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Eid ul-Fitr 2026 Date: गुरुवार को नहीं हुआ चाँद का दीदार, भारत में ईद की तारीख हुई कन्फर्म

By रुस्तम राणा | Updated: March 19, 2026 21:03 IST

लखनऊ की 'मरकज़ी चाँद कमेटी, फिरंगी महल' ने घोषणा की है कि भारत में शव्वाल का चाँद नहीं देखा गया है। इसलिए, 20 मार्च, 2026 को 30वां रोज़ा रखा जाएगा, और ईद-उल-फितर शनिवार, 21 मार्च, 2026 को मनाई जाएगी।

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Eid ul-Fitr 2026 Date: रमजान माह की समाप्ति ईद-उल-फितर के साथ होती है। एक महीने के रोज़े, सुबह-सवेरे उठना और लंबे दिनों के बाद, रोज़मर्रा का रूटीन बदल जाता है। हाँ, खाने-पीने का सिलसिला फिर से शुरू हो जाता है, लेकिन साथ ही कुछ पूरा होने का एहसास भी होता है। ईद-उल-फितर, को अक्सर 'मीठी ईद' भी कहा जाता है। इस साल भारत में ईद कब मनाई जाएगी? आइए जानते हैं- 

भारत में ईद-उल-फितर 2026 की तारीख

ईद-उल-फितर की तारीख चाँद के दीदार पर निर्भर करती है, और भारत में इसकी पुष्टि स्थानीय चाँद देखने वाली कमेटियों द्वारा की जाती है।

लखनऊ की 'मरकज़ी चाँद कमेटी, फिरंगी महल' ने घोषणा की है कि भारत में शव्वाल का चाँद नहीं देखा गया है। इसलिए, 20 मार्च, 2026 को 30वां रोज़ा रखा जाएगा, और ईद-उल-फितर शनिवार, 21 मार्च, 2026 को मनाई जाएगी।

हर साल तारीख क्यों बदल जाती है?

ईद-उल-फितर इस्लामी चंद्र कैलेंडर (लूनर कैलेंडर) के अनुसार मनाई जाती है, जिसमें हर महीना नए चाँद के दीदार के साथ शुरू होता है। इसी वजह से, ग्रेगोरियन कैलेंडर के हिसाब से यह त्योहार हर साल लगभग 10 से 11 दिन पहले आ जाता है।

यह व्यवस्था इस बात को भी समझाती है कि तारीख की पुष्टि के लिए हमेशा शाम तक इंतज़ार क्यों किया जाता है, क्योंकि चाँद का दिखना ही सही तारीख तय करता है।

ईद-उल-फितर का क्या महत्व है?

ईद-उल-फितर रमज़ान के महीने के अंत का प्रतीक है - यह वह महीना है जिसमें सुबह से लेकर सूरज डूबने तक रोज़े रखे जाते हैं। लेकिन यह सिर्फ़ खाने-पीने तक ही सीमित नहीं है। इस महीने की बुनियाद अनुशासन, सब्र और आत्म-चिंतन पर टिकी होती है।

इस तरह, ईद एक ऐसा पल बन जाती है जब ज़िंदगी में फिर से संतुलन लौट आता है। इसमें कृतज्ञता का भाव छिपा होता है। यह इस बात की एक शांत और विनम्र स्वीकृति है कि हमने कुछ बहुत ही सार्थक और महत्वपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।

कैसे मनाई जाती है ईद?

दिन की शुरुआत ईद की नमाज़ से होती है, जो मस्जिदों या खुले मैदानों में अदा की जाती है। इसके बाद, यह ज़्यादा निजी हो जाता है। परिवार इकट्ठा होते हैं, साथ मिलकर खाना खाते हैं, और पूरे दिन घर मेहमानों से भरे रहते हैं।

सेवइयां, खीर और फिरनी जैसी मीठी चीज़ें बनाई जाती हैं। लोग रिश्तेदारों से मिलने जाते हैं और एक-दूसरे को "ईद मुबारक" कहते हैं। समुदाय के भीतर दान और मिल-बांटकर रहने पर भी खास ज़ोर दिया जाता है।

असल में, ईद-उल-फ़ितर बहुत सीधी-सादी है। यह एक तरह से किसी चीज़ के खत्म होने का एहसास है। और फिर, धीरे-धीरे, रोज़मर्रा की ज़िंदगी में वापसी।

टॅग्स :ईदइस्लाम
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