ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों के लिए 'मराठी अनिवार्यता' पर विशेषज्ञों की राय, जानें क्या कहा?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: April 30, 2026 12:28 IST2026-04-30T12:27:27+5:302026-04-30T12:28:14+5:30

मुंबई जैसे महानगर में बड़ी संख्या में टैक्सी और ऑटो ड्राइवर दूसरे राज्यों से आए प्रवासी हैं।

Mumbai Marathi mandatory auto-taxi drivers Experts weigh Adv Rakesh Kumar singh RKS Associate | ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों के लिए 'मराठी अनिवार्यता' पर विशेषज्ञों की राय, जानें क्या कहा?

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Highlightsलागू करने के तरीके पर सावधानी बरतने की सलाह दी है।दुनिया के कई बड़े शहरों में इस तरह के भाषाई मानक पेशेवर कामकाज का हिस्सा होते हैं।

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार द्वारा आगामी 1 मई से ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा के ज्ञान को अनिवार्य बनाने के निर्णय ने राज्य की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में एक नई चर्चा छेड़ दी है। जहाँ एक ओर इसे क्षेत्रीय पहचान और भाषाई गौरव से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं कानूनी विशेषज्ञ इसे व्यवहारिकता की कसौटी पर परख रहे हैं। 'आरकेएस एसोसिएट' के प्रमुख एडवोकेट राकेश कुमार सिंह ने इस नीति का विश्लेषण करते हुए इसे सिद्धांत रूप में उचित ठहराया है, लेकिन इसके लागू करने के तरीके पर सावधानी बरतने की सलाह दी है।

सांस्कृतिक पहचान और पेशेवर आवश्यकता

राकेश सिंह का मानना है कि सार्वजनिक सेवा में लगे व्यक्तियों के लिए स्थानीय भाषा का ज्ञान होना केवल एक नियम नहीं, बल्कि पेशेवर दक्षता का हिस्सा है। उन्होंने कहा, "मराठी, महाराष्ट्र की आधिकारिक भाषा होने के नाते, राज्य की सांस्कृतिक और प्रशासनिक पहचान का एक अनिवार्य हिस्सा है। यात्रियों को अपनी दिशा, आपातकालीन स्थिति और चिंताओं को बिना किसी भाषाई बाधा के बताने में सक्षम होना चाहिए।" उनके अनुसार, दुनिया के कई बड़े शहरों में इस तरह के भाषाई मानक पेशेवर कामकाज का हिस्सा होते हैं।

प्रवासी अधिकार और कानूनी चुनौतियां

हालाँकि, एडवोकेट सिंह ने इस नीति के कठोर कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाली संभावित कानूनी अड़चनों की ओर भी इशारा किया। मुंबई जैसे महानगर में बड़ी संख्या में टैक्सी और ऑटो ड्राइवर दूसरे राज्यों से आए प्रवासी हैं। इस संदर्भ में उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "बड़ी संख्या में ड्राइवर प्रवासी हैं जो महाराष्ट्र में अपनी रोजी-रोटी कमा रहे हैं।

इस नियम को अचानक और सख्ती से लागू करना उनके काम करने के अधिकार (Right to Work) को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है।" सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सरकार लाइसेंस रद्द करने या भारी जुर्माना लगाने जैसे दंडात्मक कदम उठाती है, तो इसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

एकीकरण बनाम बहिष्कार

नीति को सफल बनाने के लिए उन्होंने सरकार को 'समावेशी दृष्टिकोण' अपनाने का सुझाव दिया। उनके अनुसार, सरकार को केवल दंड देने के बजाय ड्राइवरों को सिखाने पर जोर देना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा, "सरकार को पहले व्यवस्थित मराठी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने चाहिए और ड्राइवरों को इसे सीखने के लिए उचित समय देना चाहिए। मुख्य उद्देश्य एकीकरण होना चाहिए, न कि बहिष्कार।"

राकेश सिंह ने इस बात पर बल दिया कि भाषा का उपयोग समाज को जोड़ने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "भाषा को साझा नागरिक भागीदारी के माध्यम से लोगों को एकजुट करना चाहिए, न कि उन्हें विभाजित करना चाहिए।" देखना दिलचस्प होगा कि महाराष्ट्र सरकार इन सुझावों को कितनी गंभीरता से लेती है और 1 मई से लागू होने वाले इस नियम का स्वरूप कितना लचीला या सख्त रहता है।

Web Title: Mumbai Marathi mandatory auto-taxi drivers Experts weigh Adv Rakesh Kumar singh RKS Associate

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