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भारतीय मूल के ऋषि सुनक ने रचा इतिहास, ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री नामित

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: October 24, 2022 21:06 IST

भारतीय मूल के ऋषि सुनक ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री नामित हुए हैं। पीएम रेस में शामिल पेनी मोर्डंट ने अपनी दावेदारी वापस ले ली है। सुनक इन्फोसिस के चेयरमैन रहे भारत के जानेमाने उद्योगपति नारायण मूर्ति के दामाद हैं।

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ठळक मुद्देभारतीय मूल के ऋषि सुनक ने ने रचा इतिहास, विरोधी पेनी मोर्डंट को हराकर बने ब्रिटेन के प्रधानमंत्रीऋषि सुनक इन्फोसिस के चेयरमैन रहे भारत के जानेमाने उद्योगपति नारायण मूर्ति के दामाद हैंबोरिस जॉनसन के इस्तीफा देने के बाद भी सुनक थे पीएम पद की रेस में लेकिन लिज ट्रस से हार गये थे

लंदन: भारतीय मूल के ऋषि सुनक ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बन इतिहास रचेंगे। ठीक दिवाली के दिन पेनी मॉर्डंट के दौड़ से हटने की घोषणा के बाद सुनक को कंजरवेटिव पार्टी का निर्विरोध नेता चुन लिया गया है। पूर्व वित्त मंत्री (42) सुनक को कंजरवेटिव पार्टी के 357 में से आधे से अधिक सांसदों का समर्थन मिला, जबकि उन्हें जीत के लिए कम से कम 100 सांसदों के समर्थन की जरूरत थी।

ब्रिटिश पीएम पद के चुनाव में सुनक को संसद के निचले सदन ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ की नेता पेनी मोर्डंट से कड़ी टक्कर मिली थी। इस संबंध में पेनी के प्रवक्ता ने सोमवार की सुबह में दावा किया था कि पेनी मोर्डंट सोमवार दोपहर तक सभी सहयोगी पार्टियों से बात करके आवश्यक संख्याबल जुटाने का प्रयास कर रही हैं। सुनक इन्फोसिस के सह-संस्थापक और भारत के जानेमाने उद्योगपति नारायण मूर्ति के दामाद हैं।

लेकिन पेनी के पक्ष में महज 25 सांसद थे और वो संख्याबल को जुटाने में कामयाब नहीं हो सकी। जिसके कारण बाजी सीधे ऋषि सुनक के हाथों में चली गई क्योंकि पीएम पद की दावेदारी के लिए तय अंतिम समयसीमा सोमवार स्थानीय समयानुसार दो बजे तक 150 से अधिक सांसदों का समर्थन प्राप्त कर सुनक प्रतिस्पर्धा में एक ठोस बढ़त हासिल कर चुके थे। ब्रिटेन में कुल सासंदों की संख्या 357 है। 

वैसे ऋषि सुनक के पक्ष में पलड़ा उसी समय भारी हो गया था जब पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने पीएम रेस से बाहर होने की घोषणा कर दी। माना जा रहा था कि जॉनसन को अंदेशा था कि वो सुनक की तुलना में कंज़र्वेटिव सदस्यों का आवश्यक समर्थन नहीं जुटा पाएंगे। पूर्व प्रधानमंत्री ने रविवार रात को यह कहते हुए प्रधानमंत्री पद की दौड़ से खुद को अलग कर लिया कि उनके द्वारा प्रधानमंत्री पद पर वापसी के लिए यह सही समय नहीं है।

इससे बाद से ही 42 साल से ऋषि सुनक की दिवाली पर जीत की संभावना काफी हद तक बढ़ गई थी। कंजर्वेटिव पार्टी के कई चर्चित सांसदों ने पूर्व पीएम जॉनसन के खेमे को छोड़ते हुए सुनक का समर्थन किया था, जिसमें पूर्व गृह मंत्री प्रीति पटेल, कैबिनेट मंत्री जेम्स क्लेवर्ली और नदीम जहावी भी शामिल हैं। पटेल भारतीय मूल की पूर्व ब्रिटिश मंत्री हैं, जिन्होंने पिछले महीने लिज ट्रस के प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

उन्होंने कहा कि कंजर्वेटिव पार्टी को सुनक को नेतृत्व करने का मौका देना चाहिए। पटेल ने सुनक को तब समर्थन दिया है जब पार्टी के आधे से अधिक सांसदों ने सार्वजनिक रूप से उन्हें समर्थन दिया था। जिसके बाद से तय हो गया था कि ऋषि सुनक के रूप में ब्रिटेन को पहला गैर-श्वेत प्रधानमंत्री मिलना लगभग तय है।

मालूम हो कि मौजूद पीएम लिज ट्रस ने पार्टी में अपने नेतृत्व के खिलाफ खुले विद्रोह के बाद सिर्फ 45 दिनों के बाद बीते गुरुवार को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफे दे दिया था। लिज ट्रस ने उस चुनाव में सुनक को मात दी थी। ट्रस को 57.4 फीसदी और सुनक को 42.6 फीसदी मत मिले थे। माना जाता है कि बोरिस जॉनसन ने ट्रस के समर्थन में जबरदस्त कैंपेन करके बाजी सुनक के हाथों से छीनकर ट्रस को दे दी थी।

ट्रस के पीएम पद से हटने के बाद नये पीएम पद के लिए शुरू हुए प्रचार अभियान में ऋषि सुनक ने कहा था, "मैं समस्याओं से निपटने के लिए आपसे एक अवसर मांग रहा हूं।" सुनक ने विरासत में मिलने वाले आर्थिक संकट का संदर्भ देते हुए कहा कि वह पिछले सप्ताह ट्रस द्वारा घोषित 'विनाशकारी' कर कटौती वाले बजट का अनुपालन कर सफल नहीं हो सकते हैं।

प्रचार के दौरान सुनक ने यह भी कहा था, "ब्रिटेन महान देश है लेकिन बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा है और इसलिए मैं पार्टी का नेता और आपका अगला प्रधानमंत्री बनने के लिए मैदान में हूं। मैं सरकार के स्तर पर ईमानदारी रखने, पेशेवर रवैया अपनाने और जवाबदेह रहने का वादा करता हूं।"

ब्रिटेन के हैंपशायर में जन्मे ऋषि सुनक के माता-पिता पंजाब के रहने वाले थे। बाद में वे पंजाब से जाकर ब्रिटेन में जाकर बस गए थे। सुनक ने अमेरिका के स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई की है। इसके अलावा सुनक ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से राजनीति, दर्शन और अर्थशास्त्र में भी डिग्री हासिल की है।

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