खबर है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प व्हाइट हाउस के नीचे नया बंकर बनवा रहे हैं जो जल्दी ही तैयार हो जाएगा. यह विशाल बंकर द्वितीय विश्वयुद्ध के समय बने पुराने बंकर की जगह लेगा. इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए! आपत्ति है भी नहीं! बस सवाल यह है कि यदि परमाणु बम गिर जाए तो जो लोग बंकर के बाहर रहेंगे यानी सामान्य लोगों का क्या होगा? इस सवाल का जवाब अमेरिका की ही पुरानी खौफनाक करतूतों ने 1945 में ही दे दिया था. अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा में लिटिल बॉय नाम का परमाणु बम गिराया और पलक झपकते ही 80 हजार से ज्यादा लोग खत्म हो गए.
करीब इतने ही और लोगों की मौत एक साल के भीतर हो गई. नागासाकी पर गिरे परमाणु बम के कारण भी करीब सत्तर से अस्सी हजार लोगों की मौत हुई थी. ये आंकड़े तो उन बमों के हैं जो प्रारंभिक अवस्था के थे. आज एक से एक शक्तिशाली परमाणु बम से लेकर हाइड्रोजन बम तक मौजूद हैं.
ट्रम्प शायद परमाणु बमों की विभीषिका को समझते हैं इसीलिए 1945 में पर्ल हार्बर हमले के बाद बने बंकर को हटाकर नए और ज्यादा मजबूत बंकर की जरूरत उन्होंने समझी. इस पर करीब 400 मिलियन डॉलर खर्च किया जा रहा है. खबर है कि इसमें करीब एक हजार लोग सुरक्षित रह पाएंगे. यानी देश को संचालित करने वाले महत्वपूर्ण लोगों को बचा लिया जाएगा.
ट्रम्प को चूंकि बोलने की आदत है, इसलिए वे बोल गए अन्यथा इस तरह के बंकर की व्यवस्था बाकी के बड़े और शक्तिशाली देशों में भी होगी ही! मगर सवाल यह है कि जब सब परमाणु बम की विभीषिका को समझ रहे हैं तो फिर ऐसी स्थिति पैदा ही क्यों की जाती है कि परमाणु जंग की आशंका पैदा हो जाए! क्या हमारी मानसिकता कबीलाई दौर में जा रही है जहां जान की कोई कीमत ही नहीं हुआ करती थी?
आज दुनिया में जितने परमाणु बम हैं वो इस धरती के सभी जीव-जंतुओं को एक बार नहीं कई बार मारने के लिए पर्याप्त हैं. इसके बावजूद यदि कोई देश परमाणु बम बनाने की कोशिश करता है तो उसका मकसद संभवत: यही रहता है कि हमें कोई खत्म न कर पाए! अमेरिका ने 1945 में जापान पर परमाणु बम गिरा दिया और जापान ने पलटवार इसलिए नहीं किया, क्योंकि उसके पास परमाणु बम था ही नहीं. यदि होता तो क्या वह भी अमेरिका के किसी हिस्से पर परमाणु बम गिराने की कोशिश नहीं करता? जरूर करता!
आज घोषित तौर पर अमेरिका के अलावा आठ अन्य देशों- रूस, चीन, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, पाकिस्तान, भारत, इजराइल और उत्तर कोरिया के पास परमाणु बम है. यदि हम संख्या की बात करें तो अस्सी प्रतिशत जखीरा अकेले दो देशों रूस और अमेरिका के पास है. इनमें से एक ने भी यदि परमाणु जंग की शुरुआत की तो क्या दुनिया बच पाएगी?
आप कितने बंकर बना लेंगे और कितनों की जान बचा लेंगे. राष्ट्रपति और उनके परिवार के साथ एक हजार लोग बच भी गए तो देश का क्या होगा? इसलिए इस वक्त जरूरी यह है कि ट्रम्प बंकर बनवाने की बजाय इस बात पर ध्यान दें कि जंग रुकेगी कैसे? हालात सामान्य होंगे कैसे? बंकर बनाने से जंग नहीं रुकती है. तनाव रूपी बमों को डिफ्यूज करने से जंग रुकती है.