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Ram Navami 2025: 6 अप्रैल को कितने बजे की जाएगी भगवान राम की पूजा? क्या है शुभ मुहूर्त और पूजन विधि, जानें

By अंजली चौहान | Updated: April 5, 2025 12:47 IST

Ram Navami 2025: 6 अप्रैल को भगवान श्री राम के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में राम नवमी मनाई जाएगी। इस पवित्र दिन पर भक्त व्रत रखते हैं, अनुष्ठान करते हैं, मंत्रों का जाप करते हैं, रामचरितमानस पढ़ते हैं और ईश्वर का आशीर्वाद मांगते हैं।

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Ram Navami 2025: भारत में 6 अप्रैल को राम नवमी मनाई जाएगी जिसके लिए भक्त तैयारियां कर रहे हैं। भगवान राम के जन्मदिन के प्रतीक के रूप में राम नवमी के दौरान कई धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। राम नवमी सबसे महत्वपूर्ण हिंदू त्योहारों में से एक है, जिसे भगवान श्री राम के जन्मोत्सव के रूप में गहरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार धार्मिकता, अनुशासन और सत्य की जीत का प्रतीक है।

भगवान राम ने मानवता के कल्याण के लिए बुराई को नष्ट करने और धर्म को बनाए रखने के लिए जन्म लिया। उनकी दिव्य उपस्थिति लाखों लोगों को प्रेरित करती है, जिससे राम नवमी आध्यात्मिक महत्व का एक पवित्र अवसर बन जाता है।

वैसे तो 6 अप्रैल को राम नवमी मनाई जाएगी जिसके बारे में हर कोई जानता है लेकिन क्या आपको पता है कि पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि क्या है? नहीं न, तो आइए हम आपको बताते हैं..

राम नवमी 2025 शुभ मुहूर्त 

राम नवमी 2025 की नवमी तिथि 5 अप्रैल, 2025 को सुबह 1:23 बजे शुरू होगी और 6 अप्रैल, 2025 को सुबह 3:15 बजे समाप्त होगी। इस दौरान भक्त भगवान श्री राम की पूजा अनुष्ठान कर सकते हैं और शुभ समय पर राम नवमी व्रत और हवन कर सकते हैं।

मध्याह्न मुहूर्त: सुबह 11:08 बजे से दोपहर 1:39 बजे तकमध्याह्न क्षण: दोपहर 12:24 बजे

राम नवमी पूजा विधि, ज्योतिष और धार्मिक महत्व

शुभ स्नान और संकल्प: राम नवमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा जल या साफ पानी से स्नान करें। साफ कपड़े पहनें, भगवान श्री राम का ध्यान करें और व्रत और पूजा का संकल्प लें।

पूजा स्थल की पवित्रता और स्थापना: घर के मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें। एक मंच पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और भगवान श्री राम, देवी सीता, लक्ष्मण और हनुमान की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

पूजा सामग्री और पंचोपचार पूजा: भगवान को चंदन, रोली, चावल, धूप, दीप, फूल माला, तुलसी के पत्ते और प्रसाद चढ़ाएं। भगवान राम को पंचामृत से स्नान कराएं और उनके चरणों में सुगंधित पुष्प अर्पित करें।

भोग और प्रसाद: भगवान राम को फल, मिठाई, पंचामृत और विशेष रूप से केसर युक्त खीर का भोग लगाएं। तुलसी के पत्ते डालने से पूजा का आध्यात्मिक लाभ कई गुना बढ़ जाता है।

पवित्र ग्रंथों का पाठ: इस दिन श्री रामचरितमानस, सुंदरकांड, राम रक्षा स्तोत्र, आदित्य हृदय स्तोत्र और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना लाभकारी माना जाता है। इससे ग्रहों का सामंजस्य और जीवन में समृद्धि आती है।

आरती और मंत्र जाप: पूजा के बाद भगवान श्री राम की शुभ आरती करें और सभी भक्तों में प्रसाद वितरित करें।

(डिस्क्लेमर: इस लेख की सामग्री पूरी तरह से मान्यताओं पर आधारित है, और इसे सामान्य मार्गदर्शन के रूप में लिया जाना चाहिए। व्यक्तिगत अनुभव भिन्न हो सकते हैं। लोकमत हिंदी प्रस्तुत किए गए किसी भी दावे या जानकारी की सटीकता या वैधता का दावा नहीं करता है। यहां चर्चा की गई किसी भी जानकारी या विश्वास पर विचार करने या उसे लागू करने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से परामर्श करने की दृढ़ता से अनुशंसा की जाती है।)

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