Iran-US Conflict: अमेरिकी खुफिया एजेंसी की ओर से एक रिपोर्ट का खुलासा हुआ है जिसमें दावा किया गया है कि पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ट्रंप सरकार के लिए बड़े खतरे की तरह है। ट्रंप ने कई मौकों पर मुनीर की तारीफ भी की है और उन्हें एक 'शानदार' इंसान और एक 'महान लड़ाका' बताया है। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में मदद करने का श्रेय भी मुनीर को दिया है; ये दोनों देश 28 फरवरी से ही एक-दूसरे के साथ टकराव की स्थिति में हैं।
हालांकि, एक अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को चेतावनी दी है कि मुनीर असल में अमेरिका के लिए एक बोझ साबित हो सकते हैं। फॉक्स न्यूज़ डिजिटल की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मुनीर की ईरान के साथ, खासकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के साथ नज़दीकी, अमेरिका और ट्रंप प्रशासन के लिए अच्छी नहीं है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मुनीर के ईरान के शीर्ष अधिकारियों के साथ संबंध रहे हैं, जिनमें मारे गए कुद्स फोर्स के कमांडर कासिम सुलेमानी भी शामिल थे। इन संबंधों की मदद से ही वह ईरान के साथ बातचीत में मदद कर पाए और वॉशिंगटन तथा तेहरान के बीच एक 'बैक-चैनल' मध्यस्थ की भूमिका निभा पाए। ट्रंप ने मुनीर को अपना 'पसंदीदा फील्ड मार्शल' भी कहा है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, उनकी यह दोहरी भूमिका अमेरिका के हितों को नुकसान पहुंचा सकती है।
फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के बिल रोगियो ने फॉक्स न्यूज डिजिटल से कहा, "ट्रंप को पाकिस्तानियों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। अफगानिस्तान में पाकिस्तान हमारा एक 'धोखेबाज सहयोगी' था; वह हमारे दोस्त होने का दिखावा करते हुए तालिबान का समर्थन कर रहा था। मुनीर के IRGC के साथ संबंधों को ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ी 'खतरे की घंटी' माना जाना चाहिए।"
क्या पाकिस्तान ईरान के हितों की रक्षा कर रहा है?
विश्लेषकों और विशेषज्ञों का हवाला देते हुए, रिपोर्ट में आगे चेतावनी दी गई है कि 'धोखेबाज सहयोगी' के तौर पर पाकिस्तान का इतिहास उसे सुरक्षा के लिहाज से एक जोखिम बना सकता है, खासकर तब जब वह ईरान के साथ मिलकर काम कर रहा हो। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि मुनीर ट्रंप के साथ अपने संबंधों का इस्तेमाल शायद सिर्फ ईरान के हितों की रक्षा करने के लिए, या फिर पाकिस्तान को एक ऐसे मध्यस्थ के तौर पर स्थापित करने के लिए कर रहे हैं जिसकी जरूरत तो है, लेकिन जिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
पाकिस्तानी विश्लेषक रजा रूमी ने फॉक्स न्यूज डिजिटल से कहा, "ट्रंप लंबे समय से मज़बूत और निर्णायक नेताओं को पसंद करते आए हैं।" उन्होंने कहा, "मुनीर इस कसौटी पर पूरी तरह खरे उतरते हैं; वह एक ऐसे केंद्रीय सत्ता वाले व्यक्ति हैं जो ठोस नतीजे देने की क्षमता रखते हैं।"
रूमी ने मुनीर को "एक अनुशासित, संस्था-हित को सर्वोपरि रखने वाला नेता बताया, जो व्यवस्था, पदानुक्रम और रणनीतिक स्पष्टता पर विशेष ज़ोर देता है।" उन्होंने कहा, "सार्वजनिक तौर पर करिश्माई छवि वाले अन्य सैन्य अधिकारियों के विपरीत, मुनीर का अंदाज काफी संयमित और शांत है। उनका यह अंदाज किसी तरह के खुले राजनीतिक दिखावे से नहीं, बल्कि उनकी खुफिया कार्यशैली और जमीनी ऑपरेशन के अनुभवों से तय होता है।"
क्या मुनीर पाकिस्तान के सबसे ताकतवर मिलिट्री चीफ हैं?
1968 में एक निम्न-मध्यम-वर्गीय परिवार में जन्मे मुनीर 1986 में पाकिस्तानी सेना में शामिल हुए। मुनीर, जो अभी वॉशिंगटन-तेहरान बातचीत में मदद करने के लिए ईरान में हैं, कर्नल के तौर पर सऊदी अरब में भी सेवा दे चुके हैं और उन्होंने अरबी भी सीखी है। वह अकेले ऐसे सेना प्रमुख हैं जिन्होंने मिलिट्री इंटेलिजेंस और इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) दोनों की कमान संभाली है।
जानकारों के मुताबिक, मुनीर—जिन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ भारत की सफलता के बावजूद खुद को 'फील्ड मार्शल' के तौर पर प्रमोट किया था—परवेज मुशर्रफ के बाद देश के सबसे ताकतवर मिलिट्री चीफ हैं। उनका तर्क है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ "भले ही अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में अहम चेहरों के तौर पर नजर आते हों, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि असल में सारे फैसले आसिम मुनीर ही ले रहे हैं।"
लोवी इंस्टीट्यूट के रिसर्च फेलो चार्ल्स लायन्स-जोन्स ने एसोसिएटेड प्रेस (AP) को बताया, "फील्ड मार्शल मुनीर परवेज मुशर्रफ के बाद यकीनन पाकिस्तान के सबसे ताकतवर नेता हैं; उन्हें सेना में नियुक्तियों, नागरिक सरकार के फैसलों और सेना के विशाल कारोबारी साम्राज्य पर पूरी तरह से अधिकार हासिल है।"