वेद प्रताप वैदिक वरिष्ठ पत्रकार व राजनीति विश्लेषक हैं। वे प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया से जुड़े रहे हैं और उसके हिन्दी सेवा 'भाषा' के संस्थापक संपादक रहे हैं।Read More
भारत में जितनी भाषाएं बोली जाती हैं, दुनिया के किसी देश में नहीं बोली जातीं लेकिन कितना दुर्भाग्य है कि औसत पढ़ा-लिखा भारतीय अपनी मातृभाषा के बाद कोई अन्य भाषा सीखना चाहे तो वह बस अंग्रेजी सीखता है. ...
26 अगस्त को रिजर्व बैंक ने भारत सरकार को 1.7 लाख करोड़ रु. देने की घोषणा कर दी और 28 अगस्त को वित्त मंत्नी ने ऐसी घोषणाएं कर दीं, जिनसे भारत में विदेशी विनियोग में आसानी होगी. इसके अलावा गन्ना किसानों को छह हजार करोड़ रु. से ज्यादा की सहायता दे दी और ...
अपने आपको वे जनता का सेवक कहते हैं लेकिन उनका रहन-सहन बड़े-बड़े सेठों और राजा-महाराजाओं से कम नहीं होता. इन नेताओं को पकड़ने का जिम्मा मोदी सरकार ने लिया है तो यह बहुत अच्छी बात है लेकिन सवाल यह है कि सिर्फ कांग्रेसी नेता ही क्यों, भाजपाई भी क्यों नहीं? ...
कश्मीर के सवाल पर यों ही सारी दुनिया भारत के साथ दिखाई पड़ रही है. ऐसी स्थिति में इमरान खान का बौखला जाना स्वाभाविक है. उन्होंने परमाणु-युद्ध पर भी उंगली रख दी और कश्मीर के लिए आखिरी सांस तक लड़ने का ऐलान कर दिया. ...
मोदी को घोर सांप्रदायिक और फासीवादी कहने वाला पाक यह क्यों भूल गया कि उन्हें सऊदी अरब, फिलिस्तीन और अफगानिस्तान भी अपने सर्वोच्च पुरस्कार दे चुके हैं. ...
राजनीतिक दल और उनके छात्न-संगठन एक-दूसरे की टांग-खिंचाई करते रहें, यह स्वाभाविक है लेकिन वे अपने दल-दल में महान स्वतंत्नता सेनानियों को भी घसीट लें, यह उचित नहीं है. यह ठीक है कि सावरकर, सुभाष और भगत सिंह के विचारों और गांधी-नेहरू के विचारों में काफ ...
द्रमुक और कांग्रेस ने दिल्ली में सरकार के विरोध में जो विपक्ष का प्रदर्शन रखा था, उसमें आप, बसपा और राकांपा तो दिखाई ही नहीं पड़ी और तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक ने कश्मीर के सिर्फ मानव अधिकारों के दमन का मुद्दा उठाया. ...
कोई बड़ा आदमी या नेता गिरफ्तार होता है तो जेल में उसे कम से कम ‘बी’ श्रेणी में रखा जाता है. उसे घर से भी ज्यादा आराम जेल में मिलता है. अब से 62 साल पहले (1957 में) मैं पटियाला जेल में रहा और उसके बाद भी कई बार कई जेलों में रहा. ...