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नेपालः माओवादी विद्रोह के दौरान 5000 लोगों की हत्या की, पीएम पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने कबूली थी बात, उच्चतम न्यायालय में रिट याचिका दायर, जानें

By भाषा | Updated: March 7, 2023 18:36 IST

उच्चतम न्यायालय के सूत्रों ने कहा कि अधिवक्ता ज्ञानेंद्र आरन और माओवादी विद्रोह के अन्य पीड़ितों ने मंगलवार को याचिका दायर की थी। उन्होंने कहा कि कल्याण बुद्धथोकी की एक अन्य रिट याचिका दर्ज किये जाने की प्रक्रिया से गुजर रही है।

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ठळक मुद्देगिरफ्तार करने का आदेश देने का अनुरोध किया गया है। अदालत प्रशासन को आदेश दिया कि दोनों की रिट याचिकाओं को पंजीकृत किया जाए। शांति समझौते के खिलाफ किसी भी गतिविधि का विरोध करना शामिल है। 

काठमांडूः नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ के खिलाफ मंगलवार को देश के उच्चतम न्यायालय में रिट याचिका दायर की गयी, जिसमें उन्हें कई वर्ष तक चले माओवादी विद्रोह के दौरान 5,000 लोगों की हत्या की जिम्मेदारी कबूल करने पर उनसे पूछताछ करने और उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश देने का अनुरोध किया गया है।

उच्चतम न्यायालय के सूत्रों ने कहा कि अधिवक्ता ज्ञानेंद्र आरन और माओवादी विद्रोह के अन्य पीड़ितों ने मंगलवार को याचिका दायर की थी। उन्होंने कहा कि कल्याण बुद्धथोकी की एक अन्य रिट याचिका दर्ज किये जाने की प्रक्रिया से गुजर रही है।

ज्ञानेंद्र आरन और कल्याण बुद्धथोकी ने उच्चतम न्यायालय में अलग-अलग रिट याचिका दाखिल कर मांग की है कि दशक भर चले माओवादी विद्रोह के दौरान कम से कम 5,000 लोगों की हत्या की जिम्मेदारी कबूल करने पर प्रचंड के खिलाफ जांच की जाए और मुकदमा चलाया जाए।

न्यायमूर्ति ईश्वर खातीवाड़ा और न्यायमूर्ति हरिकृष्ण फुयाल की पीठ ने शुक्रवार को अदालत प्रशासन को आदेश दिया कि दोनों की रिट याचिकाओं को पंजीकृत किया जाए। प्रचंड ने काठमांडू में माघी महोत्सव के दौरान कहा था, ‘‘मैं 17,000 लोगों की हत्या का आरोपी हूं, जो सच नहीं हैं। हालांकि, मैं संघर्ष के दौरान 5,000 लोगों के मारे जाने की जिम्मेदारी लेने को तैयार हूं।’’

उन्होंने कहा कि बाकी 12,000 लोगों को सामंतवादी सरकार ने मारा। विद्रोह की शुरुआत 13 फरवरी, 1996 को हुई थी और 21 नवंबर, 2006 को तत्कालीन सरकार के साथ समग्र शांति समझौते के बाद यह आधिकारिक रूप से समाप्त हुआ। अनुमान है कि दस वर्ष तक चले विद्रोह में करीब 17,000 लोग मारे गये। इस बीच, माओवादी नेताओं ने मंगलवार को एक बैठक कर तीन सूत्री निर्णय लिया, जिसमें शांति समझौते के खिलाफ किसी भी गतिविधि का विरोध करना शामिल है। 

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