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मोरबी पुल हादसा: ऐसी त्रासदियों से भविष्य के लिए सबक लेना जरूरी

By अवधेश कुमार | Updated: November 1, 2022 12:21 IST

मोरबी त्रासदी पूरे देश के लिए चेतावनी होनी चाहिए. हर श्रेणी के पुलों तथा फ्लाईओवरों की गहन समीक्षा होनी चाहिए. सभी राज्य इसके लिए आदेश जारी कर एक निश्चित समय सीमा के अंदर समीक्षा रिपोर्ट मंगवाएं.

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गुजरात के मोरबी पुल की त्रासदी ने पूरे देश को हिला दिया है. इस घटना की कल्पना से ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं. माच्छू नदी पर बनाया सस्पेंशन ब्रिज यानी झूलने वाला पुल पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा कारण था. लेकिन कौन जानता था कि वहां पहुंचे लोगों में बड़ी संख्या के लिए अंतिम दिन होगा. पुल टूटा और नीचे नदी में 15 फुट के आसपास पानी था, जिसमें लोग डूबते चले गए.  

इस घटना को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता है. यह पुल 20 फरवरी 1879 को जनता के लिए खोला गया था. तब मुंबई के गवर्नर रिचर्ड टेंपल ने इसका उद्घाटन किया था. यह सामान्य यातायात का मुख्य पुल नहीं था. लेकिन हमारे देश में सामान्य यातायात वाले प्राचीन पुलों की संख्या बहुत ज्यादा है. ऐसा नहीं है कि किसी की मरम्मत नहीं होती. समय-समय पर अनेक पुलों की मरम्मत होती रहती है. बावजूद आप देखेंगे कि ऐसे पुलों की संख्या हजारों में है जिनको देखने से ही लगता है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. 

हम आप जान जोखिम में डालकर उस पर चलते हैं. गाड़ियां चलती हैं. यही नहीं उसके बाद के और हमारे आपके समय के बने हुए भी हजारों पुलों, फुटओवर ब्रिजों, फ्लाईओवरों सब पर नजर दौड़ाई जाए तो अनेक हादसे की स्थिति में जाते हुए दिखेंगे. राजधानी दिल्ली में ऐसे कई फुट ओवरब्रिज हैं, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं. वास्तव में पुलों, फुटओवर ब्रिजों, पैदल पार पथों आदि को लेकर संबंधित विभाग को जितना सतर्क और चुस्त होना चाहिए, वह प्रायः नहीं दिखता. जब  बड़ी घटनाएं होती हैं तो हायतौबा मचती है लेकिन कुछ समय बाद फिर वही स्थिति. कोई उससे सबक लेकर अपने यहां के पुलों की समीक्षा नहीं करता.

जाहिर है, मोरबी त्रासदी पूरे देश के लिए चेतावनी होनी चाहिए. हर श्रेणी के पुलों तथा फ्लाईओवरों की गहन समीक्षा होनी चाहिए. सभी राज्य इसके लिए आदेश जारी कर एक निश्चित समय सीमा के अंदर समीक्षा रिपोर्ट मंगवाएं और उसके अनुसार जहां जैसी मरम्मत या बदलाव की जरूरत हो, वो किया जाए. समीक्षा हो तो ऐसी अनेक पुलें निकलेंगी जिन्हें तत्काल बंद करने का ही विकल्प दिखाई देगा. 

कुछ ऐसे पुल हैं जिन्हें तोड़कर नए सिरे से बनाना होगा. समस्या को टालने से वह और विकराल होती है. जो समस्या सामने है, उसका समाधान भविष्य को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए. मोरबी त्रासदी ने हम सबको झकझोरा है लेकिन अगर देश ने इससे सबक नहीं लिया तो ऐसी त्रासदी बार-बार होती रहेगी. स्वयं मोरबी और राजकोट प्रशासन को आगे यह निर्णय करना होगा कि पुल को रखा जाए या नहीं और नहीं रखा जाए तो इसका विकल्प क्या हो सकता है.

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