लाइव न्यूज़ :

Covid-19 के साथ भूख, बेरोजगारी और मजबूरी भी ले रही Migrant Labours की जान

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: May 18, 2020 09:25 IST

Open in App
कोरोना काल में लोग केवल बीमारी से ही दम नहीं तोड़ रहे हैं. भूख, बेरोजगारी, घर वापसी की मजबूरी और सरकारी उदासीनता की वजह से भी लॉकडाउन के पिछले 53 दिन में हर दिन औसत तीन से पांच व्यक्ति ने सड़कों-रेल ट्रैक पर सरकारी व्यवस्था को मुंह चिढ़ाते हुए अपने प्राणों की बलि दी है. यह लोगों के सपनों की अपनों की मौत है. कड़वी हकीकत से रुबरु होने के लिए चंद उदाहरण ही काफी होंगे.
टॅग्स :कोरोना वायरसप्रवासी मजदूर
Open in App

संबंधित खबरें

स्वास्थ्यCOVID-19 infection: रक्त वाहिकाओं 5 साल तक बूढ़ी हो सकती हैं?, रिसर्च में खुलासा, 16 देशों के 2400 लोगों पर अध्ययन

भारत'बादल बम' के बाद अब 'वाटर बम': लेह में बादल फटने से लेकर कोविड वायरस तक चीन पर शंका, अब ब्रह्मपुत्र पर बांध क्या नया हथियार?

स्वास्थ्यसीएम सिद्धरमैया बोले-हृदयाघात से मौतें कोविड टीकाकरण, कर्नाटक विशेषज्ञ पैनल ने कहा-कोई संबंध नहीं, बकवास बात

स्वास्थ्यमहाराष्ट्र में कोरोना वायरस के 12 मामले, 24 घंटों में वायरस से संक्रमित 1 व्यक्ति की मौत

स्वास्थ्यअफवाह मत फैलाओ, हार्ट अटैक और कोविड टीके में कोई संबंध नहीं?, एम्स-दिल्ली अध्ययन में दावा, जानें डॉक्टरों की राय

भारत अधिक खबरें

भारतवाराणसी का रोम-रोम हुआ रोमांचित, दर्शकों ने देखा कैसा था सम्राट विक्रमादित्य का सुशासन, देखें Photos

भारतराष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टीः उत्तरार्द्ध में उत्तराधिकार के लिए संघर्ष

भारतदिल्ली और उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में महसूस हुए भूकंप के झटके, अफगानिस्तान में आया भूकंप

भारतकेंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ग्रीनविच मीन टाईम को महाकाल स्टेंडर्ड टाईम में बदलने पर दिया जोर

भारतदलित समुदाय के 22 फीसदी वोट पर जमीन अखिलेश की निगाह , 14 अप्रैल पर अंबेडकर जयंती पर गांव-गांव में करेगी कार्यक्रम