Supreme Court bars registration of BS-4 vehicles sale in March during lockdown; | अगले आदेश तक नहीं होगा BS-4 वाहनों का रजिस्ट्रेशन, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो)

Highlightsसुप्रीम कोर्ट ने कहा, जिन वाहनों के लिए रकम ले ली गई है लेकिन उन्हें बेचा न गया हो तो वह वाहन डीलर का माना जाएगा और खरीददार के पैसे वापस करने होंगे। पीठ ने कहा, हमने लॉकडाउन को देखते हुए 31 मार्च के बाद बिक्री की इजाजत दी थी लेकिन जो आंकड़े हमारे पास आए हैं वह बताते हैं कि लॉकडाउन के दौरान वाहनों की बिक्री बिना लॉकडाउन की अवधि के मुकाबले अधिक हुई। 

सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक BS-4 वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा दिया है। कोर्ट ने मार्च में लॉकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में वाहनों की बिक्री पर नाराजगी भी जाहिर की है। इस मामले पर कोर्ट 13 अगस्त को अगली सुनवाई करेगी।
 
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च के बाद वाहन पोर्टल पर BS-4 वाहनों को अपलोड करने से संबंधित जानकारी देने के लिए केंद्र सरकार को और वक्त दिया था। 

जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने वाहनों की बिक्री की इजाजत देने संबंधी याचिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, हम ऐसे वाहनों को वापस लेने का आदेश क्यों पारित करे? निर्माताओं को इसकी समयसीमा के बारे में पता था, तो उन्हें इसे वापस लेना चाहिए। पीठ ने सरकार को हलफनामा दायर करने के लिए और वक्त दे दिया। 
 
सुप्रीम कोर्ट में हुई पिछली सुनवाई में फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल्स डीलर्स एसोसिएशन (FADA) की ओर से पेश वरिष्ठ वकील केवी विश्वनाथन ने पीठ से कहा था कि वाहन डीलर्स के पास अभी भी ऐसे BS-4 वाहन पड़े हुए हैं, जिनकी बिक्री नहीं हुई। लिहाजा उन वाहनों को निर्माताओं को वापस करने की अनुमति दी जाए, ताकि निर्माता उन वाहनों को दूसरे देश में निर्यात कर सके। 

उन्होंने बताया कि अफ्रीका के कई देश BS-4 वाहनों की बिक्री करते हैं। इस पर पीठ ने कहा, हम इसके लिए आदेश क्यों पारित करें। वाहन निर्माताओं को BS-4 वाहनों की बिक्री की डेडलाइन के बारे में मालूम था। इसके बाद भी बिक्री क्यों की गई। 

लॉकडाउन में कैसे हुई वाहनों की बिक्री 
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई थी कि कोरोना के दौरान हुए देशव्यापी लॉकडाउन में भी वाहनों की इतनी बिक्री कैसे हुई? कहीं ये लेनदेन बैक डेटेड (पुरानी तारीख के) तो नहीं है? सुप्रीम कोर्ट वाहनों की बिक्री के आंकड़ों को देखकर हैरानी जताई थी।

रोक के बाद भी गाड़ी बेचें और ग्रेस पीरियड भी मिले
जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस अब्दुल नजीर और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की पीठ ने कहा, दो रास्ते नहीं हो सकते कि लॉकडाउन के दौरान भी गाड़ी बेची जाए और लॉकडाउन खत्म होने के 10 दिन का ग्रेस पीरियड भी मिले। ये अदालत के आदेश की भावनाओं के खिलाफ होगा। 
 
वापस करने होंगे खरीददार के पैसे
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जिन वाहनों के लिए रकम ले ली गई है लेकिन उन्हें बेचा न गया हो तो वह वाहन डीलर का माना जाएगा और खरीददार के पैसे वापस करने होंगे। 

पीठ ने कहा, हमने लॉकडाउन को देखते हुए 31 मार्च के बाद बिक्री की इजाजत दी थी लेकिन जो आंकड़े हमारे पास आए हैं वह बताते हैं कि लॉकडाउन के दौरान वाहनों की बिक्री बिना लॉकडाउन की अवधि के मुकाबले अधिक हुई। 

FADA द्वारा 7 जुलाई को दायर किए गए हलफनामे में कहा गया है कि 12 मार्च से 31 मार्च तक सदस्य डीलरों ने 61,861 BS-4 वाहनों की बिक्री की है, जबकि गैर-सदस्य डीलरों ने इस दौरान 7,25,321 BS-4 वाहनों की बिक्री की है। इन आंकड़ों के मुताबिक 29, 30 और 31 मार्च को अधिक गाड़ियां बेची गईं। साथ ही हलफनामे में यह भी कहा गया है कि डीलर सदस्यों ने 7,758 वाहनों का जबकि गैर सदस्य डीलरों ने 17,145 गाड़ियों की जानकारी ‘वाहन’ पोर्टल पर नहीं दी है।

इसी बीच यह खबर भी आई थी कि इस दौरान वाहन खरीदने वाले ग्राहकों ने कंपनी की तरफ से सस्ती कीमत में वाहन बेचे जाने के चलते वाहन खरीद तो लिए और बाद में इन वाहनों के रजिस्ट्रेशन के लिए बिचौलियों का सहारा लेने का प्रयास भी किया।

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