वेद प्रताप वैदिक वरिष्ठ पत्रकार व राजनीति विश्लेषक हैं। वे प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया से जुड़े रहे हैं और उसके हिन्दी सेवा 'भाषा' के संस्थापक संपादक रहे हैं।Read More
भारत की राजनीति में अनेक दल ऐसे हैं, जिनका आधार शुद्ध संप्रदायवाद या शुद्ध जातिवाद है. यह राष्ट्रीय समस्या है. इसका समाधान केवल अकेले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या भाजपा नहीं कर सकते हैं. ...
उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और गुजरात हाल में पकड़े गए या चिह्नित किए गए दंगाईयों के घरों और दुकानों को ढहा दिए जाने के मामले ने खूब तूल पकड़ा है. इसे लेकर सवाल भी उठ रहे हैं. ...
इस आर्यावर्त की सीमाएं अराकान (म्यांमार) से खुरासान (ईरान) और त्रिविष्टुप (तिब्बत) से मालदीव तक होनी चाहिए। इनमें मध्य एशिया के पांच गणतंत्रों और मॉरिशस को जोड़ लें तो यह 16 देशों का विशाल संगठन बन सकता है। ...
आपको बता दें कि उत्तर भारत और दक्षिण भारत के करोड़ों ग्रामीण, किसान, मजदूर, महिलाएं, हिंदू-मुस्लिम तीर्थयात्नी और पर्यटक जब एक-दूसरे के प्रदेशों में जाते हैं तो क्या वे अंग्रेजी में संवाद करते हैं? ...
भारत ने बूचा को बूचड़खाना बनाने का जो विरोध किया, वह ठीक है. भारत की आलोचना का शायद रूस पर कोई असर न पड़े लेकिन भारत की तटस्थता को अब दुनिया के राष्ट्र भारत का गूंगापन नहीं समझेंगे. ...
श्रीलंका इस समय बड़ी मुसीबत का सामना कर रहा है. सरकार की नीतियों के खिलाफ सारे देश में रोष फैला हुआ है. महंगाई श्रीलंका में चरम पर है. आलम ये है कि श्रीलंका अराजकता के दौर में प्रवेश करने के मुहाने पर खड़ा है. ...
पिछले साल 4 दिसंबर को नगालैंड के मोन जिले में फौज की गोलीबारी से 14 लोगों की मौत हो गई थी। इस दुर्घटना ने उक्त कानून की वापसी की मांग को काफी तेज कर दिया था। ...