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चीन ने अपने रोवर को सफलतापूर्वक मंगल ग्रह पर उतारा

By भाषा | Updated: May 15, 2021 19:27 IST

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(के जे एम वर्मा)

बीजिंग, 15 मई चीन ने शनिवार को अपने पहले रोवर को सफलतापूर्वक मंगल ग्रह पर उतार दिया और इसके साथ ही वह इस तरह की सफलता अर्जित करनेवाला दुनिया का दूसरा देश बन गया है।

यात्रा के दौरान ‘‘नौ मिनट तक भय उत्पन्न करनेवाली’’ स्थिति के बाद चीनी रोवर सफलतापूर्वक लाल ग्रह पर उतर गया।

सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बताया कि रोवर ‘झुरोंग’ का नाम चीन की पौराणिक कथा में वर्णित अग्नि के देवता के नाम पर रखा गया है। यह रोवर मंगल ग्रह पर ‘यूटोपिया प्लैनिशिया’ में पहले से निर्धारित क्षेत्र में उतरा।

मंगल ग्रह पर पहुंचने वाले रोवर का वजन करीब 240 किलोग्राम है और इसमें छह पहिए तथा चार सौर पैनल लगे हैं। यह प्रति घंटे 200 मीटर तक घूम सकता है।

इसमें कैमरा, रडार और मौसम संबंधी मापक यंत्र जैसे वैज्ञानिक उपकरण लगे हैं। बाद में, इसे लैंडर की मदद से मंगल पर जीवन के साक्ष्यों की तलाश में तीन महीने के मिशन पर लगाया जाएगा।

पिछले साल 23 जुलाई 2020 को रवाना हुआ चीन का अंतरिक्ष यान ‘तियानवेन-1’ अपने साथ एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर लेकर गया था। सौर मंडल में और अधिक अन्वेषण के मकसद से एक मिशन में ही ऑर्बिटिंग (कक्षा की परिक्रमा), लैंडिंग और रोविंग पूरा करने के उद्देश्य से मंगल ग्रह पर पहुंचने की दिशा में यह चीन का पहला कदम है।

चाइना नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रशन (सीएनएसए) ने एक बयान में कहा कि यात्रा के दौरान रोवर ‘‘नौ मिनट की भय उत्पन्न करनेवाली स्थिति’’ के बाद शनिवार को मंगल ग्रह पर सफलतापूर्वक उतर गया।

रोवर को लेकर लैंडर चीन के स्थानीय समयानुसार सुबह 7:18 बजे मंगल के उत्तरी गोलार्ध में विशाल समतल मैदान, यूटोपिया प्लैनिशिया के पूर्व निधार्रित दक्षिणी क्षेत्र में उतरा।

सीएनएस के प्रमुख झांग केजियान ने कहा, ‘‘मंगल पर उतरने के साथ ही तियानवेन-1 मिशन को पूर्ण सफलता मिल गई है।’’

मंगल ग्रह पर उतरने में अब तक अमेरिका को ही महारत हासिल थी, लेकिन अब चीन भी मंगल ग्रह पर रोवर के साथ पहुंचने वाला दूसरा देश बन गया है।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का ‘परसीवरेंस’ रोवर करीब सात महीने की यात्रा के बाद 18 फरवरी को मंगल ग्रह पर पहुंचा था।

इससे पहले अमेरिका, रूस, यूरोपीय संघ तथा भारत को मंगल ग्रह पर अंतरिक्ष यान भेजने में कामयाबी मिल चुकी है।

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने मंगल ग्रह पर चीन का पहला रोवर सफलतापूर्वक उतारने के लिए सीएनएसए को बधाई दी।

इस अंतरिक्ष यान ने करीब सात महीने की यात्रा के बाद फरवरी में मंगल ग्रह की कक्षा में प्रवेश किया था और ग्रह पर उतरने के लिए संभावित स्थानों की पहचान करने में दो महीने से ज्यादा वक्त बिताया।

शिन्हुआ ने बताया कि शनिवार तड़के अंतरिक्ष यान ने अपनी निर्धारित कक्षा से नीचे उतरना शुरू किया और लैंडर तथा रोवर ऑर्बिटर से अलग हो गए। करीब तीन घंटे की यात्रा के बाद एंट्री कैप्सूल ने 125 किलोमीटर की ऊंचाई पर मंगल ग्रह के वातावरण में प्रवेश किया। मंगल ग्रह की सतह से करीब 100 मीटर की ऊंचाई पर उसे बाधाओं का सामना करना पड़ा लेकिन उसने बाधाओं से बचते हुए एक सतही इलाके को चुना और धीरे-धीरे नीचे उतरने लगा।

सीएनएसए के ‘लूनर एक्स्प्लोरेशन एंड स्पेस प्रोग्रास सेंटर’ के अधिकारी गेंग यान ने कहा, ‘‘हर कदम पर केवल एक मौका था और अगर कोई भी खामी आती तो लैंडिंग विफल हो जाती।’’

मंगल मिशन पर शिन्हुआ ने एक टिप्पणी में कहा कि चीन का उद्देश्य अंतरिक्ष में नेतृत्व प्रतिस्पर्धा का नहीं है।

नासा में विज्ञान मिशन निदेशालय के सह-प्रशासक थॉमस जुरबुचेन ने चीन को इस उपलब्धि पर बधाई दी।

मंगल पर अन्वेषण के लिए 1960 के दशक से 40 से अधिक मिशन भेजे जा चुके हैं लेकिन सफलता लगभग आधे अभियानों में ही मिल पाई है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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