उज्जैन: भगवान श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार से शिव नवरात्रि महापर्व की शुरुआत हो गई है। इसी के तहत भगवान को महाशिवरात्रि पर सेहरा सजेगा। महोत्सव की शुरुआत पूर्वान्ह में कोटेश्वर महादेव की पूजा के साथ हुई। शासकीय पुजारी पं.घनश्याम शर्मा ने पूजा की। उनके साथ अन्य पूरोहितों एवं पुजारियों ने मंत्रोच्चारण किया।
बारह ज्योर्तिलिंगों में सिर्फ श्री महाकालेश्वर मंदिर में ही शिव नवरात्रि उत्सव की परंपरा है।इस दौरान करीब 25-30 लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इसकी व्यापक व्यवस्था मंदिर प्रबंध समिति ने की है। शिव नवरात्र के 10 दिनों में भगवान श्री महाकालेश्वर का प्रतिदिन विभिन्न स्वरूपों में श्रृंगार किया जाएगा।
मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार शुक्रवार से शिवनवरात्र उत्सव की शुरूआत हुई है। बाबा का विशेष पूजन किया गया है। भगवान कोटेश्वर का विशेष पूजन हुआ है। नवरात्र के 10 दिनों में हमें करीब 25-30 लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। इसमें से 15-16 फरवरी को महाशिवरात्रि में 44 घंटे मंदिर खुला रहेगा,इस दौरान करीब 10 लाख श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए व्यवस्थाएं की गई हैं।
कोटेश्वर भगवान के पूजन से शुरूआत-
शुक्रवार को नवरात्र उत्सव की शुरूआत कोटेश्वर महादेव के पूजन के साथ हुआ। गर्भगृह में मुख्य पुजारी घनश्याम शर्मा के आचार्यत्व में 11 ब्राह्मणों द्वारा भगवान महाकाल का पंचामृत पूजन और एकादश-एकादशनी रुद्राभिषेक किया गया। भोग आरती के पश्चात महाकालेश्वर शिवलिंग को विशेष उबटन,हल्दी सहित अर्पित किया गया।
परंपरा के अनुसार, भगवान को सर्वप्रथम चंदन का उबटन लगाकर स्नान करवाया गया और जलाधारी पर हल्दी अर्पित की गई। इसके बाद भगवान का भांग से विशेष श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल को लाल, गुलाबी और पीले रंग के नए वस्त्र अर्पित किए गए। मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुंडमाला और छत्र से सजे बाबा के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन श्रद्धालुओं ने किए। बाबा को लाल चुनरी का साफा बांधा गया।
विशेष श्रृंगार होगा-
नवरात्र के तहत संध्या पूजन और विशेष श्रृंगार के अंतर्गत प्रतिदिन अपरांह संध्या पूजन शुरू होगा। इसके पाश्चात बाबा महाकाला का भव्य श्रृंगार किया जाएगा। शिवनवरात्रि उत्सव का औपचारिक समापन 18 फरवरी को होगा। इस दिन सायं पूजन से शयन आरती तक श्रद्धालु भगवान श्री महाकालेश्वर के पंच मुखारविन्द स्वरूप के दर्शन कर सकेंगे।
कब कैसा श्रृंगार-
7 फरवरी भगवान नवीन वस्त्रों में दर्शन देंगे।8 फरवरी- कालजयी रूप में शेषनाग श्रृंगार9 फरवरी- घटाटोप श्रृंगार10 फरवरी छबीना श्रृंगार11 फरवरी- राजसी होलकर श्रृंगार12 फरवरी- मनमहेश स्वरूप13 फरवरी- उमा महेश श्रृंगार14 फरवरी- शिव तांडव श्रृंगार
15 फरवरी-महाशिवरात्रि श्रृंगार , इस दिन भगवान का सतत जालधारा से अभिषेक , पूरी रात विशेष महापूजन चलेगा। 16 फरवरी (सेहरा दर्शन) तडके से भगवान को सवा मन फूलों का सेहरा और सप्तधान का मुखौटा धारण कराया जाएगा।
16 को दिन में भस्मार्ती-
वर्ष में केवल एक बार दोपहर में 12 बजे की भस्म आरती 16 फरवरी को होगी। इसके बाद रात 11 बजे मंदिर के पट बंद होंगे। इस दौरान मंदिर के पट लगातार लगभग 44 घंटे खुले रहेंगे।