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ईरान-इजरायल वारः 500 करोड़ रुपए का माल, फिरोजाबाद कांच उद्योग संकट में फंसा, आटा-मैदा पर लग रहा झटका?

By राजेंद्र कुमार | Updated: March 14, 2026 18:28 IST

Iran-Israel War: युद्ध लंबा खिचा तो फिरोजाबाद में हजारों लोगों के रोजगार पर संकट खड़ा हो जाएगा, जैसा कुछ साल पहले कोरोना के समय हुआ था.

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ठळक मुद्देगैस की कमी के कारण कांच उद्योग की रफ्तार थमने का भी डर सता रहा है.उत्पादन लागत बढ़ रही है, कई इकाइयों में काम धीमा पड़ गया है.सुहाग नगरी की चूड़ियों और कांच के सामान का उत्पादन प्रभावित होगा.

लखनऊः ईरान- इजरायल युद्ध के चलते पूरी दुनिया में तनाव है. एलपीजी गैस और तेल की सप्लाई बाधित हो रही है. इसका असर आम लोगों पर भी पड़ना शुरू हुआ है. यूपी के अयोध्या में राम रसोई प्रभावित हुई है. तो सुहाग नगरी फिरोजाबाद के विश्व प्रसिद्ध कांच उद्योग गहरे संकट में फंस गया है. युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट में बिगड़े हालात और समुद्री मार्गों के प्रभावित होने की वजह से कांच और चूड़ियों का निर्यात लगभग ठप हो गया है. फिरोजाबाद के कारोबारियों के अनुसार, करीब 500 करोड़ रुपए का माल विदेशों में फंसा हुआ है और यहां गैस की कमी के कारण कांच उद्योग की रफ्तार थमने का भी डर सता रहा है. युद्ध लंबा खिचा तो फिरोजाबाद में हजारों लोगों के रोजगार पर संकट खड़ा हो जाएगा, जैसा कुछ साल पहले कोरोना के समय हुआ था.

इसलिए बढ़ी मुश्किलें, सरकार करे समाधान

यूपी का फिरोजाबाद शहर का कांच उद्योग अपनी बारीक कारीगरी और डिज़ाइन के लिए दुनिया भर में विख्यात है. यहां से बने कांच सामान और चूड़ियां  150 देशों में निर्यात की जाती हैं. लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण यहां विदेश से मिले हुए आर्डर भेजे नहीं जा पा रहे. गैस की उपलब्धता में होने वाली कटौती कांच की भट्टियों को चलाने में संकट खड़ा कर सकती हैं.

फिरोजाबाद में कांच उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि वह गहरे संकट में फंसते जा रहे हैं. एक तो जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से माल की समय पर डिलीवरी नहीं हो पा रही है, जिससे निर्यातकों का करोड़ों रुपए का भुगतान अटक गया है. दूसरा कांच उद्योग पहले से ही उच्च लागत और गैस की बढ़ती कीमतों से जूझ रहा था.

ऐसे समय में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में करीब 3 लाख घनमीटर की कटौती कर दी गई है. इस कारण उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है. छोटे और मध्यम इकाइयों पर इसका सबसे बड़ा असर पड़ रहा है. चूड़ी के कारखानों में कार्यरत लाखों कारीगरों और मजदूरों का रोजगार प्रभावित हो रहा है. लोगों का कहना है कि निर्यात रुका है, और उत्पादन लागत बढ़ रही है, कई इकाइयों में काम धीमा पड़ गया है.

अब अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे, तो यहां कारीगरों की रोजी-रोटी पर भी गंभीर असर पड़ेगा. कांच उद्योग से जुड़े व्यापारियों और निर्यातकों का कहना है कि सरकार को इस संकट को गंभीरता से लेते हुए गैस की कीमतों में राहत और निर्यात सुचारू बनाने के लिए ठोस कदम उठाए. अगर समाधान जल्द नहीं हुआ तो सुहाग नगरी की चूड़ियों और कांच के सामान का उत्पादन प्रभावित होगा.

यूपी में गेहूं और उससे बने उत्पादों का निर्यात भी प्रभावित

ईरान- इजरायल युद्ध का प्रभाव यूपी के गेहूं और उससे बने उत्पादों के निर्यात पर भी पड़ा है. यूपी को भारत सरकार ने इस साल सीमित मात्रा में गेहूं और गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी थी. केंद्र सरकार की इस अनुमति के चलते इस माह (मार्च) 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादों का निर्यात किया जाना था.

लेकिन अब समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिम, बीमा लागत और शिपिंग संकट के कारण खाड़ी  देशों को होने वाला निर्यात फिर से अनिश्चितता में घिर गया है. इसका सीधा असर प्रदेश के गेहूं व्यापार और मैदा उद्योग पर पड़ा है. निर्यातक संगठनों के मुताबिक खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने और युद्ध जोखिम बीमा के महंगे होने से कई नए निर्यात सौदे फिलहाल टाल दिए गए हैं. इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के महासचिव और यूपी रोलर मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक बजाज के अनुसार, ईरान- इजरायल युद्ध यूपी के आटा-मैदा उद्योग के लिए बड़ा झटका साबित हो रहा है. 

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