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ब्लॉग: उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव रोकने के करने होंगे उपाय

By सुखदेव थोरात | Updated: July 18, 2023 16:11 IST

सरकार रैगिंग के प्रति अधिक संवेदनशील है, जिसमें ऊंची और निचली सभी जातियां शामिल होती हैं।

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उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसूचित जाति-जनजाति(एससी-एसटी) छात्रों की आत्महत्या को रोकने के लिए नीतियां बनाने की दिशा में सरकार की उपेक्षा से निराश होकर पीड़ित रोहित वेमुला और पायल तड़वी की मां ने न्याय की गुहार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

वेमुला के मामले में, छात्रों और शिक्षकों ने जातिगत भेदभाव को फौजदारी अपराध बनाने के लिए एक कानून बनाने की मांग की, साथ ही उन कुलपतियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की भी मांग की, जिनके खिलाफ अत्याचार का मामला दर्ज किया गया था.

सरकार ने उचित नीति बनाने और कानूनी कार्रवाई करने का वादा किया था लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया. इसलिए, सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से पूछा कि उसने इस संबंध में वास्तव में कौन-सी नीति अपनाई है.

सवाल यह है कि सैकड़ों आत्महत्याओं, जिनमें मुख्य रूप से एससी/एसटी छात्र शामिल हैं, के बावजूद सरकार कार्रवाई करने से क्यों बचती है? ऐसा नहीं है कि सरकार को इस समस्या का समाधान मालूम नहीं है.

सरकार रैगिंग के प्रति अधिक संवेदनशील है, जिसमें ऊंची और निचली सभी जातियां शामिल होती हैं. लेकिन जहां एससी/एसटी शामिल हैं, वहां इच्छाशक्ति की कमी दिखती है.

मैंने सरकार और यूजीसी को बार-बार तीन मुख्य उपाय सुझाए हैं, जिन्हें अगर एक साथ अपना लिया जाए तो शैक्षणिक संस्थानों में जातिगत भेदभाव को कम किया जा सकता है.

पहला उपाय समानता विनियम, 2012 के तहत मान्यता प्राप्त जातिगत भेदभाव के 35 कृत्यों को मानवता के खिलाफ एक आपराधिक अपराध या संशोधित अत्याचार अधिनियम, 2015 बनाना है.

दूसरा नीतिगत उपाय भेदभाव और असमानता की समस्या के बारे में छात्रों को शिक्षित करने और संवेदनशील बनाने के लिए एक अनिवार्य पाठ्यक्रम शुरू करना है. इसमें पारंपरिक मूल्य, जो संविधान और कानून के प्रावधानों के विपरीत हैं, परिवार और समाज में समाजीकरण के माध्यम से हमारे बच्चों के व्यवहार को उनके प्रारंभिक चरण में आकार देते रहते हैं और यह शैक्षणिक परिसर में एससी/एसटी के प्रति उनके व्यवहार में परिलक्षित होता है.

तीसरा नीतिगत उपाय पिछड़े छात्रों के लिए उपचारात्मक सहायता (रेमिडियल असिस्टेंस) है, यूजीसी को अंग्रेजी भाषा और मुख्य विषयों में सुधार के लिए उपचारात्मक सहायता कार्यक्रमों को अनिवार्य करने के लिए नियम पारित करना चाहिए. इससे छात्रों को शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार करने और मानसिक दबाव से राहत पाने में मदद मिलेगी.

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