पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना पूर्वी एशिया का देश है जिसे चीन के नाम से जाना जाता है। दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश में कम्युनिस्ट शासन लागू है। इसकी सीमाएं भारत-पाकिस्तान और नेपाल से लगती है। सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य चीन दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक देश भी है। अमेरिका के बाद दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश है। Read More
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2021-22 में अमेरिका और भारत का द्वपिक्षीय व्यापार बढ़कर 119.42 अरब डॉलर पर पहुंच गया। 2020-21 में यह आंकड़ा 80.51 अरब डॉलर का था। 2021-22 में भारत-चीन द्वपिक्षीय व्यापार 115.42 अरब डॉलर रहा, जो 2020-21 में 86.4 ...
प्रस्तावित ब्रिटिश मसौदा प्रेस वक्तव्य में ‘‘संकट के शांतिपूर्ण समाधान में सहयोग’’ के लिए आसियान की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया गया और म्यांमार के लोगों के हित में परिषद के सदस्यों के उस आह्वान को दोहराया गया जिसमें ‘‘सभी संबंधित पक्षों के साथ’’ बातच ...
क्वाड समूह और अब उससे जुड़ा हिंद-प्रशांत आर्थिक मंच ऐसे दौर में बना है जबकि एक ओर कोविड महामारी से उत्पन्न स्थितियों से क्वाड सदस्यों तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों की अर्थव्यवस्था के सामने चुनौतियां पैदा हुई हैं, वहीं दूसरी ओर चीन इस क्षेत्र में ...
जानकारी के मुताबिक, विश्वविद्यालय के नोटिस के मुताबिक, ऑनलाइन तैराकी परीक्षा को पूरा करने के लिए, छात्रों को परिसर नेटवर्क पर लॉग इन करना था और एक ऑनलाइन प्रश्नावली का उत्तर देना था। ...
चेन्नई के 16 साल के प्रज्ञानंद ने वापसी करते हुए पहला सेट गंवाने के बाद दूसरा सेट जीत लिया लेकिन इसके बाद वह दो बाजी के ब्लिट्ज टाईब्रेकर में हार गए। पहला सेट 1.5-2.5 से गंवाने वाले भारतीय ग्रैंडमास्टर ने वापसी करते हुए दूसरा सेट 2.5-1.5 से जीता जिसक ...
दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में दुनिया भर में मंदी के जोखिम को भी हरी झंडी दिखाई गई है, जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप सहित प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में एक पीढ़ी में मुद्रास्फीति के उच्चतम स्तर पर चिंता है। ...
पाकिस्तान के संग संकट यह है कि उसके कई युवा इंजीनियर अमेरिका में आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त पाए गए हैं। इसलिए अमेरिका दोनों ही देशों के लोगों पर कम भरोसा करता है। ऐसे में अमेरिका को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में चीन के उत्पादों को वैश्विक स्तर प ...
बाइडेन प्रशासन को इस लक्ष्य में कहां तक सफलता मिलेगी, यह इस पर निर्भर करेगा कि वह इन सदस्य-राष्ट्रों को कितनी छूट देगा। अमेरिका ने चीन से सीखा है कि अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए आर्थिक अस्त्र ही सबसे ज्यादा कारगर है लेकिन अमेरिका की समस्या यह है कि वह ...