लाइव न्यूज़ :

ऐसी भाषा बोलने के पहले सोच तो लेते नेताजी !

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: January 3, 2026 07:56 IST

उनके शब्दों को लेकर जब सोशल मीडिया पर हंगामा मचने लगा तो उन्होंने सीधे-सीधे माफी मांग ली.

Open in App

वैसे तो हर किसी से उम्मीद की जानी चाहिए, लेकिन खास तौर पर उन लोगों से जो सामाजिक जीवन में हैं, शब्दों की शुचिता की उम्मीद तो की ही जानी चाहिए. कुछ भी बोलने से पहले उन्हें सोचना चाहिए कि उनके शब्दों का समाज पर क्या प्रभाव पड़ेगा. मगर पता नहीं क्यों, नेताओं को यह भ्रम हो जाता है कि वे कुछ भी बोलते रहेंगे और आम आदमी कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं करेगा! मगर जब आम आदमी प्रतिक्रिया व्यक्त करता है तो ऐसे लोग कह देते हैं कि उनकी बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया.

अभी इंदौर में भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने एक पत्रकार के सवाल के जवाब में कुछ ऐसे ही शब्दों का उपयोग किया तो उनके सामने यह विकल्प भी नहीं था कि यह कह पाते कि उनके शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया. वीडियो से साफ था कि उनके तेवर ठीक नहीं थे और शब्द तो निचले स्तर के थे ही. उनके शब्दों को लेकर जब सोशल मीडिया पर हंगामा मचने लगा तो उन्होंने सीधे-सीधे माफी मांग ली. मगर इस बात पर तो विचार किया ही जाना चाहिए कि लोगों की मौत से जुड़े दुखद प्रसंग पर भी उनके मुंह से वो शब्द क्यों निकले? यह इस बात को दर्शाता है कि विषय को लेकर गंभीरता का अभाव था.

दूसरा मामला तो और भी गंभीर है. उत्तराखंड की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री हैं रेखा आर्य. उनके पति गिरधारी लाल साहू के बोल-वचन तो और भी खतरनाक हैं. गिरधारी लाल का एक वीडियो वायरल हो रहा है कि यदि शादी नहीं हो रही हो तो बीस-पच्चीस हजार में बिहार से लड़की खरीद लो! जरा सोचिए क्या कोई समझदार व्यक्ति किसी प्रदेश के लिए इस तरह की भाषा का उपयोग करेगा? यह तो एक पूरे प्रदेश के असम्मान की बात है. मगर गिरधारी लाल साहू की बेशर्मी देखिए कि यह शख्स कह रहा है कि उसकी बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है. वीडियो में उसका चेहरा स्पष्ट है, उसकी भाषा स्पष्ट है तो फिर उसे तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया कैसे कह सकते हैं?

गिरधारी लाल साहू शायद कोई बयान भी नहीं देते, यदि उनकी बातों को लेकर मीडिया में हंगामा नहीं हुआ होता. अब सवाल है कि क्या इन दोनों नेताओं के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई होगी? मानकर चलिए कि नहीं होगी क्योंकि इस देश में नेताओं की जुबान को फिसलने की आदत है और हमारा कानून इसका अभ्यस्त हो चुका है. कुछ दिन बाद यह देश कैलाश विजयवर्गीय  के शब्द ‘घंटा’ को भी भूल जाएगा और गिरधारी के बकवास की भी किसी को याद नहीं रहेगी! फिर कोई और नेता बकवास करेगा और यह सिलसिला चलता रहेगा!

टॅग्स :कैलाश विजयवर्गीयBJPइंदौर
Open in App

संबंधित खबरें

भारतछत्रपति संभाजीनगर भाजपाः अपनों पर ही भरोसा करना महंगा पड़ गया

भारतBMC Elections 2026: बीएमसी चुनाव से पहले बीजेपी को बड़ी सफलता, महाराष्ट्र में 14 उम्मीदवार निर्विरोध जीते

भारतमहाराष्ट्र में केवल मराठी ही अनिवार्य है, कोई अन्य भाषा नहीं?, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा-हम अंग्रेजी, फ्रेंच और स्पेनिश का खुले दिल से स्वागत करते

भारतबिहार में 20000-25000 रुपये में मिल जाती लड़कियां?, उत्तराखंड कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू के बयान से सियासत तेज

भारतनागपुर नगर निकाय चुनाव 2026ः नाम वापस मत लीजिए, भाजपा प्रत्याशी को समर्थकों ने घर में किया बंद, चुनाव से हटे किसान गावंडे

भारत अधिक खबरें

भारतSupermoon: आज दिखाई देगा साल का पहला सुपरमून, बेहद विशाल और चमकदार नजर आएगा चाँद, कब, कैसे और कहां देखें?

भारतUnnao Rape Case: न्याय की भाषा के सवाल का हल भी जरूरी 

भारतAadhaar PVC Card: घर बैठे बनाए अपना आधार PVC कार्ड, बस 75 रुपये में होगा काम, जानें प्रोसेस

भारतFASTag Rules Change: NHAI का बड़ा फैसला, FASTag यूजर्स के लिए नियम बदले, जानें क्या होगा फायदा

भारतआईटी मंत्रालय ने ग्रोक 'बिकिनी' ट्रेंड को लेकर X को नोटिस जारी किया, दुरुपयोग के खिलाफ तत्काल की कार्रवाई की मांग