उज्जैनः विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व परंपरागत नौ की बजाय 10 दिनों तक धूमधाम से मनाया जाएगा। तिथि बढ़ने से फाल्गुन कृष्ण पंचमी से त्रयोदशी तक विस्तारित यह उत्सव 6 से 15 फरवरी तक चलेगा। मंदिर में तैयारियां जोरों पर हैं—रंगाई-पुताई, गर्भगृह की सफाई और रजत दरवाजों की पॉलिश हो रही है। आचार्य पं. नरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि धार्मिक नगरी उज्जैन के राजा बाबा महाकाल के दरबार में शिवरात्रि का विशेष महत्व है। यहां मां सती का अंग गिरने से शिव-पार्वती की लीला जुड़ी है।
कोटितीर्थ पर विराजमान कोटेश्वर महादेव का पूजन-अर्चन प्रारंभिक रस्म है। उसके बाद बाबा का अभिषेक, लघु अभिषेक और चल प्रतिमाओं से श्रृंगार होता है। सामान्यत: नौ दिनों में बाबा अलग-अलग स्वरूपों में दर्शन देते हैं, लेकिन इस बार पहले दो दिन चंदन-वस्त्र श्रृंगार समान रहेगा।
ज्योतिषाचार्य पं. शास्त्री के अनुसार, 6 फरवरी को फाल्गुन कृष्ण पंचमी से शिवनवरात्रि आरंभ होगी। सुबह 8 बजे पुजारी कोटितीर्थ कुंड के कोटेश्वर महादेव को अभिषेक कर हल्दी चढ़ाएंगे। डेढ़ घंटे बाद 9:30 बजे गर्भगृह में पंचामृत अभिषेक, पूजा-अर्चना होगी। 11 ब्राह्मण रुद्रपाठ करेंगे।
दोपहर 1 बजे भोग आरती, 3 बजे संध्या पूजा के बाद नौ रूपों में आकर्षक श्रृंगार होगा। 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर चरमोत्कर्ष आएगा।भक्तों की भारी भीड़ की उम्मीद है। मंदिर प्रबंधन ने विशेष व्यवस्था की है। यह उत्सव भगवान शिव की भक्ति में डुबो देगा।