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क्या भारत और अमेरिका 'व्यापार युद्ध' की दहलीज पर खड़े हैं?

By विकास कुमार | Updated: April 13, 2019 15:47 IST

डोनाल्ड ट्रंप अक्सर भारत द्वारा हार्ले-डेविडसन बाइक पर भारी मात्र में लगाये जा रहे आयात शुल्क की आलोचना करते हैं लेकिन भारत सरकार पर इसका कोई असर नहीं पड़ता है. भारत में हर साल मात्र 100 हार्ले-डेविडसन की बिक्री होती है

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ठळक मुद्देभारत ने अमेरिका की उस मांग को भी खारिज कर दिया है जिसमें अमेरिका ने रूस से होने S-400 की डील को रद्द करने का आदेश दिया था. भारत में हर साल मात्र 100 हार्ले-डेविडसन की बिक्री होती है.अमेरिका ने इसकी शिकायत वर्ल्ड ट्रेड आर्गेनाइजेशन में की है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के दिनों में कई बार भारत को हाई टैरिफ नेशन बताया है. उन्होंने कहा है कि अमेरिका भी भारत पर आयात शुल्क बढ़ा कर उसे सबक सिखाएगा. ट्रंप की इस धमकी को हल्के में लेना भारत सरकार के लिए ख़तरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से आयात होने वाली 250 अरब डॉलर की वस्तुओं पर 10 प्रतिशत शुल्क बीते साल से अब तक बढ़ा दिया है. 

चीन ने भी अमेरिका से 110 अरब डॉलर के मूल्य के आयात पर टैरिफ लगाया था. लेकिन इससे चीन की अर्थव्यवस्था की ठीक-ठाक नुकसान उठाना पड़ा है. और अब अमेरिका और चीन बातचीत की मेज पर बैठ चुके हैं. चीन ने अमेरिका की कुछ मांगों को लेकर अपने तेवर ढीले किए हैं. 

मोदी सरकार अमेरिका से डेयरी प्रोडक्ट्स का आयात नहीं करती है और इसका कारण अमेरिकी किसानों द्वारा उत्पादों में जानवरों के अपशिष्ट का इस्तेमाल बताती है, जिससे हिन्दुओं की भावना को ठेंस पहुंच सकती है. वहीं अमेरिका से आयात होने वाले मेडिकल स्टंट्स पर भारी आयात शुल्क लगाया जाता है. जबकि इसका इस्तेमाल देश के एक अमीर वर्ग द्वारा ही किया जाता है. अमेरिका से आयात होने वाले सोलर पैनल पर भी भारी इम्पोर्ट ड्यूटी भारत सरकार द्वारा लगाया जाता है. 

अमेरिका ने WTO में की शिकायत 

अमेरिका ने इसकी शिकायत वर्ल्ड ट्रेड आर्गेनाइजेशन में की है. मोदी सरकार के दौरान विदेशों से आयात होने वाले इलेक्ट्रॉनिक, कृषि की वस्तुएं और टेक्सटाइल पर आयात शुल्क बढ़ा दिया गया है. एग्रीकल्चर और मेडिसिन के आयात में कमी करने के लिए और उनके दाम को नियंत्रित रखने के लिए भी ये किया गया होगा लेकिन इससे विदेशी निर्यातकों को बड़े पैमाने पर नुकसान हो रहा है. 

अमेरिकी मांग को किया खारिज 

भारत ने अमेरिका की उस मांग को भी खारिज कर दिया है जिसमें अमेरिका ने रूस से होने S-400 की डील को रद्द करने का आदेश दिया था. जिसे भारत सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया. पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी के होने के कारण यह रक्षा सौदा भारत के लिए बहुत जरूरी था लेकिन अमेरिका को एक बार विश्वास में लेने से भविष्य में भी किसी प्रकार की अमेरिकी  बाधाओं को रोकने में भारत सफल होता. क्योंकि अमेरिका ने इसी डील को लेकर तुर्की पर तमाम तरह के प्रतिबंध लगाने का एलान किया है.

हार्ले-डेविडसन भी है एक मसला 

डोनाल्ड ट्रंप अक्सर भारत द्वारा हार्ले-डेविडसन बाइक पर भारी मात्र में लगाये जा रहे आयात शुल्क की आलोचना करते हैं लेकिन भारत सरकार पर इसका कोई असर नहीं पड़ता है. भारत में हर साल मात्र 100 हार्ले-डेविडसन की बिक्री होती है और ऐसे में सरकार को आयात शुल्क पर छूट देकर डोनाल्ड ट्रंप को एक छोटी से भेंट दे देनी चाहिए थी लेकिन ऐसा अभी तक नहीं हो पाया है.  

अमेरिका अगर भारत पर टैरिफ लगाता है तो यह कहीं से भी भारत के लिए शुभ संकेत नहीं होगा. ऐसे में हमारे प्रतियोगी बांग्लादेश, वियतनाम और कंबोडिया अमेरिकी बाजार में सस्ते समान पहुंचाकर भारत का विकल्प बन सकते हैं. कोई भी अर्थव्यवस्था बिना विदेशी बाजार और निवेश के फल-फूल नहीं सकती. 

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