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स्टार्टअप के मामले में भारत तीसरे स्थान पर, 2019 में बने एक हजार से ज्यादा नए स्टार्टअप

By भाषा | Updated: November 5, 2019 23:00 IST

नेशनल एसोसिएशन ऑफ साफ्टवेयर एंड सर्विसेज कंपनीज (नॉसकॉम) ने कहा कि घरेलू स्टार्टअप परिवेश 2025 तक इसमें 10 गुना वृद्धि के लिये तैयार है।

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ठळक मुद्देभारत अनुकूल स्टार्टअप माहौल के मामले में तीसरा सबसे बड़ा देश बना हुआ है।देश में 2019 में 1,100 स्टार्टअप जुड़े और इसके साथ प्रौद्योगिकी स्टार्टअप की कुल संख्या पिछले पांच साल में बढ़कर 8,900 से 9,300 पहुंच गयी।

भारत अनुकूल स्टार्टअप माहौल के मामले में तीसरा सबसे बड़ा देश बना हुआ है। देश में 2019 में 1,100 स्टार्टअप जुड़े और इसके साथ प्रौद्योगिकी स्टार्टअप की कुल संख्या पिछले पांच साल में बढ़कर 8,900 से 9,300 पहुंच गयी। सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के संगठन नॉसकॉम ने मंगलवार को यह कहा। नॉसकॉम ने यह भी कहा कि घरेलू स्टार्टअप परिवेश 2025 तक इसमें 10 गुना वृद्धि के लिये तैयार है।

नेशनल एसोसिएशन ऑफ साफ्टवेयर एंड सर्विसेज कंपनीज (नॉसकॉम) की अध्यक्ष देबजानी घोष ने कहा, ‘‘हम 2014 से 2025 के दौरान भारती स्टार्टअप में 10 गुनी वृद्धि देखेंगे जो उल्लेखनीय है।’’ उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि नॉसकॉम को स्टार्टअप का मूल्य 2025 तक बढ़कर 350 से 390 अरब डॉलर पहुंच जाने का अनुमान है जो 2014 में करीब 10-20 अरब डॉलर था।

घोष ने कहा कि इस क्षेत्र में कुल रोजगार 2025 तक लाखों की संख्या में पहुंच जाने का अनुमान है वहीं परोक्ष रूप से 40 लाख लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। नॉसकॉम ने नॉसकॉम प्रोडक्ट कनक्लेव 2019 के 16वें सस्करण में मंगलवार को ‘इंडियन टेक स्टार्ट-अप इकोसिस्टम’ शीर्षक से अपनी रिपोर्ट पेश की।

रिपोर्ट का ब्योरा जारी करते हुए घोष ने कहा कि अगर हम सभी मानदंडों को देखें, भारतीय प्रौद्योगिकी स्टार्टअप परिवेश में मजबूत वृद्धि दिखती है। नॉसकॉम के अधिकारियों के अनुसार प्रौद्योगिकी स्टार्टअप के मामले में बेंगलुरू अव्वल बना हुआ है। उसके बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का स्थान है।

कुल स्टार्टअप में 12-15 प्रतिशत उभरते शहरों से आ रहे हैं जो महत्वपूर्ण चीज है। रिपोर्ट के हवाले से घोष ने कहा कि प्रौद्योगिकी स्टार्टअप की संख्या पिछले साल 7,700 से 8,200 थी। इसी साल 1,100 नये स्टार्टअप आयें। इस प्रकार, कुल स्टार्टअप की संख्या 8,900 से 9,300 के दायरे में रही। उन्होंने कहा, ‘‘इस साल वित्त पोषण 4.4 अरब डॉलर रहा। पिछले साल यह 4.2 अरब डॉलर था।’’

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