Strait of Hormuz: मिडिल ईस्ट में संघर्ष की वजह से भारत में ईंधन की कमी के बीच बड़ी राहत की खबर है। क्योंकि ईरान ने भारतीय जहाजों को होर्मुज मार्ग से सुरक्षित निकलने का रास्ता दे दिया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गुरुवार को कहा कि उसने भारत, पाकिस्तान, इराक, चीन और रूस जैसे 'दोस्त देशों' को होर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है। यह खाड़ी में एक अहम जलमार्ग है, जो ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के बीच चर्चा का मुख्य केंद्र बन गया है।
मुंबई में ईरान के महावाणिज्य दूतावास ने एक पोस्ट में कहा, "ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची: हमने चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान समेत दोस्त देशों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की इजाज़त दे दी है।"
मालूम हो कि ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा होने का खतरा बढ़ गया है, क्योंकि तेल की कीमतें पहले से ही आसमान छू रही हैं और कई देशों से तेल की कमी की खबरें आ रही हैं। जैसे-जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य अमेरिका और ईरान के बीच विवाद का एक अहम मुद्दा बनता जा रहा है, तेहरान द्वारा तनाव खत्म करने के लिए रखी गई मांगों में भी इसका ज़िक्र किया गया है। ये मांगें ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 15-पॉइंट शांति योजना के जवाब में रखी थीं।
कई मांगों में से एक यह भी है कि तेहरान चाहता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता (अपना अधिकार) बनाए रखने के ईरान के अधिकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता और गारंटी मिले। इससे पहले, ट्रंप ने दावा किया था कि वह और 'अयातुल्ला' मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य को नियंत्रित करेंगे; ईरान ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया था।
संयुक्त राष्ट्र समेत दुनिया भर के कई संगठन होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की लगातार अपील कर रहे हैं, क्योंकि दुनिया भर में ईंधन की कीमतें तेज़ी से बढ़ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य का लंबे समय तक बंद रहना, 'दुनिया भर में बुवाई के मौसम के एक बेहद अहम समय' पर तेल, गैस और उर्वरकों की आवाजाही में रुकावट डाल रहा है।
उन्होंने एक्स पर लिखा, "इस पूरे क्षेत्र और उससे बाहर भी, आम नागरिक गंभीर नुकसान झेल रहे हैं और गहरे असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र इस तनाव के बुरे नतीजों को कम करने के लिए लगातार काम कर रहा है। और इन नतीजों को कम करने का सबसे अच्छा तरीका बिल्कुल साफ है: इस तनाव को तुरंत खत्म किया जाए।"
इससे पहले, 25 मार्च को न्यूयॉर्क स्थित ईरानी मिशन ने कहा था कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य से उन जहाजों को गुज़रने की इजाज़त देंगे, जिन्हें उन्होंने "गैर-दुश्मन जहाज" (non-hostile vessels) कहा था।
मिशन ने एक्स पर एक पोस्ट में घोषणा की, "जो जहाज दुश्मन नहीं हैं—जिनमें दूसरे देशों के या उनसे जुड़े जहाज भी शामिल हैं—उन्हें होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने की सुविधा मिल सकती है। शर्त यह है कि वे ईरान के ख़िलाफ़ किसी भी तरह की आक्रामकता में न तो हिस्सा लें और न ही उसका समर्थन करें, और सुरक्षा व बचाव से जुड़े घोषित नियमों का पूरी तरह पालन करें। यह सुविधा उन्हें ईरान के संबंधित अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाने पर ही मिलेगी।"
ईरान की रक्षा परिषद ने घोषणा की है कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य से "दुश्मन न माने जाने वाले जहाजों" का गुजरना अब पूरी तरह से "ईरानी अधिकारियों के साथ पहले से तालमेल बिठाने" पर निर्भर करेगा।