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फिलीपीन में प्रमुख विद्रोही कमांडर को सेना ने किया ढेर

By भाषा | Updated: November 1, 2021 17:32 IST

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मनीला, एक नवम्बर (एपी) फिलीपीन की सेना ने एशिया के सबसे लंबे समय तक चलने वाले विद्रोहों से जुड़े एक प्रमुख कमांडर को मार गिराया है। सेना ने जहां इसे देश के सुदूर दक्षिणी क्षेत्र में एक साहसिक छापेमारी अभियान बताया है, वहीं गुरिल्ला नेताओं ने इसे घात लगाकर किया गया हमला करार दिया है।

जॉर्ज मैडलोस कई दशक तक दक्षिणी फिलीपीन के पहाड़ी इलाकों में कम्युनिस्ट लड़ाकों का एक प्रमुख व्यक्ति और प्रवक्ता था।

रक्षा सचिव डेल्फ़िन लोरेंजाना ने सोमवार को कहा कि सरकारी बलों ने शनिवार को बुकिडनॅन प्रांत में मैडलोस को मार गिराया। उन्होंने लड़ाके की मौत को पहले से ही पस्त न्यू पीपुल्स आर्मी गुरिल्ला समूह के लिए एक बड़ा झटका बताया है।

क्षेत्रीय सैन्य कमांडर मेजर जनरल रोमियो ब्राउनर ने कहा कि ग्रामीणों ने सेना को लगभग 30 विद्रोहियों की मौजूदगी के बारे में सूचना दी थी, जो इम्पासुग-ओंग शहर के पास एक दूर-दराज गांव में निवासियों के साथ चर्चा कर रहे थे।

जमीनी हमले का आदेश देने से पहले, विद्रोही ठिकानों पर रॉकेट दागने के लिए लड़ाकू विमानों को तैनात किया गया था। सेना ने कहा कि उन्हें बारुदी सुरंगों द्वारा संरक्षित किया गया था।

ब्राउनर ने कहा कि एक घंटे से भी कम समय तक चली गोलीबारी के बाद, 72 वर्षीय मैडलोस और उसके चिकित्सा सहयोगी के शव, उनकी राइफल और गोला-बारूद बरामद किया गया है।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘जिन निर्दोष नागरिकों और उनके समुदायों को इसने कई दशकों तक आतंकित किया है, उन्हें न्याय मिला है।’’

हालांकि, गुरिल्लाओं ने समूह से जुड़ी एक वेबसाइट पर पोस्ट किए गए एक बयान में कहा है कि लंबे समय से बीमार मैडलोस विद्रोहियों के दल के ही एक चिकित्सक के साथ इलाज के लिए मोटरसाइकिल से जा रहा था, तभी सरकारी बलों ने उसे मार गिराया।

विद्रोहियों ने कहा कि मैडलोस और उनके साथी दोनों निहत्थे थे। उन्होंने दावा किया कि कोई सैन्य हवाई हमला या गोलीबारी नहीं हुई।

सैन्य कमांडरों ने मैडलोस और उसकी सेनाओं को सुरक्षा बलों के खिलाफ घातक हमलों के साथ-साथ खनन कंपनियों, अनानास और अन्य कृषि बागानों से धन ऐंठने का दोषी ठहराया है। गुरिल्ला धन वसूली को ’क्रांतिकारी कर’ कहते हैं।

मैडलोस एक छात्र कार्यकर्ता था, जिसने 1972 में तत्कालीन तानाशाह फर्डिनेंड मार्कोस द्वारा मार्शल लॉ घोषित किए जाने के बाद विश्वविद्यालय छोड़ दिया था और भूमिगत हो गया था।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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