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रिफाइनरी, उर्वरक संयंत्रों के लिये हरित हाइड्रोजन खरीद बाध्यता प्रस्ताव मंत्रिमंडल को भेजा: सिंह

By भाषा | Updated: September 8, 2021 21:37 IST

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नयी दिल्ली, आठ सितंबर बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने बुधवार को कहा कि रिफाइनरी और उर्वरक संयंत्रों के लिये हरित हाइड्रोजन खरीद लक्ष्य तय करने का प्रस्ताव मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल को भेजा गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार हरित हाइड्रोजन को बढ़ावा देने के लिये भारी वाहनों के स्वच्छ ईंधन उपयोग को लेकर उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना तथा परियोजना को व्यवहारिक बनाने के लिये वित्त पोषण पर भी विचार कर रही है।

सिंह ने कहा, ‘‘हमने एक कैबिनेट नोट (प्रस्ताव) तैयार किया है और हरित हाइड्रोजन के निश्चित उपयोग की बाध्यता को लेकर मंजूरी के लिये मंत्रिमंडल को भेज दिया है। इसके लिये कुल 8,800 मेगावाट ‘इलेक्ट्रोलाइजर’ क्षमता की जरूरत होगी।’’

इलेक्ट्रोलाइजर एक उपकरण है जिसका उपयोग इलेक्ट्रोलाइसिस में होता है। इलेक्ट्रोलाइसिस हाइड्रोजन उत्पादन की प्रक्रिया है।

वैश्विक हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था के निर्माण को लेकर बहुपक्षीय रुख पर सीईईडब्ल्यू (काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर) के ‘ऑनलाइन’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार रिफाइनरी और उर्वरक संयंत्रों के लिये हरित हाइड्रोजन की खरीद बाध्यता पर विचार कर रही है। शुरू में यह 10 प्रतिशत हो सकता है, जिसे बढ़ाकर 20 से 25 प्रतिशत किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि समय के साथ मात्रा बढ़ेगी और कीमत कम होगी। ऐसे में फिर बाध्यता की जरूरत नहीं पड़ेगी।

सिंह ने कहा, ‘‘हम भारी वाहनों में हरित हाइड्रोजन के उपयोग के लिये परियोजना को व्यवहारिक बनाने को लेकर वित्त पोषण (वीजीएफ) का भी प्रस्ताव कर रहे हैं। साथ ही इस्पात जैसे क्षेत्रों के लिये हाइड्रोजन खरीद बाध्यता पर नजर है।’’

उन्होंने कहा कि ऊर्जा बदलाव के क्षेत्र में भारत दुनिया में अगुवा है और उसका इरादा इस पर लगातार पथ प्रदर्शक के रूप में काम करने का है।

मंत्री ने कहा कि भारत ने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) के तहत 2030 तक कुल बिजली उत्पादन में गैर-जीवाश्म ईंधन की हिस्सेदारी बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने का लक्ष्य है। वास्तव में, मौजूदा दर पर भारत 2030 तक गैस-जीवाश्म ईंधन के मामले में लगभग 50 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने में सक्षम हो सकता है।

उल्लेखनीय है कि भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता एक लाख मेगावाट को पार कर गयी है।

उन्होंने कहा कि यह 2030 तक 4,50,000 मेगावट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

सिंह ने कहा, ‘‘हम इलेक्ट्रोलाइजर क्षमता स्थापित करने को लेकर पीएलआई योजना लाने पर भी विचार कर रहे हैं। हमें 15,000 मेगावाट इलेक्ट्रोलाइजर क्षमता की जरूरत है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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