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ब्राजील की राजधानी में हुए दंगों में बोल्सोनारो की भूमिका की जांच करेगा सुप्रीम कोर्ट

By शिवेंद्र राय | Updated: January 14, 2023 11:55 IST

ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो पर मुकदमा चलाने के लिए ब्राजील की सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति दे दी है। उन पर अपने समर्थकों को भड़का कर राजधानी ब्राजीलिया में हिंसा फैलाने और राष्ट्रपति भवन में घुसकर हंगामा कराने का आरोप है।

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ठळक मुद्देबोल्सोनारो पर भी चलेगा मुकदमाब्राजील की सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरीबोल्सोनारो समर्थकों ने की थी ब्राजीलिया में हिंसा

नई दिल्ली: ब्राजील की राजधानी ब्राजीलिया में बीते रविवार 8 जनवरी 2023 को पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के समर्थकों ने जमकर हिंसा की थी। पूर्व राष्ट्रपति के समर्थक पुलिस बैरिकेड्स तोड़कर राष्ट्रपति भवन में घुस गए थे। अब इस मामले में ब्राजील की सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो को भी जांच के दायरे में शामिल करने की अनुमति दे दी है। 

इस मामले में अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि बोल्सोनारो ने अपने सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे पोस्ट किए थे जिससे उनके समर्थक भड़क गए। हालांकि बाद में इन पोस्ट्स को डीलिट कर दिया गया गया था। अभियोजन पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि  बोल्सोनारो को भी जांच के घेरे में लिया जाए, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

बता दें कि राष्ट्रपति भवन पर हमला करने वाले जायर बोल्सोनारो के समर्थक चाहते थे कि ब्राजीली सेना पूर्व राष्ट्रपति को फिर से सत्ता में लेकर आए और ए चुने गए वामपंथी राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा को पद से हटाए। इस हिंसा और तोड़फोड़ में ब्राजील की पुलिस ने 400 लोगों को गिरफ्तार किया था। साल 2022 में ब्राजील में चुनाव हुए थे और दक्षिणपंथी नेता बोल्सोनारो को हराकर  लूला डी सिल्वा ने जीत हासिल की थी।

इस हार को जायर बोल्सोनारो ने स्वीकार नहीं किया था और आरोप लगाया था कि तकनीकी खराबी के चलते उनकी हार हुई क्योंकि उनके अधिकतर इलेक्ट्रिक वोट खारिज हो गए। बता दें कि ब्राजीलिया में हुई हिंसा को साल 2021 में अमेरिका के कैपिटल हिल में हुई हिंसा से जोड़कर भी देखा जा रहा है। तब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों ने जमकर उत्पात मचाया था।

ब्राजील में वामपंथी गठबंधन के नेता लुइस इनासियो लूला डी सिल्वा को चुनावों में  50.9 प्रतिशत और बोल्सोनारो को 49.2 प्रतिशत वोट मिले थे। लूला डी सिल्वा तीसरी बार ब्राजील के राष्ट्रपति बने हैं।  राष्ट्रपति बनने के बाद लूला डी सिल्वा की सबसे बड़ी चुनौती देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना और अमेजन के जंगलों में बोल्सोनारो के कार्यकाल में हुए अवैध उत्खनन और पेड़ों की कटाई के चलते उत्पन्न हुए भीषण सूखे की स्थिति से देश को उबारना है।

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