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मंत्र जाप की माला में 108 मोती ही क्यों होते हैं? जानें क्या कहता है धर्म और ज्योतिष शास्त्र

By गुलनीत कौर | Updated: April 28, 2019 11:29 IST

शास्त्रों के अनुसार बिना माला के मंत्र जाप किया जाना फलित नहीं माना जाता है। किन्तु यदि किसी के पास माला ना हो तब भी वह पूर्ण श्रद्धा से मंत्र जाप करके उसका फल पा सकता है। बशर्ते यह मंत्र माला के मोतियों की संख्या के बराबर जपा जाए। यानी 108 बार।

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हिन्दू धर्म में मंत्र जाप को बेहद शक्तिशाली धार्मिक विधान माना जाता है। पूजा-हवन के दौरान मंत्र जाप के अलावा साधक स्वयं की इच्छा पूर्ति के लिए भी विभिन्न देवी-देवताओं के मंत्र जाप करते हैं। प्रत्येक देवी-देवता का एक बीज मंत्र होता है जिसे करने से वे प्रसन्न होते हैं। शास्त्रों के अनुसार मंत्र जाप करते समय कुछ नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है लेकिन सबसे अहम है कि मंत्र जाप कम से कम एक माला यानी 108 बार किया जाए। 

मंत्र जाप की माला में 108 मोती क्यों होते हैं?

यही कारण है कि मंत्र जाप की माला में 108 मोती या दाने होते हैं। इन दानों को 108 बार फेरते हुए मंत्र जाप की एक माला पूर्ण होती है। कुछ मंत्रों के लिए एक माला और कुछ के लिए एक से अधिक माला जाप करने का भी विधान है। किन्तु क्या आपने कभी सोचा है कि मंत्र जाप की माला में 108 संख्या हे क्यों होती है? मंत्र जाप की माला में 108 मोती ही क्यों होते हैं? इससे कम या अधिक क्यों नहीं होते?

108 बार मंत्र जाप का महत्व

शास्त्रों के अनुसार बिना माला के मंत्र जाप किया जाना फलित नहीं माना जाता है। किन्तु यदि किसी के पास माला ना हो तब भी वह पूर्ण श्रद्धा से मंत्र जाप करके उसका फल पा सकता है। बशर्ते यह मंत्र माला के मोतियों की संख्या के बराबर जपा जाए। यानी 108 बार। शास्त्रों में 108 अंक को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। इसके पीछे विभिन्न मान्यताएं एवं विश्वास हैं। 

सूर्य की कलाओं से जुड़ा है 108 अंक

सौरमंडल में सूर्य को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। देवताओं में भी भगवान भास्कर यानी सूर्य देव को उच्च देवताओं की श्रेणी में माना गया है। सूर्य देवता को प्रसन्न कर व्यक्ति यश, पड़, प्रतिष्ठा, धन, संपत्ति, सुख सभी कुछ पा सकता है। ये कुछ कारण हैं कि क्यूं धार्मिक एवं ज्योतिष दोनों मायनों में सूर्य को महत्वपूर्ण माना गया है।

मंत्र जाप की संख्या की बात करें तो यह सूर्य की कलाओं से जुड़ी है। ज्योतिष शास्त्र की राय में सूर्य एक वर्ष में 216000 कलाएं बदलता है। इस प्रकार छः महीने में यह 108000 कलाएं बदलता है। इस संख्या में से प्पीछे के तीन शून्य हटाकर केवल 108 की संख्या को लिया गया है। ज्योतिष ने माला के हर एक मोती को सूर्य की कला जितना शक्तिशाली बताते हुए ही 108 अंक को माला के मोतियों से जोड़ा है।

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ग्रहों और राशियों का मेल

ज्योतिष की दूसरी गणना के अनुसार माला के मोतियों की 108 संख्या ग्रहों और राशियों से भी जुडी है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 12 राशियाँ होती हैं। प्रत्येक राशि का संबंध सौरमंडल के 9 ग्रहों से होता है। इन दो संख्याओं यानी 12 और 9 को गुना कर दिया जाए तो 108 संख्या निकलकर आती है। यह भी कारण है कि क्यूं माला के मोतियों की संख्या 108 होती है। ताकि इनके जाप से सभी ग्रहों और राशियों को अपने पक्ष में लाया जा सके। 

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