लाइव न्यूज़ :

Kark Sankranti 2024: आज कर्क संक्रांति पर ऐसे करें सूर्य देव की पूजा, जानें पूजा विधि मंत्र और महत्व

By रुस्तम राणा | Updated: July 16, 2024 13:51 IST

सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में संचरण की प्रक्रिया को संक्रांति के कहते हैं।  सूर्य ग्रह एक माह (करीब 30 दिनों) में अपनी राशि परिवर्तन करते हैं। जिस राशि में सूर्य ग्रह प्रवेश करते हैं उसी राशि के नाम से वह संक्रांति भी जानी जाती है। आज 16 जुलाई को सूर्य देव मिथुन राशि से कर्क राशि में आए हैं। इसलिए आज कर्क संक्रांति है।

Open in App

Kark Sankranti 2024: ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रह को समस्त ग्रहों का राजा, प्रधान कहा जाता है। यह आत्मा, पिता, मान-सम्मान, उच्च पद-प्रतिष्ठा, राजसी जीवन, नेतृत्व आदि कारक होता है। यह सिंह राशि का स्वामी है, जो मेष राशि में उच्च का और तुला राशि में नीच अवस्था में होता है। ग्रहों में चंद्रमा, मंगल और गुरु सूर्य के मित्र ग्रह कहलाते हैं। जबकि शुक्र और शनि से इसकी शत्रुता है। शनि ग्रह सूर्य के पुत्र भी हैं। 

कर्क संक्रांति क्या है?

सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में संचरण की प्रक्रिया को संक्रांति के कहते हैं।  सूर्य ग्रह एक माह (करीब 30 दिनों) में अपनी राशि परिवर्तन करते हैं। जिस राशि में सूर्य ग्रह प्रवेश करते हैं उसी राशि के नाम से वह संक्रांति भी जानी जाती है। आज 16 जुलाई को सूर्य देव मिथुन राशि से कर्क राशि में आए हैं। इसलिए आज कर्क संक्रांति है। इस बार कर्क संक्रांति के दिन साध्य योग, शुभ योग और रवि योग का संयोग बन रहा है। यह योग सूर्य देव की उपासना के लिए शुभ माना जाता है।  

सूर्य देव की पूजा विधि

कर्क संक्रांति को दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। अर्घ्य वाले लोटे में पानी भरकर उसमें लाल चंदन, लाल फूल, गुड़ डालें। अर्घ्य देते समय सूर्य मंत्र का उच्चारण करें। इस दिन दान करना भी शुभ माना जाता है। 

सूर्य प्रार्थना मंत्र

ॐ घृ‍णिं सूर्य्य: आदित्य:। ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः ।ॐ सूर्याय नम: ।ॐ घृणि सूर्याय नम: ।ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ ।

कर्क संक्रांति का महत्व

वैदिक ज्योतिष में कर्क संक्रांति का बहुत महत्व है। इस दिन सूर्य देव मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। कहते हैं कि इस दिन सूर्य देव की पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है। कर्क संक्रांति पर पवित्र नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है। मान्यता है इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और उपवास रखने से जातकों की कुंडली में सूर्य ग्रह मजबूत होता है। साथ ही समाज में मान-सम्मान ऊँचा होता है। इस दिन दान-पुण्य करना भी बेहद पुण्यकारी होता है।

टॅग्स :सूर्यज्योतिष शास्त्रज्योतिषीय संकेत
Open in App

संबंधित खबरें

पूजा पाठPanchang 04 April 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

पूजा पाठRashifal 04 April 2026: कुंभ राशिवालों को अचानक धनलाभ मिलने की संभावना, जानें सभी राशियों का फल

पूजा पाठGrah Gochar April 2026: अप्रैल में 4 राशिवालों के लिए बनेंगे कई राजयोग, ये ग्रह गोचर दे रहे हैं शुभ संकेत

पूजा पाठPanchang 03 April 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

पूजा पाठRashifal 03 April 2026: आज अवसर का लाभ उठाएंगे कर्क राशि के लोग, जानें अन्य सभी राशियों का भविष्य

पूजा पाठ अधिक खबरें

पूजा पाठगुड फ्राइडे : क्रूस पर इंसानियत का देवता

पूजा पाठBaisakhi 2026: सिर्फ पंजाब ही क्यों? भारत के इन 5 शहरों में भी दिखती है बैसाखी की रौनक, चेक करें बेस्ट स्पॉट्स

पूजा पाठHanuman Jayanti Puja Muhurat 2026: नोट कर लें बजरंगबली की पूजा के ये 2 सबसे शुभ मुहूर्त, बरसेगी पवनपुत्र की कृपा

पूजा पाठPanchang 02 April 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

पूजा पाठRashifal 02 April 2026: आज पूर्णिमा पर इन 6 राशियों की कटेगी चांदी, शुभ समाचार मिलने की संभावना