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Ganga Dussehra 2024 Date: कब है गंगा दशहरा? जानें तिथि, शुभ योग, पूजा विधि और महत्व

By रुस्तम राणा | Updated: April 30, 2024 15:30 IST

Ganga Dussehra 2024: धार्मिक मान्यता है कि ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन मां गंगा का आगमन धरती पर हुआ था। गंगा दशहरा वाले दिन श्रद्धालु मां गंगा की विधि-विधान से पूजा करते हैं। वे काशी, हरिद्वार और प्रयाग के घाटों पर गंगा में डुबकी लगाने जाते हैं। 

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Ganga Dussehra 2024: गंगा दशहरा हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व हर साल ज्येष्ठ माह शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन गंगा नदी में स्नान करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से श्रद्धालुओं के दस प्रकार के पाप मिट जाते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता है कि ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन मां गंगा का आगमन धरती पर हुआ था। गंगा दशहरा वाले दिन श्रद्धालु मां गंगा की विधि-विधान से पूजा करते हैं। वे काशी, हरिद्वार और प्रयाग के घाटों पर गंगा में डुबकी लगाने जाते हैं। 

कब है गंगा दशहरा 2024?

इस वर्ष ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 16 जून को देर रात 2 बजकर 32 मिनट से शुरू होकर 17 जून को ब्रह्म बेला 4 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। ऐसी स्थिति में गंगा दशहरा 16 जून 2024 को मनाया जाएगा। 

गंगा दशहरा को योग

इस वर्ष गंगा दशहरा को कुछ खास योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन संध्या 9 बजकर 3 मिनट तक वरीयान योग है। इसके बाद परिध योग बन रहा है। साथ ही गंगा दशहरा के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है। इन योगों में गंगा स्नान और दान-पुण्य से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

ऐसे करें गंगा दशहरा की पूजा

शुभ मुहूर्त में गंगा स्नान करें। यदि घर हैं तो घर में नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें। स्नान के दौरान ऊं नम: शिवाय नारायण्यै दशहराय गंगाय नम: का जाप करें। इस दिन 10 अंक का विशेष महत्व है।पूजा करते समय सभी सामग्रियों को 10 की मात्रा में चढ़ाएं। जैसे 10 फूल, 10 दीपक, 10 फल आदि।

गंगा दशहरा का महत्व

गंगा दशहरा, दस शुभ वैदिक गणनाओं के लिए मनाया जाता है जो विचारों, भाषण और कार्यों से जुड़े दस पापों को धोने की गंगा की क्षमता को दर्शाता है। दस वैदिक गणनाओं में ज्येष्ठ माह, शुक्ल पक्ष, दसवां दिन, गुरुवार, हस्त नक्षत्र, सिद्ध योग, गर-आनंद यौग और कन्या राशि में चंद्रमा और वृष राशि में सूर्य शामिल हैं। मान्यता ऐसी है कि इस दिन मां गंगा की पूजा करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

गंगा दशहरा की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, मां गंगा का अवतरण ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को हस्त नक्षत्र में हुआ था। माना जाता है भागीरथ अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए धरती पर गंगा को लाए थे। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा ने दर्शन दिए और भागीरथ ने उनसे धरती पर आने की प्रार्थना की। मां गंगा ने कहा “मैं धरती पर आने के लिए तैयार हूं , लेकिन मेरी तेज धारा धरती पर प्रलय ले आएगी। जिस पर भागीरथ ने उनसे इसका उपाय पूछा और गंगा ने शिव जी को इसका उपाय बताया। माना जाता है कि मां गंगा के प्रचंड वेग को नियंत्रित करने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में समा लिया जिससे धरती को प्रलय से बचाया जा सके। 

टॅग्स :गंगा दशहराहिंदू त्योहार
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