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कर्नाटक को इफ्को की 'नैनो यूरिया' की खेप रवाना की गौड़ा ने; बेंगलुरू में संयंत्र के लिए जमीन का वादा

By भाषा | Updated: June 12, 2021 22:13 IST

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नयी दिल्ली, 12 जून केंद्रीय उर्वरक मंत्री डी वी सदानंद गौड़ा ने शनिवार को कर्नाटक के लिए इफ्को द्वारा तैयार अभिनव 'नैनो यूरिया' की एक खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने नैनो यूरिया का नया कारखाना लगाने के लिए बेंगलुरु में जमीन दिलाने का वादा भी किया।

भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफ्को) ने 31 मई को, दुनिया में पहला तरल यूरिया पेश किया जिसकी आधी लीटर मात्रा एक एकड़ क्षेत्र में दो छिड़काव के लिए पर्याप्त है। इसे 'नैनो यूरिया' के नाम से पेश किया गया है। तरल यूनिया का वाणिज्यिक उत्पादन इसी माह शुरू हुआ है।

इफ्को ने सबसे पहले नैनो यूरिया को उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर भेजा था।

इफ्को के अनुसार, नैनो यूरिया से न केवल मिट्टी के स्वास्थ्य और फसल की उपज में सुधार होगा बल्कि रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में भी कमी आएगी।

उर्वरक की खेप को रवाना करने के बाद गौड़ा के हवाले से एक सरकारी बयान में कहा गया, ‘‘यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है जहां इफ्को प्रधानमंत्री के आत्मानिर्भर भारत और आत्मानिर्भर कृषि के सपने को साकार करने की दिशा में काम कर रहा है। हम आपको बेंगलुरु में हवाई अड्डे के पास एक जगह देंगे जहां से इफ्को कर्नाटक से नैनो यूरिया का उत्पादन कर सकता है।’’

इफ्को ने मंत्री से कर्नाटक में संयंत्र के लिए जमीन देने का अनुरोध किया था जहां से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) का उत्पादन दक्षिणी भारत के लिए किया जा सके।

इफ्को के प्रबंध निदेशक यू एस अवस्थी ने कहा कि गुजरात में कलोल संयंत्र प्रति दिन 15,000 बोतल नैनो यूरिया के साथ एक ट्रक भेज रहा है और जल्द ही संयंत्र हर दिन 10 ट्रक भेजेगा।

उन्होंने आगे कहा कि कलोल संयंत्र प्रतिदिन 6,750 टन यूरिया के बराबर उत्पादन कर रहा है, जिससे सरकार के सब्सिडी बोझ के 35,000 करोड़ रुपये की बचत होगी और किसानों को अतिरिक्त 35,000 करोड़ रुपये कमाई करने में मदद मिलेगी।

अवस्थी ने कहा कि संयंत्र ने जून से शुरू हो रहे खरीफ फसल के मौसम से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का परीक्षण शुरू कर दिया है और इफ्को को सफलता की बहुत उम्मीद है। इसके बाद, संयंत्र नैनो यूरिया और नैनो डीएपी दोनों का उत्पादन करेगा।

कार्यक्रम के दौरान कर्नाटक के कृषि आयुक्त बृजेश कुमार दीक्षित, इफ्को के अध्यक्ष बी एस नकाई और उपाध्यक्ष दिलीप संघानी मौजूद थे।

इफ्को ने कहा कि वह पहले चरण में वर्ष 2021-22 तक गुजरात में कलोल इकाई और उत्तर प्रदेश के आंवला और फूलपुर में संयंत्रों में तरल यूरिया बनाएगी। शुरू में सालना 500 मिलीलीटर की 14 करोड़ बोतल तरल यूरिया बनाने की योजरना है। बाद में इसे 18 करोड़ तक कर दिया जाएगा।

दूसरे चरण में, वर्ष 2022-23 तक चार और संयंत्र चालू किए जाएंगे।

गैर-सब्सिडी वाली ये बोतलें किसानों को 45 किलो की एक बोरी यूरिया की कीमत से 10 प्रतिशत कम पर बेची जाएंगी।

किसान आसानी से नैनो यूरिया का उपयोग कर सकते हैं। नैनो यूरिया की 500 मिलीलीटर की एक बोतल एक एकड़ खेत में दो बार छिड़काव के लिए पर्याप्त है। इसमें कहा गया है कि अब किसान 45 किलो यूरिया के बैग को कंधे पर ले जाने के बजाय इफको नैनो यूरिया की 500 मिलीलीटर की बोतल आसानी से खेतों में ले जा सकते हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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