लाइव न्यूज़ :

नागपंचमी पर भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन हेतु मध्यरात्रि खुले मंदिर के कपाट, भक्तों का लग गया सैलाब

By मुकेश मिश्रा | Updated: August 15, 2018 08:26 IST

रात में भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट खुलते ही श्रद्धालुओं की दर्शन की आस पूर्ण हुई।

Open in App

उज्जैन 15 अगस्त। वर्ष में एक बार नागपंचमी के अवसर पर खुलने वाले भगवान नागचन्देश्वर के पट आज रात्रि 12 बजे के बाद शुभ मुहुर्त में खुले। मंदिर के पट खुलने के बाद श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाडें के महन्त श्री प्रकाश पुरी महाराज ने विधि-विधान से श्री नागचन्द्रेश्वर भगवान का पूजन-अर्चन किया। इस अवसर पर विधायक डॉ. मोहन यादव एवं अखाडें के अनुयायी मौजूद थे। इसके बाद भगवान नागचन्द्रेश्वर के दर्शन आम दर्शनार्थियों के लिए खोल दिये गये। पूजन अवसर पर वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों द्वारा मंदिर परिसर में व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए निरन्तर निरीक्षण किया जाता रहा। इस अवसर पर संभाग आयुक्त श्री एम.बी.ओझा, आई.जी. श्री राकेश गुप्ता,  मौजुद थें।

नागचंद्रेश्वर मंदिर

क्यों खुलता है सिर्फ साल में एक दिन

हिंदू धर्म में सदियों से नागों की पूजा करने की परंपरा रही है। हिंदू परंपरा में नागों को भगवान का आभूषण भी माना गया है। भारत में नागों के अनेक मंदिर हैं, इन्हीं में से एक मंदिर है उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर का,जो की उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित है। इसकी खास बात यह है कि यह मंदिर साल में सिर्फ एक दिन नागपंचमी (श्रावण शुक्ल पंचमी) पर ही दर्शनों के लिए खोला जाता है। ऐसी मान्यता है कि  नागराज तक्षक स्वयं मंदिर में रहते हैं।

नागचंद्रेश्वर मंदिर में  11वीं शताब्दी की एक अद्भुत प्रतिमा है, इसमें फन फैलाए नाग के आसन पर शिव-पार्वती बैठे हैं। कहते हैं यह प्रतिमा नेपाल से यहां लाई गई थी। उज्जैन के अलावा दुनिया में कहीं भी ऐसी प्रतिमा नहीं है।

पूरी दुनिया में यह एकमात्र ऐसा मंदिर है, जिसमें विष्णु भगवान की जगह भगवान भोलेनाथ सर्प शय्या पर विराजमान हैं। मंदिर में स्थापित प्राचीन मूर्ति में शिवजी, गणेशजी और मां पार्वती के साथ दशमुखी सर्प शय्या पर विराजित हैं। शिवशंभु के गले और भुजाओं में भुजंग लिपटे हुए हैं।

क्या है पौराणिक मान्यता 

सर्पराज तक्षक ने शिवशंकर को मनाने के लिए घोर तपस्या की थी। तपस्या से भोलेनाथ प्रसन्न हुए और उन्होंने सर्पों के राजा तक्षक नाग को अमरत्व का वरदान दिया। मान्यता है कि उसके बाद से तक्षक राजा ने प्रभु के सा‍‍‍न्निध्य में ही वास करना शुरू कर दिया।

लेकिन महाकाल वन में वास करने से पूर्व उनकी यही मंशा थी कि उनके एकांत में विघ्न ना हो अत: वर्षों से यही प्रथा है कि मात्र नागपंचमी के दिन ही वे दर्शन को उपलब्ध होते हैं। शेष समय उनके सम्मान में परंपरा के अनुसार मंदिर बंद रहता है। इस मंदिर में दर्शन करने के बाद व्यक्ति किसी भी तरह के सर्पदोष से मुक्त हो जाता है, इसलिए नागपंचमी के दिन खुलने वाले इस मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी कतार लगी रहती है।

यह मंदिर काफी प्राचीन है। माना जाता है कि परमार राजा भोज ने 1050 ईस्वी के लगभग इस मंदिर का निर्माण करवाया था। इसके बाद सिं‍धिया घराने के महाराज राणोजी सिंधिया ने 1732 में महाकाल मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। उस समय इस मंदिर का भी जीर्णोद्धार हुआ था। सभी की यही मनोकामना रहती है कि नागराज पर विराजे शिवशंभु की उन्हें एक झलक मिल जाए। लगभग दो लाख से ज्यादा भक्त एक ही दिन में नागदेव के दर्शन करते हैं।

नागपंचमी पर वर्ष में एक बार होने वाले भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए मंगलवार रात 12 बजे मंदिर के पट खुलें। बुधवार नागपंचमी को रात 12 बजे मंदिर में फिर आरती होगी व मंदिर के पट पुनः बंद कर दिए जाएंगे।

नागचंद्रेश्वर मंदिर की पूजा और व्यवस्था महानिर्वाणी अखाड़े के संन्यासियों द्वारा की जाती है।रात में भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट खुलते ही श्रद्धालुओं की दर्शन की आस पूर्ण हुई।

नागपंचमी को दोपहर 12 बजे कलेक्टर पूजन करेंगे। यह सरकारी पूजा होगी। यह परंपरा रियासतकाल से चली आ रही है। रात 8 बजे श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति द्वारा पूजन होगा।

टॅग्स :नाग पंचमी
Open in App

संबंधित खबरें

पूजा पाठNag Panchami 2024: नाग पंचमी के दिन नाग देवता को ऐसे करें प्रसन्न, मिलेंगे सकारात्मक परिणाम

पूजा पाठNag Panchami 2024: नाग पंचमी पर इस कारण से चूल्हे पर नहीं चढ़ाते तवा, नहीं बनाई जाती है रोटी

पूजा पाठNag Panchami 2024 Upay: राशि के अनुसार करें नाग पंचमी पर ये उपाय, दूर होंगी सभी समस्याएं, जानें यहां

पूजा पाठSawan 2024 festivals full calendar: जन्माष्टमी से लेकर रक्षाबंधन तक, सावन के महीने में मनाए जाएंगे ये प्रमुख त्योहार, देखें लिस्ट

पूजा पाठNag Panchami 2024: नागों के त्योहार पर क्या करें और क्या न करें, जानें यहां

पूजा पाठ अधिक खबरें

पूजा पाठPanchang 04 April 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

पूजा पाठRashifal 04 April 2026: कुंभ राशिवालों को अचानक धनलाभ मिलने की संभावना, जानें सभी राशियों का फल

पूजा पाठGrah Gochar April 2026: अप्रैल में 4 राशिवालों के लिए बनेंगे कई राजयोग, ये ग्रह गोचर दे रहे हैं शुभ संकेत

पूजा पाठPanchang 03 April 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

पूजा पाठRashifal 03 April 2026: आज अवसर का लाभ उठाएंगे कर्क राशि के लोग, जानें अन्य सभी राशियों का भविष्य