लाइव न्यूज़ :

नाक और मुंह की झिल्लियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कोविड-19 के प्रसार रोकने में अहम: वैज्ञानिक

By भाषा | Updated: November 30, 2020 14:56 IST

Open in App

न्यूयॉर्क, 30 नवंबर वैज्ञानिकों का मानना है कि नाक और मुंह के अंदर मौजूद झिल्लियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कोविड-19 का प्रसार रोकने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। साथ ही, उन्होंने हल्के या मध्यम लक्षण वाले कोरोना वायरस संक्रमितों में इस रोग प्रतिरोधक क्षमता की अहमियत का मूल्यांकन के लिए और अध्ययन की जरूरत पर जोर दिया।

जर्नल ‘‘फ्रंटियर इन इम्यूनोलॉजी’’ में प्रकाशित विश्लेषण में रेखांकित किया गया है कि म्यूकसल (मुंह और नाक की झिल्लियां) रोग प्रतिरोधक प्रणाली इस रोग प्रतिरोधक क्षमता का सबसे बड़ा हिस्सा है लेकिन अबतक कोविड-19 को लेकर किए गए अध्ययन में इसपर अधिक ध्यान केंद्रित नहीं किया गया है।

अमेरिका स्थित बफेलो यूनिवर्सिटी में कार्यरत और अनुसंधान पत्र के सह लेखक माइकल डब्ल्यू रशेल ने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि सार्स-कोव-2 वायरस से शुरुआत में मुकाबला करने वाली इन झिल्लियों को नजर अंदाज करना गंभीर खामी है।’’

रशेल ने कहा, ‘‘यह स्पष्ट है कि प्रणालीगत इम्जूनोग्लोब्युलिन जी एंटीबॉडी - सबसे अधिक पाई जाने वाली एंटीबॉडी- महत्वपूर्ण है, हम इससे इनकार नहीं करते लेकिन यह अकेले प्रभावी नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि शुरुआत में कोविड-19 पर अनुसंधान करने वालों का ध्यान गंभीर मरीजों पर था और यह स्थिति श्वासन प्रणाली के निचले हिस्से खासतौर पर फेफड़ों तक वायरस के पहुंचने से होती है।

वैज्ञानिकों ने कहा कि फेफड़े में कोशिकीय रोग प्रतिरोधक प्रतिक्रिया संक्रमण से लड़ने की जगह शोथ बढ़ा देती है।

उन्होंने ने कहा, ‘‘लेकिन श्वसन प्रणाली के ऊपरी हिस्से, जिसमें नाक, टॉनसिल आदि आते हैं, वे शुरुआती स्थान होते हैं जिनके संपर्क में वायरस आता और उनकी रोग प्रतिरोधक प्रतिक्रिया विशेष उद्देश्य के साथ होती है।’’

अनुसंधानकर्ताओं का मानना है कि बिना लक्षण वाले मरीजों से कोविड-19 के अधिक प्रसार की वजह से झिल्लियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता महत्वपूर्ण है।

रशेल ने कहा, ‘‘यह तथ्य है कि कई संक्रमित बिना लक्षण के होते हैं, बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिनमें मध्यम या हल्के लक्षण सामने आते हैं। यह संकेत करता है कि कुछ कहीं है जो वायरस को नियंत्रित करने में अच्छा काम करता है।’’

वैज्ञानिकों का कहना है कि झिल्लियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर ध्यान केंद्रित करने से नाक के जरिये दिए जाने वाले टीका का विकास संभव हो सकता है जिन्हें जमा करना, परिवहन करना और देना अधिक आसान है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Open in App

संबंधित खबरें

भारतउद्धव ठाकरे गुट के 9 में से 8 सांसदों के साथ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ गुप्त बैठक?, शिवसेना के स्वामित्व और चिह्न पर 24 अप्रैल को फैसला?

भारतनीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली, 14 फरवरी को देंगे बिहार के सीएम पद से इस्तीफा?

पूजा पाठतैयार हो जाइए! इस तारीख से शुरू होगा अमरनाथ यात्रा रजिस्ट्रेशन, ऐसे करें ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन

क्राइम अलर्ट'कुंभ की वायरल गर्ल मोनालिसा नाबालिग है': पति फरमान खान के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज

कारोबारकिसान को 9000, महिला को 3000 और ग्रेजुएट युवा को 3,000 रुपये?, भाजपा का 'संकल्प पत्र' जारी, अमित शाह ने खेला दांव, वीडियो

विश्व अधिक खबरें

विश्वUS-ईरान वार्ता से पहले पाकिस्तान में अलर्ट, इस्लामाबाद में 'रेड जोन' सील किया; सब कुछ बंद

विश्वभारत-US संबंधों का नया अध्याय; मार्को रूबियो का भारत दौरा, क्वाड और क्रिटिकल मिनरल्स पर जोर

विश्वIran-Israel War: क्या इस्लामाबाद वार्ता बचा पाएगी शांति? लेबनान हमले और कीर स्टार्मर के खाड़ी दौरे से जुड़ी हर अपडेट, जानें यहां

विश्वअविश्वास के घने कोहरे में विश्वास की खोज !

विश्वअमेरिका-ईरान युद्धविरामः डोनाल्ड ट्रंप को नहीं पाक पीएम शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को नोबेल शांति पुरस्कार दो?, पाकिस्तान ने मांग उठाई?