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कौन कहता है कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता!

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: April 3, 2026 08:20 IST

हकीकत यही है कि लोहे के चने चबाने के बावजूद ट्रम्प तमाम दूसरे देशों को परेशानी में डाले हुए हैं!

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एक बहुत पुरानी कहावत है कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता. यदि हम विश्लेषण करें तो इस कहावत की उत्पत्ति चने को भूनने की प्रक्रिया से हुई होगी. चने को गर्म रेत में भूना जाता है तो वह फूटता है और भाड़ की अंदरूनी सतह से टकराता है. हालांकि बहुत सारे चने भी भाड़ को अमूमन नहीं फोड़ पाते हैं लेकिन कहावत बन गई कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता. अर्थ यह है कि बहुत कठिन या बड़े काम को एक अकेला आदमी पूरा नहीं कर सकता.

मगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साबित कर दिया है कि एक अकेला चना भी भाड़ फोड़ सकता है. वैसे चने को लेकर एक और कहावत है कि थोथा चना बाजे घना. यानी जिनके पास क्षमता नहीं होती है वे ज्यादा डींगें हांकते हैं. कायदे से यह कहावत  ट्रम्प पर लागू नहीं होनी चाहिए क्योंकि वे अमेरिका जैसे बड़े देश के राष्ट्रपति हैं तो सामर्थ्यवान तो होंगे ही! मगर बातें बहुत बड़ी-बड़ी कर रहे हैं इसलिए इस कहावत के साथ भी उन्हें जोड़ सकते हैं.

हालांकि ईरान ने उन्हें नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया है लेकिन यह तो मानना पड़ेगा कि ट्रम्प ने न केवल ईरान के भांडे यानी बर्तन को फोड़ा है बल्कि दुनिया के बहुत से देशों के बर्तनों को भी तपा दिया है. अब देखिए न, जो पाकिस्तान इस वक्त अमेरिका की आंखों का नूर है और  शांति का बिचौलिया बनने को उतावला है, उसके घर में क्या हाल है. पाकिस्तान में गैस सिलेंडर की कीमत तीन हजार रुपए से ज्यादा पहुंच चुकी है. पेट्रोल और डीजल तो पहले ही महंगाई की चपेट में हैं.

स्कूल बंद हैं और काम कार्यालयों में नहीं बल्कि वर्क फ्रॉम होम हो रहा है ताकि पेट्रोल और डीजल के खर्च में कटौती की जा सके. ट्रम्प यदि चने की तरह उछल कर फूटे न होते तो क्या मध्य पूर्व के देशों में मिसाइलों की आग बरसती? हम भारतीय गुमान कर सकते हैं कि स्थिति को हमने संभाल रखा है लेकिन एलपीजी के सिलेंडर तो हमारे यहां भी आंखों का नूर हो रहे हैं. यह भी ट्रम्प का ही कमाल है.

इस वक्त दुनिया का शायद ही ऐसा कोई देश है जो ट्रम्प की हरकतों के कारण परेशानियों में नहीं आया हो! अरे भाई! ट्रम्प ने अपने देश के लोगों के ही बर्तनों में महंगाई भर दी है तो हम दूसरे देशों की बात क्यों करें? हकीकत यही है कि लोहे के चने चबाने के बावजूद ट्रम्प तमाम दूसरे देशों को परेशानी में डाले हुए हैं! और हां, आप सोच रहे होंगे कि भांडे में रेत कौन गर्म कर रहा है? तो यह काम इजराइल से बेहतर कौन कर सकता है?

टॅग्स :डोनाल्ड ट्रंपईरानइजराइलUS
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