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अवधेश कुमार का ब्लॉगः देश की आकांक्षाएं पूर्ण करने का दिलाया विश्वास 

By अवधेश कुमार | Updated: July 6, 2019 13:27 IST

वित्त मंत्नी ने उन सबको समाहित करते हुए आम आदमी की जरूरतों को पूरा करने वाले कदमों के साथ आर्थिक चुनौतियों का सामना करने वाला, भारत की सामूहिक आकांक्षाओं को पूरी तरह अभिव्यक्त करने वाला एक संतुलित बजट पेश किया है. अंतरिम बजट में भारत को समृद्धतम देश बनाने के लिए दस आयाम घोषित किए गए थे. 

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अवधेश कुमारसंसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण से बजट की दिशा, चरित्न और नीतियों का  आभास मिल गया था. आर्थिक सर्वेक्षण नरेंद्र मोदी सरकार के द्वितीय कार्यकाल का रोडमैप ही था. इसमें प्रधानमंत्नी के अगले पांच वर्षो में भारत को 5000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के साथ चुनाव पूर्व भाजपा के संकल्प पत्न में घोषित सामाजिक-आर्थिक विकास की वर्तमान स्थितियों एवं उसकी कार्ययोजनाओं का भी संकेत था. 

वित्त मंत्नी ने उन सबको समाहित करते हुए आम आदमी की जरूरतों को पूरा करने वाले कदमों के साथ आर्थिक चुनौतियों का सामना करने वाला, भारत की सामूहिक आकांक्षाओं को पूरी तरह अभिव्यक्त करने वाला एक संतुलित बजट पेश किया है. अंतरिम बजट में भारत को समृद्धतम देश बनाने के लिए दस आयाम घोषित किए गए थे. 

वित्त मंत्नी निर्मला सीतारमण ने इसकी चर्चा करते हुए कहा भी कि यह एक निरंतरता का बजट है. 10 आयामों की चर्चा करते हुए सीतारमण ने फिजिकल-सोशल इन्फ्रास्ट्रक्चर से लेकर डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर तक और मेक इन इंडिया से लेकर ब्लू इकोनॉमी तक की चर्चा की. वस्तुत: अंतरिम बजट को और सशक्त किया गया है. यह सच है कि जब मोदी सरकार सत्ता में आई थी तो भारत की अर्थव्यवस्था 1.85 खरब डॉलर की थी. इस वर्ष वह 2.7 खरब डॉलर तक पहुंची. शीघ्र ही यह 3 खरब डॉलर की हो जाएगी. इस आधार पर 5 खरब डॉलर का लक्ष्य पाने की उम्मीद अव्यावहारिक नहीं है. 

बजट इस बड़े लक्ष्य पर केंद्रित अवश्य है लेकिन इसको पाने के लिए समाज के निचले तबके के कल्याण से लेकर उच्चतर तबके की जिम्मेदारियां तय की गई हैं. इसे सबका बजट और संतुलित बजट कहा जा सकता है. इसमें अर्थव्यवस्था के समक्ष सारी चुनौतियों का हल निकालने की कोशिश है, आधारभूत संरचना पर फोकस है तो कारोबारी, उद्योग, किसान, गांव, गरीब, असंगठित क्षेत्न में काम करने वालों, खुदरा व्यापारियों आदि के कल्याण के लिए काफी कुछ किया गया है. शहरी आबादी, युवाओं, महिलाओं सबके लिए बजट में काफी कुछ है.

बजट की थीम यह है कि अर्थव्यवस्था के सभी अंगों को एक साथ मिलाकर समग्रता में ध्यान दिया जाए तो उसका परिणाम हर क्षेत्न के बीच संतुलन बनाने के रूप में सामने आएगा. 5000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए 4 प्रतिशत से नीचे मुद्रास्फीति एवं आठ प्रतिशत की विकास दर चाहिए. पिछले वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में विकास दर 5.8 प्रतिशत पर आ गई थी. 

इसका मुख्य कारण एनबीएफसी यानी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की खस्ताहाली, विनिर्माण एवं कृषि विकास का धीमापन माना गया था. बजट में वित्त मंत्नी ने एनबीएफसी की समस्याओं के समाधान के लिए सारे संभव कदम उठाए गए हैं. चरमरा रहे बैंकों के लिए 70 हजार करोड़ के पुनर्पूजीकरण का ऐलान अत्यंत महत्वपूर्ण है. मोदी सरकार के कार्यकाल में नए कानूनों के कारण 4 लाख करोड़ का कर्ज वसूला गया है. एनपीए में एक लाख करोड़ की कमी आ गई है. बैंकों के पास धन आने का मतलब हुआ उद्योग और कारोबार को कर्ज के लिए धन की उपलब्धता. इस तरह विनिर्माण क्षेत्न को प्रोत्साहन मिल सकता है. वित्त मंत्नी ने कहा कि आजादी के पूर्व जो भावना स्वदेशी की थी वही भावना अब मेक इन इंडिया की है. 

तो मेक इन इंडिया के लिए बजट में जितने प्रावधान हैं उनसे उम्मीद जगती है कि भारत विनिर्माण हब का ठोस केंद्र हो सकता है. अगले पांच वर्ष में 100 लाख करोड़ रुपया आधारभूत संरचना तथा 25 लाख करोड़ रुपया कृषि एवं ग्रामीण आधारभूत संरचना के लिए खर्च की घोषणा बहुत बड़ी है. अंतर्राष्ट्रीय वित्त पर नजर रखने वाले जानते हैं कि बाजार में भारी धन निवेश के लिए पड़ा हुआ है. बस उसको अपने यहां लाने के लिए कोशिश करनी है.

कहा जा सकता है यह भारत के सभी वर्गो और क्षेत्नों के विकास को परवान चढ़ाने के लिए सभी संभव उपाय करते हुए आकांक्षाओं को बढ़ाने और उसे पूरा करने का विश्वास दिलाने वाला बजट है.

टॅग्स :बजट 2019नरेंद्र मोदीनिर्मला सीतारमण
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