Iran-Israel war LPG GAS: रसोई गैस या द्रवित पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की उपलब्धता में बढ़ोत्तरी के साथ देश के अनेक भागों में स्थितियां सामान्य हो रही हैं. इसी के चलते शनिवार को केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए वाणिज्यिक एलपीजी का अतिरिक्त 20 प्रतिशत मंजूर कर कुल आवंटन 50 प्रतिशत कर दिया है. इसकी सीधी वजह घरेलू उत्पादन में बढ़ोत्तरी है. पश्चिम एशिया में तीन सप्ताह से जारी युद्ध के कारण पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति में समस्या आई है. भारत अपनी खपत का करीब 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है.
इसमें लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों से आता है, जो ईरान के होर्मुज स्ट्रेट से गुजर कर मिलता है. देश में 33 करोड़ से ज्यादा लोग घर पर खाना बनाने के लिए एलपीजी गैस के सिलेंडर पर निर्भर हैं. इसलिए जैसे ही ऊर्जा आपूर्ति में बाधा की आहट मिली, वैसे ही वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को एलपीजी की आपूर्ति घटा दी गई.
जिससे घरेलू रसोई के लिए गैस उपलब्ध रहे. फिर स्थितियों को देख वाणिज्यिक गैस पहले बीस फीसदी और फिर तीस प्रतिशत से लेकर अब उसे पचास प्रतिशत तक उपलब्ध करा दिया गया है. इसका सीधा लाभ रेस्तरां, होटल, औद्योगिक कैंटीन, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, सामुदायिक रसोई और सब्सिडी वाले खाद्य केंद्रों को मिलेगा.
इसी में छोटे सिलेंडर रखने वाले प्रवासी श्रमिकों को भी सहायता प्रदान की जाएगी. अब यह स्पष्ट हो चला है कि घरेलू एलपीजी की आपूर्ति स्थिर हो गई है. वितरक सामान्य ढंग से वितरण कार्य कर रहे हैं. घबराहट में की जाने वाली बुकिंग कम हो गई है. हालांकि नागरिकों के एक वर्ग के दुकानों पर भीड़ लगाने का सिलसिला जारी है, लेकिन उसे भी ‘होम डिलीवरी’ के माध्यम से सामान्य बनाया जा रहा है.
कुछ दिन पहले गैस की कमी के कारण कुछ रेस्तरां ने अस्थायी रूप से प्रतिष्ठान बंद रखने का फैसला कर लिया था, क्योंकि देश में गैस आपूर्ति बाधित होने की चिंता बढ़ गई थी. कुछ स्थानों पर कीमतों में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई थी. हालांकि जहाजों की आवाजाही और गति देखकर अंदाज लगाया जा सकता है कि ‘सप्लाई चेन’ में बाधा आई है.
मगर देश की हालत इतनी भी खराब नहीं हुई थी, जितना शोर मच गया. आने वाले दिनों में उपलब्धता धीरे-धीरे पूरी होने की स्थिति में उपभोक्ताओं को संयम से काम लेना आवश्यक होगा. जमाखोरी से बचना होगा. यदि समझदारी से धीमे-धीमे काम किया गया तो आने वाले कुछ माह आसानी से निकल जाएंगे. वर्ना अफवाहें फैला कर स्थितियां बिगाड़ने से घर से बाजार तक प्रभावित होगा.
वह स्थिति न देश हित में होगी और न ही व्यक्तिगत रूप से किसी को लाभ पहुंचा पाएगी. फिलहाल पश्चिमी एशिया का युद्ध का ऊंट आने वाले दिनों में किस करवट बैठेगा, इसका अंदाज दुनिया नहीं लगा पा रही है. मगर ऊर्जा संकट का खतरा पूरे विश्व के समक्ष है. भारत उससे न अलग है और न किसी मायने में बेहतर या सुरक्षित स्थिति में है, क्योंकि ऊर्जा के स्रोत वहीं पर हैं, जहां पर युद्ध की ज्वाला धधक रही है.