनकी स्थिति आजादी के 75 साल से अधिक समय बाद भी नहीं सुधरी है।’’ उन्होंने दावा किया कि कृषि कानून के साथ कृषि बुनियादी ढांचा कोष उन किसानों की स्थिति सुधारने में मददगार होंगे।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Open in App

संबंधित खबरें

क्रिकेटCSK को बड़ा झटका! SRH के खिलाफ हैमस्ट्रिंग में खिंचाव के बाद आयुष म्हात्रे हो सकते हैं टुर्नामेंट से बाहर

क्रिकेटSRH vs CSK: आखिरी ओवर तक चला रोमांच, 10 रन से हार गई चेन्नई

क्रिकेटSRH vs CSK: सीएसके के खिलाफ एसआरएच की 10 विकेट से जीत, ईशान मलिंगा ने झटके 3 विकेट

भारतNashik TCS Case: मामले में आया नया मोड़, आरोपी निदा खान का प्रेग्नेंसी ट्रीटमेंट और मेडिकल लीव लेटर जांच के दायरे में

क्रिकेटCSK के खिलाफ अभिषेक शर्मा की 15 गेंदों में फिफ्टी पर SRH की मालकिन काव्या मारन का अनमोल रिएक्शन वायरल | VIDEO

कारोबार अधिक खबरें

कारोबारMeta layoffs: 20 मई को बड़े पैमाने पर छंटनी में 8,000 कर्मचारियों की नौकरी जाने की संभावना

कारोबारसरकार ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 2% महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी को मंज़ूरी दी

कारोबारGold Rate Today: 18 अप्रैल 2026 को दिल्ली, मुंबई समेत बड़े शहरों में सोने का भाव

कारोबार500 और 1000 के पुराने नोट बदलने के लिए RBI ने बताए नए नियम! जानें क्या है इस दावे का सच...

कारोबारPetrol, Diesel Price Today: क्रूड ऑयल के दामों में उछाल जारी, जानें भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर कितना हुआ असर