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रामायण में दर्ज है सुखी वैवाहिक जीवन के राज जिससे बढ़ता है पति-पत्नी में प्यार

By गुलनीत कौर | Updated: May 10, 2018 08:04 IST

विवाह के ठीक बाद से ही श्रीराम ने माता सेता को जीवन में बराबर का हक दिया। जो वादा उन्होंने अपनी पत्नी से किया उसे हमेशा निभाया। कभी अपनी पत्नी को जीवन में कमतर नहीं आंका।

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सुखी गृहस्थ जीवन पाने की कामना हर पति-पत्नी कि होती है। इसके लिए वे बड़ों से सलाह भी लेते हैं और खुद भी एक दूसरे को समझने की कोशिश करते हैं। लेकिन हिन्दू धर्म के पवित्र धार्मिक ग्रन्थ रामायण में ही सफल गृहस्थ जीवन के रहस्य छिपे हैं। आइए आपको बताते हैं कैसे भगवान और राम और माता सीता ने अपने वैवाहिक जीवन को सफल बनाया था। 

- भगवान श्रीराम ने उस युग में अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत में ही एक मिसाल पेश की थी। उन्होंने अपनी पत्नी सीता को शादी के बाद एक उपहार दिया था। उपहार में उन्होंने अपनी पत्नी सीता से यह वादा किया कि जिस तरह से अन्य राजा एक से अधिक विवाह करते हैं और अनेकों रानियों के साथ रहते हैं, मैं ऐसा नहीं करुंगा। मैं जीवन भर केवल तुम्हारे प्रति निष्ठावान रहूंगा। 

- विवाह के ठीक बाद से ही श्रीराम ने सीता को जीवन में बराबर का हक दिया। जो वादा उन्होंने अपनी पत्नी से किया उसे हमेशा निभाया। कभी अपनी पत्नी को जीवन में कमतर नहीं आंका।

- पति-पत्नी के रिश्ते में कभी भी दो लोग की बात नहीं होती, हमेशा ही एक रिश्ते की बात होती है। पति-पत्नी भले ही दो लोग होते हैं लेकिन उन्हें एक जान कहा जाता है और ये जान अलग हो जाए तो जीवन रुक-सा जाता है। कुछ ऐसा ही हुआ श्रीराम और माता सीता के बीच। सीता हरण के बाद दोनों का जीवन मानो ठहर गया था। 

- वैवाहिक जीवन में एक दूसरे को समझने के साथ साथी के गुणों को भी समझना और अपनाना चाहिए। पत्नी में क्यु सारे श्रेष्ठ गुण होते हैं जिन्हें समय के साथ पति को अपनाना चाहिए। प्रेम, सेवा, उदारता, समर्पण, स्त्रियों के इन गुणों को समय के साथ पतियों को अपनाना चाहिए। यह दोनों को सक्फल वैवाहिक जीवन की ओर ले जाता है। 

- पत्निया हमेशा ही पतिव्रता पत्नी बनने की हर कोशिश करती हैं लेकिन सफल वैवाहिक जीवन की प्राप्ति तभी होती है जब पति भी अपनी पत्नी के प्रति निष्ठावान रहते हैं और पतिव्रता होने का धर्म निभाते हैं। 

- वैवाहिक जीवन में जो नियम और क़ानून पत्नी पर लागू होते है, उन्हें पति पर भी यदि लागू किया जाए तो दोनों एक ही धारा पर चलते हैं। इससे आपसी मतभेद कम होते हैं और प्यार भी बना रहता है। 

टॅग्स :रामायणभगवान राम
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