Ketan Gorania blog: Coronavirus ill effects on the Indian economy | केतन गोरानिया का ब्लॉग: कोरोना का भारतीय अर्थव्यवस्था पर दुष्प्रभाव
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (फाइल फोटो)

कोरोना वायरस के रूप में दुनिया इस सदी की सबसे बड़ी आर्थिक चुनौती का सामना कर रही है. इसके आर्थिक के अलावा सामाजिक पहलू भी हैं, इसलिए पूरी दुनिया इसके प्रसार को रोकने में जुटी हुई है.

संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक व्यापार समिति के अनुमान के अनुसार कोरोना की वजह से चीन के औद्योगिक उत्पादन में कमी आएगी, जिससे दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में एक हजार अरब डॉलर की कमी आएगी. अन्य संगठनों का आकलन है कि कोरोना की वजह से दुनिया की जीडीपी में 1.3 प्रतिशत की कमी आएगी. यूरोप की 50 प्रतिशत जीडीपी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर निर्भर होने से वहां मंदी आने की आशंका ज्यादा है.  साथ ही विदेशी निवेश में 5 से 15 प्रतिशत की कमी आने से इसका असर भारत
पर पड़ेगा.

भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2019 की आखिरी तिमाही में 4.7 प्रतिशत थी. अब कोरोना वायरस की वजह से पूरे देश में ‘लॉकडाउन’ करना पड़ा, जिसका वृद्धि दर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. आईएमए की रिपोर्ट के अनुसार भारत के 18 प्रमुख शहरों में देश का 25 प्रतिशत रोजगार उपलब्ध है. इसमें असंगठित क्षेत्र में 180.7 मिलियन, सार्वजनिक क्षेत्र में 30.5 मिलियन और निजी क्षेत्र में 19.5 मिलियन कामगार हैं. भारत का 65 प्रतिशत असंगठित क्षेत्र निजी स्वामित्व में होने के कारण यह क्षेत्र सबसे कमजोर माना जाता है.

इसके साथ ही, इस क्षेत्र में 72 प्रतिशत उद्योगों में 6 से कम कामगार हैं. 2017-18 के कामगार सव्रेक्षण के अनुसार असंगठित क्षेत्र के 71.10 प्रतिशत कामगारों के पास कोई लिखित करार नहीं था. साथ ही 54.20 प्रतिशत कामगारों के लिए सवैतनिक छुट्टी का प्रावधान नहीं था. इससे स्पष्ट है कि लॉकडाउन के दौरान इन कामगारों को कुछ भी वेतन नहीं मिलेगा.

भारत के 20.44 मिलियन कामगार/कर्मचारी होटल उद्योग पर निर्भर हैं. अर्थात कुल रोजगार का 5.6 प्रतिशत इस एक क्षेत्र में है. इसके अलावा होटल उद्योग से 40 मिलियन लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है. वर्तमान में यह संपूर्ण उद्योग अस्थिर है तथा लॉकडाउन से परिस्थिति और अधिक विकट होने वाली है. कोरोना का झटका आर्थिक बाजार पर भी लगना है. गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) व बैंक वर्तमान में मुश्किल में हैं. कामगार/कर्मचारी एक बार बेरोजगार हो गए तो उनके द्वारा लिए गए छोटे-मोटे कजरे की वसूली कठिन हो जाएगी. इस वजह से अनेक छोटे-मोटे उद्योग धीरे-धीरे बंद होते जाएंगे. कोरोना की वजह से होने वाले इस नुकसान की भरपाई के लिए दुनिया भर में सरकारें उद्योग/व्यापार क्षेत्र की आर्थिक मदद के लिए पैकेज की घोषणा कर रही हैं. अमेरिका ने 1200 अरब डॉलर, इंग्लैंड ने 39 अरब डॉलर, फ्रांस ने 45 अरब डॉलर तथा इटली ने 28 अरब डॉलर के पैकेज की घोषणा की है. इस पृष्ठभूमि में भारत के लिए भी पैकेज की घोषणा करना आवश्यक है. इसके लिए कुछ सुझाव निम्न हैं.

सरकार को लघु उद्योग, छोटे व्यावसायिक व घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली, पानी के बिल की वसूली के लिए तीन से छह माह की मियाद देनी चाहिए. मध्यम उद्योगों के लिए प्राप्तिकर भरने के लिए तीन से छह माह तक की अवधि दी जाए. साथ ही सरकार को बुनियादी सुविधाओं वाले क्षेत्र के लिए 2.50 लाख करोड़ की निधि का इंतजाम करना चाहिए, जिसमें एक लाख करोड़ रु. सरकार दे और बाकी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं से 10 वर्ष की अवधि के लिए कर्ज लिया जाए. वर्तमान संकट को देखते हुए, सरकार को वित्तीय गिरावट, कर वसूली में गिरावट, महंगाई दर को अनदेखा करना चाहिए. भारतीय रुपया वर्तमान में जिस स्तर पर है, उसके अंतर्राष्ट्रीय मूल्य में उससे भी ज्यादा गिरावट आ सकती है.
इन सभी उपाययोजनाओं से हासिल होने वाली रकम को सरकार को निम्न आय वर्ग के कामगारों, गरीबी रेखा से नीचे के नागरिकों व बिजली तथा पानी आपूर्ति करने वाली संस्थाओं पर खर्च करना चाहिए. रिजर्व बैंक को ब्याज दर में तत्काल एक प्रतिशत की कटौती कर देनी चाहिए और सभी एनबीएफसी तथा बैंकों, व्यावसायिक व लघु उद्योगों को त्वरित कर्ज आपूर्ति करनी चाहिए तथा वसूली 3 से 6 माह बाद शुरू करनी चाहिए.

वर्तमान में देश एक बेहद कठिन दौर में है. ऐसे समय में अगर सरकार ने अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का मौका गंवा दिया तो जनता को तो नुकसान होगा ही, शेयर बाजार भी अस्थिर होगा और निवेशकों को नुकसान होगा. लेकिन कोरोना के इस संकटकाल में भी भारत के लिए कुछ मौके हैं. भारत की वैश्विक व्यापार में हिस्सेदारी दो प्रतिशत से अधिक बढ़ सकती है. इसके अलावा केमिकल, आयरन व स्टील तथा वाहनों के कलपुजरे के जिस उद्योग पर आज भारत का नियंत्रण है, उसे और मजबूती मिलेगी.

लॉकडाउन की वजह से जापान, अमेरिका व अन्य देशों के शैक्षिक संस्थान बंद हैं. इसका लाभ उठाकर भारत ई-लर्निग व ई-डिलिवरी ऑफ एजुकेशन या टेलीमेडिसिन क्षेत्र में अपना वर्चस्व बना सकता है.
 

Web Title: Ketan Gorania blog: Coronavirus ill effects on the Indian economy
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