New Income Tax Rules from April 1: 1 अप्रैल 2026 से भारत की कर प्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित 'आयकर अधिनियम 2025' अब पुराने 1961 के कानून की जगह लेने के लिए तैयार है। यह नया कानून न केवल कर की दरों को तर्कसंगत बनाता है, बल्कि फाइलिंग और अनुपालन की जटिल प्रक्रियाओं को भी सरल करने के उद्देश्य से लाया गया है।
आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आयकर नियमों में होने वाले प्रमुख बदलावों की भूमिका निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर तैयार की जा सकती है:
1. नए आयकर अधिनियम 2025 का आगमन
देश में छह दशक से अधिक पुराने 'आयकर अधिनियम 1961' को हटाकर अब 'आयकर अधिनियम 2025' लागू किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य कानून की भाषा को सरल बनाना, मुकदमेबाजी को कम करना और करदाताओं के लिए डिजिटल अनुपालन को अधिक सुगम बनाना है।
2. आयकर स्लैब और नई कर व्यवस्था
नई कर व्यवस्था को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए सरकार ने छूट की सीमा में विस्तार किया है:
- ₹12 लाख तक शून्य टैक्स: धारा 87A के तहत रिबेट को बढ़ाकर ₹60,000 कर दिया गया है, जिससे ₹12 लाख तक की कर योग्य आय पर अब कोई टैक्स नहीं देना होगा।
- मानक कटौती: वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए मानक कटौती ₹75,000 पर बरकरार है, जिससे प्रभावी टैक्स-फ्री आय का दायरा और बढ़ जाता है।
3. फॉर्म और फाइलिंग प्रक्रिया का सरलीकरण
अनुपालन को आसान बनाने के लिए सरकार आयकर फॉर्म्स का पुनर्गठन कर रही है:
फॉर्म्स की नई नंबरिंग: आईटीआर और टीडीएस से जुड़े पुराने फॉर्म्स के नंबर बदले जा रहे हैं (जैसे फॉर्म 16 अब फॉर्म 130 के रूप में जाना जा सकता है)।
स्टैगर्ड फाइलिंग: भीड़ को कम करने के लिए अलग-अलग श्रेणियों के करदाताओं के लिए रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा को चरणों में बांटा जा सकता है।
4. निवेश और संपत्तियों से जुड़े नियम
संपत्ति लेनदेन और PAN: अचल संपत्ति के लेनदेन में PAN अनिवार्य करने की सीमा को ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख करने का प्रस्ताव है।
TCS दरों में बदलाव: विदेशी दौरों और एलआरएस के तहत शिक्षा व चिकित्सा खर्चों पर टीसीएस की दरों को सरल कर 2% के स्तर पर लाने का प्रावधान है।
SGB पर टैक्स: सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के रिडेम्प्शन पर मिलने वाले कैपिटल गेन्स अब टैक्स के दायरे में आ सकते हैं।
5. पेनल्टी और अपडेटेड रिटर्न
एकमुश्त प्रकटीकरण योजना : छात्रों, युवा पेशेवरों और एनआरआई के लिए विदेशी संपत्तियों के खुलासे हेतु एक विशेष 6 महीने की खिड़की दी जा रही है।
जुर्माने का युक्तिकरण: पुराने विवादों को सुलझाने और दंड की प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए नए प्रावधान जोड़े गए हैं।
1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले ये बदलाव स्पष्ट रूप से कर अनुपालन में आसानी की ओर एक बड़ा कदम हैं। जहाँ एक तरफ मध्यम वर्ग को टैक्स स्लैब में राहत दी गई है, वहीं दूसरी ओर डिजिटल रिपोर्टिंग और फॉर्म्स के सरलीकरण से करदाताओं के लिए नियमों का पालन करना पहले से अधिक आसान हो जाएगा।