ब्रिटेन की नई प्रधानमंत्री लिज ट्रस तीसरी महिला प्रधानमंत्री हैं. उन्होंने कंजर्वेटिव पार्टी के उम्मीदवार ऋषि सुनक को हराकर यह सर्वोच्च पद पाया है. वे पिछली बोरिस जाॅनसन सरकार में विदेश मंत्री रही हैं. ऋषि सुनक हारे जरूर हैं लेकिन उन्हें 43 प्रतिशत व
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यातायात नियमों का पालन लोग जब तक नहीं करेंगे, तब तक बड़ी संख्या में दुर्घटनाएं होती रहेंगी. भले ही कितनी भी चौड़ी और अच्छी सड़कें क्यों न बन जाए. देश में यातायात संस्कृति विकसित करने की सख्त जरूरत है.
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अनुसूचित जाति/ जनजाति/ मुस्लिम और निम्न आय वर्ग के बीच स्कूल छोड़ने की ऊंची दर का क्या कारण है? 2017-18 के राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण में स्कूल छोड़ने वालों से ड्रॉप आउट के कारण के बारे में सीधा सवाल पूछा गया। पता चला कि कुल मिलाकर करीब 16 फीसदी ने आर
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भारत अर्थव्यवस्था के मामले में ब्रिटेन से आगे निकल गया है लेकिन भारत पर आज भी ब्रिटिश संस्कृति हावी है. उससे पिंड छुड़ाने की जरूरत है. ये भी देखना होगा कि भारत के आम आदमी को क्या इतनी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जितनी ब्रिटिश लोगों को हैं.
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विश्व बिरादरी समाज की देह में धीमे-धीमे फैल रहे इस जहर को लेकर बहुत चिंतित नहीं दिखाई दे रही है. इस बात पर गौर करना होगा कि सूख रही सहिष्णुता और सामाजिक रिश्तों में उदार भाव की कमी के क्या कारण हो सकते हैं?
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भारत में शिक्षा पाने का अधिकार सरकार ने सबको दे दिया है पर कौन, कितनी और कैसी शिक्षा पाता है, यह उसके भाग्य और औकात पर निर्भर करता है क्योंकि सबको समान शिक्षा की सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
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किसी भी भवन का निर्माण सरकारी अनुमति के बगैर असंभव है. यदि अनेक स्तर पर छानबीन होने के बाद अनुमति मिलती है तो गड़बड़ी कैसे हो सकती है? जाहिर तौर पर इसके लिए भ्रष्ट अधिकारी जिम्मेदार हैं.
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भारत के 'विक्रांत' ने उसे अमेरिका, चीन, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी की तरह महाशक्ति राष्ट्रों की श्रेणी में ला खड़ा किया है. यह उपलब्धि उतनी ही बड़ी है, जितनी अटलबिहारी वाजपेयी के जमाने में हुए परमाणु विस्फोट की थी.
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पुर्तगाल में एक भारतीय महिला पर्यटक की मौत उपचार में अभाव का मुद्दा बन गया और उस स्वास्थ्य मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा जिन्होंने कोविड के दौरान गजब का काम किया था, जिनकी वाहवाही हो रही थी! हमारे यहां तो हर रोज इस तरह की मौतें होती हैं, मंत्री की बात
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लगातार 2024 के लिए इशारों में पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्ष के चेहरे के रूप में या यूं कहें प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रूप में अपने - अपने दावे ठोक रहे हैं।
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