विदेशों में तेजी के रुख से घरेलू बाजार में तेल-तिलहन कीमतों में सुधार

By भाषा | Updated: October 5, 2021 19:40 IST2021-10-05T19:40:37+5:302021-10-05T19:40:37+5:30

Improvement in oil-oilseeds prices in the domestic market due to the fast trend abroad | विदेशों में तेजी के रुख से घरेलू बाजार में तेल-तिलहन कीमतों में सुधार

विदेशों में तेजी के रुख से घरेलू बाजार में तेल-तिलहन कीमतों में सुधार

नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर विदेशी बाजारों में तेजी के रुख के बीच स्थानीय त्योहारी मांग से दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में मंगलवार को सरसों, मूंगफली और सोयाबीन सहित विभिन्न तेल-तिलहनों के भाव सुधार दर्शाते बंद हुए। मलेशिया एक्सचेंज में मजबूती का रुख होने के कारण सीपीओ और पामोलीन तेल की कीमतों में भी सुधार आया। बाकी तेल-तिलहनों के भाव पूर्वस्तर पर ही बने रहे।

मलेशिया एक्सचेंज में 3.5 प्रतिशत की मजबूती थी जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में फिलहाल 2.2 प्रतिशत का सुधार है। इस तेजी का सीधा असर स्थानीय तेल-तिलहन कीमतों पर भी दिखाई दिया।

सूत्रों ने कहा कि ‘श्राद्ध’ खत्म होने के बाद ‘नवरात्र’ के दिनों में मांग फिर से बढ़ सकती है। इसके अलावा सामान्य तौर पर जाड़े में भी खाद्य तेलों विशेषकर सरसों तेल की मांग बढ़ती है।

सूत्रों ने बताया कि बिनौला का भाव एक बार फिर मूंगफली के करीब पहुंचने से उपभोक्ताओं में मूंगफली की मांग बढ़ी है। रिफाइंड करने के खर्च सहित बिनौला का भाव 14,100 रुपये क्विंटल बैठता है जबकि मूंगफली (जो सीधे उपयोग में लाया जाता है) का भाव 14,500 रुपये क्विंटल के आसपास है। ऐसी स्थिति में उपभोक्ता मूंगफली को अधिक तरजीह दे रहे हैं। इस वजह से मूंगफली तेल-तिलहन कीमतों में सुधार है।

उन्होंने कहा कि किसानों द्वारा नीचे भाव में बिकवाली से बचने और विदेशों में तेजी के कारण सोयाबीन तेल-तिलहन कीमतों में सुधार रहा।

मलेशिया एक्सचेंज में तेजी होने की वजह से सीपीओ और पामोलीन तेल के भाव भी सुधार प्रदर्शित करते बंद हुए।

कोटा और नीमच के आढ़तिया और सरसों विशेषज्ञ, राधेश्याम का मानना है कि मध्य प्रदेश और नीमच जैसे सरसों उत्पादक जगहों में सरसों की बुवाई आमतौर तक मौजूदा समय से होने लगती थी लेकिन मिट्टी में नमी के कारण बुवाई में देर हो रही है और जो सरसों की फसल आमतौर पर 10-15 फरवरी तक आ जाती थी, वह इस बार 20-22 दिन से देर से यानी मार्च पहले सप्ताह तक बाजार में आने की उम्मीद है।

तेल विशेषज्ञों का मानना है कि सरसों की अगली फसल आने में कम से कम पांच महीने की देर है और लगभग 18.5 लाख टन का स्टॉक बचा है। इस बीच त्योहारों और जाड़े की मांग बढ़ेगी और सरकारी खरीद एजेसियों के पास सरसों का कोई स्टॉक भी नहीं है। इस स्थिति की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए आगे से सरकार को सरसों का स्टॉक स्थायी तौर पर बना कर रखने के बारे में विचार करना चाहिये क्योंकि सरसों की फसल कम से कम 4-5 साल तक खराब नहीं होती है।

सूत्रों कहा कि सरसों का कोई विकल्प नहीं है। इसकी अगली बिजाई अक्टूबर-नवंबर में होगी और इस बार पैदावार दोगुने से भी काफी अधिक होने की संभावना है।

बाजार में थोक भाव इस प्रकार रहे- (भाव- रुपये प्रति क्विंटल)

सरसों तिलहन - 8,785 - 8,810 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये।

मूंगफली - 6,300 - 6,445 रुपये।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात)- 14,500 रुपये।

मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 2,165 - 2,295 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 17,700 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,685 -2,735 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,770 - 2,880 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 15,500 - 18,000 रुपये।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 14,430 रुपये।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 14,050 रुपये।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 13,000

सीपीओ एक्स-कांडला- 11,660 रुपये।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 13,600 रुपये।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 13,250 रुपये।

पामोलिन एक्स- कांडला- 12,150 (बिना जीएसटी के)।

सोयाबीन दाना 5,500 - 5,700, सोयाबीन लूज 5,200 - 5,400 रुपये।

मक्का खल (सरिस्का) 3,800 रुपये।

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Web Title: Improvement in oil-oilseeds prices in the domestic market due to the fast trend abroad

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