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युद्ध एवं प्रतिस्पर्धा के बजाय शांति, गठजोड़ एवं सहयोग होना चाहिए अंतरिक्ष अन्वेषण का लक्ष्य

By भाषा | Updated: October 12, 2021 14:53 IST

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कुआन-वेई चेन, राम एस जाखू, मैक्गिल यूनिवर्सिटी और स्टीफन फ्रीलैंड, वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी

मोंट्रियल (कनाडा)/पेनरिथ (ऑस्ट्रेलिया), 12 अक्टूबर (द कन्वरसेशन) सोवियत संघ द्वारा 1957 में किया गया स्पूतनिक 1 का प्रक्षेपण अंतरिक्ष में मानवता का पहला महत्वपूर्ण प्रयास था। विज्ञान की कथाओं के अचानक वैज्ञानिक हकीकत के तौर पर सामने आने के कारण हमारी कल्पना ने मानवीय प्रयासों के लिए अंतरिक्ष की आश्चर्यजनक दुनिया में उड़ान भरनी शुरू कर दी थी।

अंतरिक्ष में हथियारों की दौड़?

उस समय शीत युद्ध की मानसिकता ने अंतरिक्ष के क्षेत्र के बारे में संदेह एवं भय पैदा किया और इसी के कारण अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और अनुप्रयोगों की सैन्य जड़ें पैदा हुईं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी ने कहा था, ‘‘यदि सोवियत संघ अंतरिक्ष पर नियंत्रण कर लेता है, तो वह पृथ्वी पर भी कब्जा कर सकता है, जैसा कि बीती सदियों में उन देशों का महाद्वीपों पर प्रभुत्व था, जिनका समुद्रों पर कब्जा था।’’

सोवियत संघ और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष के क्षेत्र में श्रेष्ठता की भीषण प्रतिस्पर्धा ने इस क्षेत्र में होड़ को जन्म दिया। स्पूतनिक 1 के बाद अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और अनुप्रयोगों में तेजी से विस्तार हुआ। सात दशकों के अंतरिक्ष अन्वेषण और उपयोग ने दुनिया के संचार के तरीके में क्रांति ला दी है और हवाई क्षेत्र, जमीन और समुद्र में नौवहन को विस्तार दिया है।

अंतरिक्ष विज्ञान ने हमें मौसम की प्रणालियों पर नजर रखने, भूमि के उपयोग का विस्तार करने और हमारे अपने ग्रह को और बेहतर तरीके से समझने तथा ब्रह्मांड में हमारे स्थान को समझने में सक्षम बनाया है।

ऐसा प्रतीत होता है कि दूसरों की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं का मुकाबला करने और अंतरिक्ष में श्रेष्ठता हासिल करने की इच्छा ने फिर से जन्म लिया है। अंतरिक्ष गतिविधियों के प्रसार और व्यावसायीकरण के बावजूद और हर देश की आर्थिक, सामाजिक और वैज्ञानिक प्रगति के एक अनिवार्य हिस्से के रूप में अंतरिक्ष की मान्यता के बावजूद, दुनिया भर में अंतरिक्ष क्षमताओं को लेकर एक खतरनाक मुकाबला चल रहा है।

अंतरिक्ष में भीड़

अब असैन्य नागरिक भी अंतरिक्ष मिशनों में जा सकते हैं, ऐसे में सैन्य रणनीतिकार चेतावनी दे रहे हैं कि अंतरिक्ष में प्रतिस्पर्धा और भीड़भाड़ बाह्य अंतरिक्ष में संघर्ष पैदा करेगी।

पृथ्वी पर बढ़ता तनाव इस जोखिम को बढ़ाता है कि मानव जाति अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक अकल्पनीय युद्ध में प्रवेश कर सकती है, जिससे अर्थव्यवस्थाएं, महत्वपूर्ण आम नागरिक और वे सैन्य बुनियादी ढांचे नष्ट हो सकते हैं, जो अंतरिक्ष पर अत्यधिक निर्भर हो गए हैं।

रेड क्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति ने अप्रैल में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सचेत किया था कि बाह्य अंतरिक्ष में हथियारों का उपयोग करने से मानवता को बहुत नुकसान हो सकता है।

यदि अंतरिक्ष में युद्ध शुरू होता है, तो इसका दीर्घकालीन प्रभाव पड़ सकता है।

उपनिवेशवाद को रोकना

इस सबके बावजूद अंतरिक्ष युद्ध अपरिहार्य नहीं है। अंतरिक्ष के नया ‘‘युद्धक्षेत्र’’ होने की धारणा छह दशक पुरानी इस आपसी समझ के विपरीत है कि अंतरिक्ष अंतरराष्ट्रीय कानून द्वारा शासित एक साझा क्षेत्र है, जहां सभी देशों के लाभ के लिए इसका अन्वेषण और इस्तेमाल वैश्विक हितों को साधता है।

अंतरिक्ष पर केंद्रित संयुक्त राष्ट्र महासभा के पहले प्रस्ताव में ‘‘इस नए क्षेत्र में वर्तमान राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के विस्तार से बचने’’ की इच्छा को मान्यता दी गई थी।

स्पूतनिक 1 के प्रक्षेपण एक दशक बाद, 1967 में शीत युद्ध की चरम सीमा के दौरान राजनयिक बाह्य अंतरिक्ष संधि करने के लिए एक साथ आए थे। आज, 111 देश अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की इस अभूतपूर्व कोशिश में शामिल हैं, जो बाहरी अंतरिक्ष में ‘‘शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए’’ अन्वेषण करने में संपूर्ण मानवता के सामान्य हित को रेखांकित करती है। यह संधि इस बात की भी पुष्टि करती है कि सभी देश ‘‘समानता के आधार पर और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार’’ अंतरिक्ष में अन्वेषण करने और इसका इस्तेमाल करने के लिए स्वतंत्र हैं।

शांति की ओर कदम

संयुक्त राष्ट्र महासभा 1980 के दशक के बाद से हर साल बाह्य अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ रोकने पर एक प्रस्ताव (पीएआरओएस) पारित करती है। इस संबंधी हालिया प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय समुदाय को याद दिलाता है कि ‘‘हथियारों की प्रतिस्पर्धा को रोकना कितना महत्वपूर्ण एवं आवश्यक’’ है ।

बाहरी अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ की रोकथाम महत्वपूर्ण है। बाह्य अंतरिक्ष संधि और संयुक्त राष्ट्र में बहुपक्षीय वार्ताएं अंतरिक्ष को संघर्ष से दूर रखने की कोशिश करती आई हैं। इस बात का कोई कारण नजर नहीं आता कि शांति के लिए तैयार किया गया यह व्यापक कानूनी और संस्थागत ढांचा हमें अंतरिक्ष में गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार से बचा नहीं सकता।

सरकारों, उद्योग हितधारकों, समाज और युवा पीढ़ी सभी को अंतरिक्ष में मानवता के लाभों और सामान्य हितों को बढ़ावा देने में भूमिका निभानी होगी और अंतरिक्ष में जाने वाले पहले मनुष्य यूरी गागरिन के इस कथन से प्रेरणा लेनी होगी कि ‘‘अंतरिक्ष में सभी के लिए स्थान है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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