न्यूयार्कः अमेरिकी और इजराइली हवाई हमलों के बाद ईरान के कुछ हिस्सों में काले रंग की बारिश होने की खबरें आई हैं। मीडिया की कुछ खबरों में इसे “अम्लीय बारिश” कहा गया है। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर अमेरिकी सैन्य हमलों के पहले दो दिनों में 5.6 अरब डॉलर (लगभग 51,400 करोड़ रुपये) मूल्य के हथियारों का इस्तेमाल किया। वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह आंकड़ा केवल ऑपरेशन के शुरुआती चरण में इस्तेमाल किए गए गोला-बारूद की लागत को दर्शाता है और इसमें क्षेत्र में सैनिकों, विमानों या नौसेना बलों की तैनाती के व्यापक खर्च शामिल नहीं हैं।
अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों के बीच इस अनुमान ने वाशिंगटन में नई चिंताएं पैदा कर दी हैं कि ईरान युद्ध अमेरिकी सेना की तैयारियों को तेजी से कमजोर कर रहा है। सांसदों को चिंता है कि पेंटागन इस तरह के युद्ध को कब तक जारी रख सकता है, जिसका परिणाम दोनों पक्षों के अनुमानों से बिल्कुल अलग निकल रहा है।
ट्रंप प्रशासन ने इस चिंता को खारिज कर दिया है कि ईरान ऑपरेशन अमेरिका के सबसे उन्नत हथियारों के सीमित भंडार को तेजी से खत्म कर रहा है। पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने द पोस्ट को बताया कि रक्षा विभाग के पास "राष्ट्रपति द्वारा चुने गए समय और स्थान पर तथा किसी भी समयसीमा के भीतर किसी भी मिशन को अंजाम देने के लिए आवश्यक सभी संसाधन मौजूद हैं।"
28 फरवरी को शुरू हुए संघर्ष के बाद से अमेरिकी सेना ने उन्नत वायु रक्षा अवरोधक मिसाइलों और टोमाहॉक क्रूज मिसाइलों सहित सैकड़ों महंगे हथियारों का इस्तेमाल किया है। मध्य पूर्व में सैन्य अभियानों की निगरानी करने वाली अमेरिकी केंद्रीय कमान के अनुसार, ईरान में 2,000 से अधिक गोला-बारूद का उपयोग करके 5,000 से अधिक लक्ष्यों को निशाना बनाया गया है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन इस सप्ताह कांग्रेस को एक पूरक रक्षा बजट भेजने की योजना बना रहा है - जो संभावित रूप से अरबों डॉलर का हो सकता है - ताकि ईरान में अपने अभियान को जारी रखा जा सके। लेकिन इस बजट का कई डेमोक्रेट्स द्वारा विरोध किए जाने की संभावना है, जो ट्रंप को ईरान में और अधिक सैन्य कार्रवाई करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
ईरान ने बड़ा खुलासा किया, जब रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के एक वरिष्ठ कमांडर ने कहा कि अब शासन केवल 1,000 किलोग्राम या उससे अधिक क्षमता वाली मिसाइलों का ही इस्तेमाल करेगा। इससे अमेरिकी और इजरायली सेनाओं के साथ युद्ध में एक बड़ा बदलाव आया है।
लेबनानी प्रसारक अल मायादीन ने ब्रिगेडियर जनरल माजिद मूसावी के हवाले से कहा कि अब तक अमेरिकी और इजरायली सैन्य ठिकानों के साथ-साथ दुबई हवाई अड्डे और सऊदी अरब में रास तनुरा तेल रिफाइनरी को निशाना बनाने वाले हमलों की तीव्रता और व्यापकता में अब और वृद्धि होगी।