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कर्नाटक सरकार ने मैसूर शुगर्स को पट्टे पर देने का फैसला रोका

By भाषा | Updated: October 18, 2021 21:46 IST

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बेंगलुरू, 18 अक्टूबर कर्नाटक सरकार ने सोमवार को मांड्या स्थित मैसूर शुगर्स कंपनी लिमिटेड (माईसुगर) को अस्थायी रूप से पट्टे पर देने के अपने फैसले को वापस लेने का फैसला किया। सरकार, कंपनी के भविष्य के बारे में सिफारिश करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन करेगी।

प्रदेश सरकार ने साथ ही यह भी कहा कि फैक्ट्री अगले सत्र से गन्ने की पेराई शुरू करेगी।

मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने आज यहां मांड्या जिले के वरिष्ठ मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों और किसानों के प्रतिनिधियों के साथ लगभग तीन घंटे लंबी उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें माईसुगर को पट्टे पर देने के विरोध के बाद चर्चा की गई।

उन्होंने कहा, ‘‘मशीनरी की स्थिति और अन्य तकनीकी पहलुओं, कारखाने को फिर से शुरू करने के लिए आवश्यक वित्त और बैंक अधिकारियों के परामर्श से किसानों को गन्ने का भुगतान करने के लिए आवश्यक कार्यशील पूंजी का अध्ययन करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाएगा।’’

बैठक के बाद यहां संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा कि समिति परिवर्तित शीरे के मूल्यवर्धन से संबद्ध पहलुओं का भी अध्ययन करेगी और यह भी अध्ययन करेगी कि क्या शीरे का उपयोग डिस्टिलरी में किया जाएगा या कारखाने को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के उद्देश्य से एथेनॉल के लिए किया जाएगा।

बोम्मई ने कहा कि कारखाने की निगरानी के लिए औद्योगिक विशेषज्ञता वाले एक कुशल अधिकारी को प्रबंध निदेशक के रूप में नियुक्त किया जाएगा और महालेखा परीक्षक द्वारा अनुशंसित एक लेखाकार की नियुक्ति की जाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘विशेषज्ञ समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को अंतिम निर्णय लेने के लिए मंत्रिमंडल के सामने रखा जाएगा।’’

उन्होंने कहा कि पूर्व के मंत्रिमंडल ने कारखाने को पट्टे पर सौंपने का फैसला किया था। उन्होंने आगे कहा, ‘‘अगर इसे बदलना है , तो खुद मंत्रिमंडल को ही तय करना होगा, हम कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर फैसला लेंगे... तब तक के लिए (लीज पर) निजीकरण के पहले के फैसले को फिलहाल के लिए रोकने का फैसला किया गया है।’’

सरकारी स्वामित्व वाली चीनी फैक्ट्री, जिसे 1934 में स्थापित किया गया था, को पट्टे पर देने का कदम का किसानों सहित विभिन्न वर्गों ने विरोध किया है।

विपक्षी दलों जद (एस) और कांग्रेस ने भी इस कदम का विरोध किया है।

हाल ही में मुख्यमंत्री ने किसानों से मुलाकात की और सौहार्दपूर्ण समाधान का आश्वासन दिया।

बोम्मई ने कहा कि सरकार अगले सत्र से गन्ने की पेराई फिर से शुरू करने के अपने फैसले पर अडिग है। उन्होंने कहा कि वह इसके लिए आवश्यक मशीनरी को उन्नत करने या बदलाव करने के लिए आवश्यक धनराशि तुरंत जारी करेंगे।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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