लाइव न्यूज़ :

अपनी स्वास्थ्य समस्याओं का जनक मनुष्य खुद है

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: February 28, 2026 05:27 IST

यदि हम खुद की जिंदगी देखें और अपने आसपास की जिंदगी को देखें तो सहज ही अनुभव हो जाता है कि हम में से कोई लाखों में एक ही है जो प्रकृति के साथ साहचर्य में जी रहा है.

Open in App
ठळक मुद्देसोलह आने सच है कि मनुष्य अपनी ज्यादातर स्वास्थ्य समस्याओं के लिए खुद ही जिम्मेदार है.खाने का चलन तेजी से बढ़ा है और नई पीढ़ी तो रात के समय फास्ट फूड की शौकीन हो गई है.अनियमित भोजन, अनियमित नींद और तनावग्रस्त जीवन ने मधुमेह की बीमारी को भीषण रूप दे दिया है.

महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने बड़े विनोदपूर्ण अंदाज में एक बहुत गंभीर और मनुष्य के जीवन से जुड़ी बेहद व्यावहारिक बात कही है. गुरुवार को नागपुर में लोकमत टाइम्स एक्सीलेंस इन हेल्थ केयर अवार्ड समारोह में उन्होंने चिकित्सकों के समूह से पूछा कि क्या आपने कभी गाय को चश्मा पहने हुए देखा है? उनका आशय यह था कि जितने भी जीव प्रकृति के साथ साहचर्य रखते हैं, उन्हें अमूमन बीमारियां परेशान नहीं करतीं और करती भी हैं तो प्राकृतिक उपचार भी मौजूद होता है. उनकी बात सोलह आने सच है कि मनुष्य अपनी ज्यादातर स्वास्थ्य समस्याओं के लिए खुद ही जिम्मेदार है.

यदि हम खुद की जिंदगी देखें और अपने आसपास की जिंदगी को देखें तो सहज ही अनुभव हो जाता है कि हम में से कोई लाखों में एक ही है जो प्रकृति के साथ साहचर्य में जी रहा है. आज देर रात तक सोना और देर सुबह जागना जीवन शैली का हिस्सा है. हाल के वर्षों में देर रात को खाना खाने का चलन तेजी से बढ़ा है और नई पीढ़ी तो रात के समय फास्ट फूड की शौकीन हो गई है.

आप किसी भी फूड डिलिवरी ब्वाय से पूछेंगे तो वह बताएगा कि जितने ऑर्डर वह दिन के समय लोगों के घरों तक पहुंचाता है, उससे ज्यादा फेरे वह रात में लगाता है. यह हर किसी को पता है कि देर रात को जो लोग भोजन करते हैं, उनका स्वास्थ्य कमजोर होता चला जाता है. अनियमित भोजन, अनियमित नींद और तनावग्रस्त जीवन ने मधुमेह की बीमारी को भीषण रूप दे दिया है.

इसके बावजूद हम चेत ही नहीं रहे हैं. आचार्य देवव्रत ने  हर साल खेतों में इस्तेमाल होने वाली लाखों टन यूरिया के मसले पर सही कहा है कि इससे धरती तो बदहाल हो ही रही है, वायु की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है और हम जो खा रहे हैं, उसके माध्यम से यूरिया हमारे खून में पहुंच रहा है.

यह सभी लोग जानते हैं, हमारी सरकार भी जानती है, हमारे किसान भी जानते हैं और उपयोगकर्ता भी जानते हैं लेकिन असली सवाल है कि कोई सुरक्षात्मक उपाय क्यों नहीं अपनाता? हम सब जानते हैं कि फलों को चमक प्रदान करने के लिए मोम की पॉलिश की जा रही है, फिर भी ये फल खुलेआम मिल रहे हैं.

ऐसा इसलिए है कि हमने यह मान लिया है कि यह सब तो चलता है! हम सब जानते हैं कि हर व्यक्ति को आठ से दस किमी रोज पैदल चलना चाहिए लेकिन कितने लोग पैदल चलते हैं? यह कहने में कोई हर्ज नहीं है कि हम अपने लिए स्वास्थ्य समस्याएं खुद पैदा कर रहे हैं. चिकित्सक आपके रोगों को दूर कर सकते हैं लेकिन रोग न हो,

इसके लिए व्यवस्थित तो खुद आपको ही होना होगा! तो ये संभलने का वक्त है. हालांकि बहुत देर हो चुकी है लेकिन वो कहावत है ना कि जब जागो तभी सवेरा! तो अब भी बहुत कुछ नहीं बिगड़ा है. हमें केमिकल मुक्त खेती की ओर बढ़ना चाहिए. खानपान अच्छा होगा तो स्वास्थ्य बेहतर होगा.  

टॅग्स :महाराष्ट्रHealth and Family Welfare Departmentभोजन
Open in App

संबंधित खबरें

क्राइम अलर्ट2 क्रेडिट सोसायटी, 132 खाते, ₹62.74 करोड़ लेन-देन?, 'धर्मगुरु' ने कैसे दौलत बनाई?

क्राइम अलर्ट2022 में 37 वर्षीय विकास रामदास दिवाटे ने की थी आत्महत्या, सुसाइड नोट में अशोक खरात का जिक्र, स्वयंभू धर्मगुरु को लेकर खुल रहे राज

क्राइम अलर्टचंदोली गांवः महिलाओं से यौन संबंध और छेड़छाड़?, शिवदत्ता आश्रम 'महाराज' नवनाथ गावली के खिलाफ मामला

स्वास्थ्यऑटिज्म : समझ और स्वीकार्यता की जरूरत

क्राइम अलर्ट8 महिला श्रमिकों की मौत, नागपुर-मुंबई एक्सप्रेसवे पर ट्रक-टेम्पो में टक्कर

स्वास्थ्य अधिक खबरें

स्वास्थ्यसन फार्मा ने लॉन्च किया ‘हार्ट के लिए 8- मेकिंग इंडिया हार्ट स्ट्रॉन्ग’ कैंपेन, दिल के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए भारतीयों से रोजाना में अच्छी आदतें अपनाने का आग्रह

स्वास्थ्यफोर्टिफाइड चावल : पोषण या स्वास्थ्य पर संकट ?

स्वास्थ्यचीनी का सेवन कम कीजिए और खाना बनाते समय तेल का प्रयोग 10 प्रतिशत तक घटाएं?, प्रधानमंत्री मोदी बोले-छोटे प्रयास करिए और मोटापे को दूर भगाएं?

स्वास्थ्यरात में सिर्फ़ 11 मिनट ज़्यादा सोने से हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है कम

स्वास्थ्यसाल 2024 में 34539 लोगों की मौत हार्ट अटैक?, दिल्ली पुलिस और iLive Connect में करार, हृदय बीमारी पर वार