शेंदुरसनी ग्राम पंचायत की आबादी 1300 और 3 माह में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बने 27,398?, सीआरएस सॉफ्टवेयर रिकॉर्ड में अनियमितता, एसआईटी का गठन
By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 6, 2026 11:23 IST2026-01-06T11:22:00+5:302026-01-06T11:23:13+5:30
Shendursani Gram Panchayat- अधिकारी ने सोमवार को बताया कि प्रारंभिक जानकारी में पंजीकरण आंकड़ों में अत्यंत असामान्य और चिंताजनक असंतुलन सामने आया है।

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मुंबईः महाराष्ट्र सरकार ने सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) सॉफ्टवेयर रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। अधिकारियों के अनुसार, करीब 1,300 की आबादी वाले एक गांव में लगभग 27,000 जन्म और मृत्यु पंजीकरण दर्ज किए जाने का मामला सामने आया है।
शेंदुरसनी ग्राम पंचायत की आबादी जहां लगभग 1,300 है, वहीं सीआरएस के माध्यम से जारी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों की संख्या करीब 27,000 बताई गई है। यह आंकड़ा गांव की जनसांख्यिकीय स्थिति से पूरी तरह बेमेल है और इससे डिजिटल पंजीकरण मंच के दुरुपयोग, छेड़छाड़ या धोखाधड़ी की प्रबल आशंका उत्पन्न हुई है।
एक अधिकारी ने सोमवार को बताया कि प्रारंभिक जानकारी में पंजीकरण आंकड़ों में अत्यंत असामान्य और चिंताजनक असंतुलन सामने आया है। अधिकारियों ने दिसंबर में बताया था कि केवल तीन महीनों में गांव में 27,398 ‘विलंबित जन्म पंजीकरण’ दर्ज किए गए। इस मामले में यवतमाल शहर थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। अधिकारी के अनुसार, फिलहाल जांच का नेतृत्व यवतमाल के उप-विभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) कर रहे हैं।
मामले की गंभीरता और संभावित प्रभावों को देखते हुए गृह विभाग ने महाराष्ट्र साइबर के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) की निगरानी में एसआईटी के माध्यम से व्यापक जांच कराने का निर्णय लिया है। एसआईटी में उप निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं और जिला स्वास्थ्य अधिकारी को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
अधिकारी ने बताया कि एसआईटी इस सप्ताह के अंत में ग्राम पंचायत का दौरा कर मौके पर सत्यापन करेगी, कार्यप्रणालियों की जांच करेगी और उन प्रणालीगत व प्रक्रियात्मक खामियों की पहचान करेगी, जिनका दुरुपयोग किया गया हो सकता है। अधिकारी ने कहा कि एसआईटी की हालिया बैठक में प्रमुख अवलोकन दर्ज किए गए और जांच अधिकारी को जांच के दौरान कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक पर्यवेक्षणीय निर्देश जारी किए गए।