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बीते 4 सालों में GDP दर सबसे निचले स्तर पर, अर्थव्यवस्‍था फिसली

By IANS | Updated: January 6, 2018 08:09 IST

वित्त वर्ष 2017-18 के राष्ट्रीय आय अनुमान के मुताबिक, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 129.85 लाख करोड़ रुपये रहेगी।

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जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) और विनिर्माण में मंदी के कारण वित्त वर्ष 2017-18 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर घटकर 6.5 फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान यह 7.1 फीसदी थी। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा शुक्रवार को जारी वित्त वर्ष 2017-18 के राष्ट्रीय आय अनुमान के मुताबिक, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 129.85 लाख करोड़ रुपये रहेगी। 

मुख्य सांख्यिकीविद टी.सी.ए. अनंत के मुताबिक, जीएसटी के असर से व्यापारियों ने अपने स्टॉक खाली करने शुरू कर दिए, जिससे पूरे साल का जीडीपी अनुमान प्रभावित हुआ है।

सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2017-18 के राष्ट्रीय आय अनुमान में कहा है, "जीडीपी की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान 6.5 फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि 2016-17 में यह 7.1 फीसदी रही थी।"

इससे पहले चालू वित्त वर्ष की 30 सितंबर को समाप्त तिमाही में देश की जीडीपी दर 6.3 फीसदी रही और पहली तिमाही में 5.7 फीसदी रही थी। 

आंकड़ों के मुताबिक, सकल मूल्य वर्धित(जीवीए) वित्त वर्ष 2016-17 में 111.85 लाख करोड़ रुपये थी, जो वित्त वर्ष 2017-18 में 118.71 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। 

बयान में कहा गया है, "2016-17 में जीवीए की वृद्धि दर 6.6 फीसदी थी, जो 2017-18 में 6.1 फीसदी रहने का अनुमान है।"

आंकड़ों में बताया गया है कि 'सार्वजनिक प्रशासन, रक्षा और अन्य सेवाएं', 'व्यापार, होटल, परिवहन, संचार और प्रसारण सेवाएं', 'बिजली, गैस, जलापूर्ति और अन्य उपभोक्ता सेवाएं' और 'वित्तीय, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवाओं' की वृद्धि सात फीसदी से ऊपर रहेगी। 

वहीं, दूसरी तरफ 'कृषि, वानिकी और मत्स्यपालन', 'खनन और उत्खनन', 'विनिर्माण' और 'निर्माण' क्षेत्रों की वृद्धि दर क्रमश: 2.1 फीसदी, 2.9 फीसदी, 4.6 फीसदी और 3.6 फीसदी रहने का अनुमान है। 

 

शानदार रहेगी 2018-19 में देश की विकास दर : नीति आयोग

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने शुक्रवार को दावा किया कि वर्ष 2018-19 में देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर शानदार रहेगी। उधर, आधिकारिक आंकड़े बता रहे हैं कि पिछले साल के मुकाबले इस साल देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी रहेगी। कुमार का यह बयान मुख्य सांख्यिकीविद टी. सी. ए. अनंत की ओर से आर्थिक आंकड़ों की घोषणा करने के बाद आया। 

अनंत ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार 2017-18 में धीमी रहेगी और विकास दर पिछले साल 2016-17 में दर्ज की गई 7.1 फीसदी के मुकाबले इस साल 6.5 फीसदी रहेगी। 

विकास दर अनुमान पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कुमार ने कहा कि 2017-18 की दूसरी छमाही में जीडीपी वृद्धि दर में सात फीसदी तक इजाफा हुआ था जिसके चलते सालाना विकास दर 6.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। 

नीति आयोग की ओर से जारी बयान के मुताबिक, कुमार ने इस बात का जिक्र किया है कि पिछली तीन तिमाही से आर्थिक गतिविधि जोर पकड़ी है और आगामी अवधि में और मजबूती आ सकती है क्योंकि मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर इंडेक्स (पीएमआई)अभी पांच साल के ऊंचे स्तर 54 फीसदी पर है और एफएमसीजी क्षेत्र में मांग तेजी से बढ़ रही है। इस प्रकार 2018-19 में जीडीपी विकास दर ज्यादा मजबूत हो जाएगी। 

उन्होंने कहा कि आकलन में इस तथ्य को स्वीकार किया गया है कि सार्वजनिक क्षेत्र का खर्च, जोकि वर्ष 2016-17 में चरम पर था, प्रतिकूल होने के बावजूद दूसरी छमाही में उच्च विकास दर दर्ज की गई।

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